Parijat Leaves Kadha Recipe: सितंबर-अक्टूबर के महीने में हरसिंगार के पेड़ पर सफेद और नारंगी रंग के फूल हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. वहीं, इसकी खुशबू दूर से ही लोगों को अपनी ओर खींचती है. इसलिए इसे नाइट जैस्मिन भी कहा जाता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि ये पेड़ प्रकृति को न सिर्फ खुशबू और खूबसूरती देता, बल्कि इसके फूल से लेकर पत्तियां कई तरह की आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होती है.
हरसिंगार यानि परिजात के पत्तों की बात करें, तो बदलते मौसम में इसका काढ़ा बनाकर पीना स्वास्थ्य के लिए काफी हेल्दी माना जाता है. इसकी गर्माहट आपके शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ कमजोर इम्यूनिटी को भी बूस्ट करती है. यहां जानते हैं हरसिंगार के पत्तों का काढ़ा कैसे बनाएं और इसके फायदे क्या हैं?
हरसिंगार (Parijat) क्या है?
हरसिंगार, जिसे पारिजात (Parijat) और नाइट जैस्मिन (Night Jasmine) के नाम से भी जाना जाता है, एक औषधीय पौधा है. इसके सफेद और नारंगी रंग के सुगंधित फूल काफी लोकप्रिय होते हैं. आयुर्वेद में हरसिंगार के फूल, पत्ते और छाल का पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है. बदलते मौसम में इसके पत्तों से बना काढ़ा कई लोगों द्वारा सेवन किया जाता है.
हरसिंगार का काढ़ा कब पीना चाहिए?
हरसिंगार के पत्तों का काढ़ा सुबह खाली पेट या शाम के समय पिया जा सकता है. हालांकि, इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. यदि आप पहली बार इसका सेवन कर रहे हैं, तो किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर माना जाता है.

-डॉ. राम अवतार
किन लोगों को हरसिंगार का काढ़ा पीने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
कुछ लोगों को हरसिंगार का काढ़ा पीने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए, जैसे:
- डायबिटीज के मरीज
- हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग
- नियमित रूप से कोई दवा लेने वाले लोग
- गर्भवती महिलाएं
- स्तनपान कराने वाली महिलाएं
- किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज
हरसिंगार के पत्ते का काढ़ा कैसे बनाएं?
आवश्यक सामग्री
- हरसिंगार के पत्ते- 5 से 7 ताजे
- पानी - 2 कप
- अदरक का टुकड़ा - 1 इंच
- तुलसी पत्ते - 4 से 5
- गुड़ या शहद - ऑप्शन
हरसिंगार का काढ़ा बनाने की विधि
- सबसे पहले हरसिंगार के पत्तों को अच्छी तरह धो लें, ताकि उन पर लगी धूल या गंदगी साफ हो जाए.
- अब एक पैन लें, इसमें 2 कप पानी डालें और उसमें पत्तों को थोड़ा तोड़कर डाल दें.
- स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें अदरक और तुलसी के पत्तों को डालकर अच्छे से उबालें.
- पानी को मीडियम आंच पर उबालें. जब पानी आधा रह जाए, तो गैस बंद कर दें.
- इसके बाद काढ़े को छानकर एक कप में निकाल लें.
- स्वाद के लिए इसमें थोड़ा शहद या गुड़ मिला सकते हैं.
- इस बात का ध्यान रखें क शहद को हमेशा काढ़ा थोड़ा ठंडा होने के बाद ही मिलाएं.
काढ़े का स्वाद कैसे बेहतर बनाएं?
हरसिंगार के पत्तों का स्वाद थोड़ा कसैला और कड़वा होता है. स्वाद ठीक करने के लिए आप इसमें ये चीजें मिला सकते हैं:
- 2-3 तुलसी की पत्तियां
- कद्दूकश किया हुआ जरा सा अदरक
- स्वाद के लिए थोड़ा सा गुड़
- अगर शहद मिलाना चाहते हैं, तो काढ़ा हल्का गुनगुना होने पर ही मिलाएं. उबलते हुए काढ़े में शहद कभी न डालें.
हरसिंगार का काढ़ा कब और कैसे पिएं?
हरसिंगार के पत्तों का काढ़ा सुबह खाली पेट या शाम के समय पी सकते हैं. हालांकि, इसकी मात्रा सीमित रखें. वहीं, अगर आप इसका सेवन पहली बार कर रहे हैं, तो किसी आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह लें.
हरसिंगार के पत्तों के संभावित फायदे
- इम्यूनिटी को सपोर्ट कर सकते हैं
- मौसमी संक्रमण के दौरान उपयोग किए जाते हैं
- आयुर्वेद में पारंपरिक इस्तेमाल
- एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं
किन लोगों को हरसिंगार के पत्तों का काढ़ा नहीं पीना चाहिए?
अगर आप पहले से किसी बीमारी जैसे- ब्लड शुगर, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर इत्यादि से जूझ रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करें. वहीं, गर्भवती महिलाओं को भी इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेने की जरूरत होती है.
काढ़ा पीने का सबसे सही समय
हरसिंगार का काढ़ा पीने का सबसे बढ़िया समय सुबह खाली पेट माना जाता है. अगर सुबह वक्त न मिले, तो आप इसे शाम को भी ले सकते हैं. सुबह पीने से बदन को गर्माहट मिलती है और सुस्ती दूर होती है. वहीं शाम को लेने से बदलते मौसम में होने वाली जकड़न से राहत मिलती है. पर ध्यान रहे, एक बार में बहुत ज्यादा न पिएं. अगर पहली बार ट्राय कर रहे हैं, तो थोड़ी मात्रा से शुरुवात करें.
क्या इसको रोज पी सकते हैं?
हर दिन बिना सोचे-समझे इसे पीना सही नहीं है. आयुर्वेद में इसे बहुत असरदार जड़ी-बूटी माना गया है, इसलिए इसे लगातार कई हफ्तों तक नहीं पीना चाहिए. हर किसी की तासीर अलग होती है. बेहतर होगा कि 7-10 दिन पीने के बाद कुछ दिन का गैप रखें या किसी जानकार वैध या डॉक्टर से पूछकर ही नियम बनाएं.
हरसिंगार का दूसरा नाम क्या है?
हरसिंगार को कई लोग पारिजात कहते हैं. अंग्रेज़ी में इसे 'नाइट जैस्मिन' (Night Jasmine) बोला जाता है. इसका साइंटिफिक नाम Nyctanthes arbor-tristis है. इसके फूल सफेद होते हैं और डंडी नारंगी रंग की, जो रात में ही खिलते हैं और बहुत खुशबू देते हैं. इसके पत्ते, छाल और फूल सभी का इस्तेमाल घरेलू उपायों में होता है.
गर्भवती महिलाएं पी सकती हैं क्या?
प्रेगनेंसी में हरसिंगार का काढ़ा बिल्कुल भी बिना पूछे नहीं पीना चाहिए. इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और इसकी तासीर काफी गरम होती है. इसलिए अपनी गाइनोकोलॉजिस्ट या डॉक्टर से पूछे बिना कोई भी काढ़ा न लें.
डायबिटीज के मरीज क्या करें?
अगर आपको शुगर की बीमारी है, तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे लें. ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आप पहले से शुगर की दवा या इंसुलिन ले रहे हैं, तो काढ़ा पीने से शुगर लेवल पर असर पड़ सकता है. अगर बीपी या किडनी की भी दिक्कत है, तब तो खुद से इसका इस्तमाल बिल्कुल न करें.
इसमें कौन से गुण पाए जाते हैं?
हरसिंगार के पत्तों में भरपूर एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं. ये मौसम के बदलाव से होने वाले इंफेक्शन से लड़ने में भी बदन की मदद करते हैं. पर हां, ये कोई जादुई दवाई नहीं है, इसलिए किसी गंभीर बीमारी में इसे डॉक्टर के इलाज की जगह न दें.
एक्सपर्ट के बारे में : इस लेख को लिखने के लिए डॉ. राम अवतार दिल्ली सरकार के योग विभाग के सेवानिवृत्त प्रोजेक्ट ऑफिसर से जानकारी ली गई है. उनके पास योग और ध्यान (Yoga & Meditation) के क्षेत्र में 38 से अधिक वर्षों का दीर्घकालिक और व्यावहारिक अनुभव है. वे योग, प्राणायाम, ध्यान, नाड़ी विज्ञान, जड़ी-बूटी/पारंपरिक चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy), रेकी, होम्योपैथी और आयुर्वेद के माध्यम से कई जटिल एवं असाध्य रोगों का सफल इलाज कर चुके हैं.
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