दाल में थोड़ा सा रस निचोड़ना हो, चाट का स्वाद बढ़ाना हो या फिर तपती गर्मी में एक गिलास ठंडी शिकंजी बनानी हो, नींबू के बिना हमारी रसोई का काम अधूरा सा लगता है. अचार के शौकीनों के लिए तो इसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में एक ऐसी जगह भी है, जिसकी पहचान ही नींबू से जुड़ी हुई है?
कर्नाटक के बीजापुर (विजयपुर) जिले में बसा 'इंडी' नाम का एक छोटा सा इलाका अपनी खास किस्म के नींबुओं के लिए देश-विदेश में मशहूर है. इसी वजह से इसे 'लैंड ऑफ लेमन' यानी नींबू की राजधानी कहा जाता है.

कागजी नींबू की खास पहचान
यहां उगाई जाने वाली किस्म को 'कागजी नींबू' कहा जाता है. 'कागजी' नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसका छिलका कागज की तरह बहुत ही पतला होता है. 1900 के शुरुआती दशक से ही इंडी और सिंदगी तालुका में इसकी खेती होती आ रही है.
क्यों खास है ये नींबू?
भरपूर रस और तीखा खट्टापन: पतला छिलका होने के कारण इसमें रस बहुत ज्यादा निकलता है.
विटामिन सी का खजाना: इसमें विटामिन C की मात्रा काफी ज्यादा होती है.
तेज खुशबू: इसकी खट्टी खुशबू और स्वाद किसी भी खाने की रंगत बदल देता है.
इंटरेस्टिंग फैक्ट्स
आपको जानकर हैरानी होगी कि अकेले विजयपुर जिला पूरे कर्नाटक का लगभग 58% नींबू पैदा करता है.
- अचार से लेकर विदेशों तक का सफर
- घर में अचार डालना हो, जूस बनाना हो या फिर शिकंजी का सीरप, यह नींबू हर जगह इस्तेमाल होता है सिर्फ रसोई तक ही नहीं, बल्कि फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में भी इसकी काफी मांग है.
GI Tag कब मिला?
इसकी इसी खासियत को देखते हुए साल 2023 में इसे भौगोलिक संकेत यानी GI Tag मिला, जिससे 'इंडी लेमन' को एक आधिकारिक पहचान मिली. इतना ही नहीं, भारत के साथ-साथ अब विदेशों में भी लोग इसके दीवाने हो रहे हैं. अगस्त 2025 में इसकी पहली खेप यूएई भेजी गई थी. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी इसके सैंपल भेजे गए हैं.
अगली बार जब आप खाने में नींबू निचोड़ें, तो एक बार कर्नाटक के इस 'इंडी लेमन' को जरूर याद कीजिएगा.
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