ओडिशा का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में मंदिर, समुद्र तट और पारंपरिक व्यंजन आते हैं. लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि राज्य के कई खास खाद्य उत्पादों और स्वादों को GI टैग भी मिल चुका है. खजुरी गुड़ा की मिठास हो, रसाबली का स्वाद हो, काला जीरा राइस की खुशबू हो या केवड़ा की महक, ये सभी अपने-अपने इलाके की ऐसी पहचान हैं जिन्हें अब कानूनी सुरक्षा भी हासिल है. GI टैग मिलने के बाद इन उत्पादों को सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिली है. इससे स्थानीय किसानों, उत्पादकों और छोटे कारोबारियों को भी फायदा पहुंच रहा है.
आखिर GI टैग होता क्या है?
GI यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग किसी ऐसे उत्पाद को दिया जाता है जिसकी पहचान किसी खास इलाके से जुड़ी होती है. यह टैग बताता है कि उस उत्पाद की गुणवत्ता, स्वाद, खुशबू या विशेषता उस क्षेत्र की मिट्टी, मौसम और पारंपरिक तरीके से जुड़ी हुई है. इससे नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलती है और असली उत्पाद बनाने वालों को आर्थिक लाभ मिलता है.
1. ओडिशा खजुरी गुड़ा (Odisha Khajuri Guda)
यह गुड़ खजूर के पेड़ से निकाले गए मीठे रस को धीमी आंच पर पकाकर तैयार किया जाता है. सर्दियों के मौसम में इसका उत्पादन सबसे ज्यादा होता है. इसका रंग गहरा भूरा होता है और स्वाद सामान्य गन्ने के गुड़ से थोड़ा अलग माना जाता है. ओडिशा के कई इलाकों में इसका इस्तेमाल मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों में किया जाता है.
2. केंद्रपाड़ा रसाबली (Kendrapara Rasabali)

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रसाबली छेना से बनने वाली ओडिशा की पारंपरिक मिठाई है. पहले छेना को चपटा आकार देकर हल्का तला जाता है, फिर उसे गाढ़े मीठे दूध में डुबोया जाता है. इसका स्वाद रसगुल्ले से अलग और ज्यादा रिच माना जाता है. यह खास तौर पर केंद्रपाड़ा और आसपास के इलाकों में लोकप्रिय है.
3. ओडिशा रसगोला (Odisha Rasagola)

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ओडिशा रसगोला छेना और चीनी की चाशनी से तैयार किया जाता है. यह सामान्य सफेद रसगुल्ले जैसा दिखता जरूर है, लेकिन इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान ओडिशा की परंपराओं से जुड़ी मानी जाती है. खास तौर पर पुरी की रथ यात्रा से इसका संबंध बताया जाता है.
4. ढेंकानाल मगजी (Dhenkanal Magaji)

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ढेंकानाल मगजी ओडिशा की एक पारंपरिक मिठाई है. इसकी बनावट मुलायम और हल्की दानेदार होती है. यह मिठाई लंबे समय से ढेंकानाल क्षेत्र की खाद्य परंपरा का हिस्सा रही है और त्योहारों व खास मौकों पर बनाई जाती है.
5. सिमिलीपाल काई चटनी (Similipal Kai Chutney)

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यह देश की सबसे अनोखी GI टैग खाद्य चीजों में से एक है. इसे लाल चींटियों और उनके अंडों से तैयार किया जाता है. सिमिलीपाल क्षेत्र के आदिवासी समुदाय पीढ़ियों से इसे बनाते आ रहे हैं. इसमें तीखा और खट्टा स्वाद होता है तथा इसे स्थानीय खानपान का अहम हिस्सा माना जाता है.
6. कोरापुट काला जीरा राइस (Koraput Kalajeera Rice)
यह छोटे दानों वाला सुगंधित चावल है, जिसे उसकी खुशबू की वजह से काफी पसंद किया जाता है. पकने के बाद इसमें हल्की प्राकृतिक महक आती है. कोरापुट के आदिवासी इलाकों में इसकी खेती लंबे समय से की जा रही है. इसे अक्सर ओडिशा की सबसे खास चावल किस्मों में गिना जाता है.
7. कंधमाल हल्दी (Kandhamal Haldi)
कंधमाल की हल्दी अपने गहरे रंग और अच्छी क्वालिटी के लिए जानी जाती है. इसे पहाड़ी इलाकों में उगाया जाता है और स्थानीय किसान लंबे समय से इसकी खेती करते आ रहे हैं. मसाले के रूप में इस्तेमाल होने के अलावा इसका उपयोग कई घरेलू नुस्खों में भी किया जाता है.
8. नयागढ़ कांटेइमुंडी बैंगन (Nayagarh Kanteimundi Brinjal)
यह बैंगन की एक खास स्थानीय किस्म है, जो मुख्य रूप से नयागढ़ जिले में उगाई जाती है. इसका आकार सामान्य बैंगनों से अलग होता है और स्थानीय लोग इसे कई पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल करते हैं. इसकी खेती लंबे समय से उसी क्षेत्र में होती आ रही है.
9. गंजाम केवड़ा फूल (Ganjam Kewda Flower)
केवड़ा फूल अपनी तेज और मीठी खुशबू के लिए जाना जाता है. गंजाम क्षेत्र में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. यही फूल बाद में केवड़ा जल और केवड़ा रूह बनाने के काम आता है. इसकी खुशबू का इस्तेमाल मिठाइयों, पेय पदार्थों और कई पारंपरिक खाद्य उत्पादों में किया जाता है.
10. गंजाम केवड़ा रूह (Ganjam Kewda Rooh)
यह केवड़ा फूल से निकाला गया प्राकृतिक अर्क होता है. इसका इस्तेमाल बिरयानी, मिठाइयों, शरबत और कई दूसरे व्यंजनों में खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है. भारत में इस्तेमाल होने वाले केवड़ा एसेंस का बड़ा हिस्सा ओडिशा के गंजाम क्षेत्र से आता है. इसकी पहचान देश के साथ-साथ विदेशों तक पहुंच चुकी है.
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