जब भी हम किसी त्योहार या खास मौके पर मार्केट से बढ़िया मिठाई खरीदने जाते हैं तो सबसे पहले हमारी नजर उस पर लगी चमचमाती चांदी की पत्ती यानी वर्क पर पड़ती है ये वर्क देखने में जितना शानदार और खाने में रिच लगता है, इसको बनाने का तरीका उतना ही हैरान करने वाला है. अगर आपको भी नहीं पता कि ये चांदी का वर्क कैसे बनता है? तो सबसे पहले इस वीडियो को देखें,
हाथों की मेहनत का कमाल:
- सबसे पहले चांदी के छोटे-छोटे टुकड़ों को एक खास तरह के पतले कागज या परतों के बीच में सेट किया जाता है.
- इसके बाद इस बंडल पर हथौड़े से लगातार और एक जैसी चोटें मारी जाती हैं.
- ये प्रोसेस तब तक चलता है जब तक कि चांदी का वो टुकड़ा एकदम ट्रांसपेरेंट और पतली सी पत्ती यानी वर्क में न बदल जाए.
ऐसे क्यों बनाया जाता है चांदी का वर्क?
बहुत से लोगों को लगता है कि ये सब बड़ी मशीनों से बनता होगा, लेकिन आज भी असली और पारंपरिक तरीके से इसे हाथों की कारीगरी से ही बनाया जाता है,
- इसमें कारीगर की सालों की मेहनत और उनका अनुभव जुड़ा होता है.
- चांदी की पत्ती को बीच में रखने के लिए स्पेशल शीट्स का यूज़ होता है ताकि वो चिपके नहीं.
- हथौड़े की एक-एक चोट पर पूरा कंट्रोल रखना पड़ता है ताकि चांदी टूटे नहीं और एक जैसी पतली शीट बने.
चांदी के वर्क के फायदे?
पेट के लिए अच्छा: पुराने लोग कहते हैं चांदी की तासीर ठंडी होती है, इसलिए मिठाई खाने के बाद पेट में जलन नहीं होती.
बैक्टीरिया से बचाता है: ऐसा माना जाता है कि चांदी में बैक्टीरिया को रोकने की ताकत होती है, इसलिए पहले के जमाने में मिठाई पर वर्क लगाया जाता था ताकि वो जल्दी खराब न हो.
मिठाई को शुद्ध दिखाता है: गांव में तो यही हिसाब है, जिस मिठाई पर चमकदार वर्क लगा हो समझो वो बढ़िया दुकान की और फ्रेश है.
मन को अच्छा लगता है: चमकती हुई बर्फी देखकर ही खाने का मन कर जाता है, त्योहार वाली फील आ जाती है.
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