Sunny Deol: भारतीय सिनेमा के घातक हीरो में शुमार सनी देओल एक बार सिल्वर स्क्रीन पर गदर मचाने आ रहे हैं. आमिर खान के प्रोडक्शन में बनी फिल्म 'बंटवारा-1947' भारतीय स्वंत्रतता की 79वीं वर्षगांठ पर रिलीज के लिए शेड्यूल्ड है. फिल्म में नायक की भूमिका में अपने सनी पाजी हैं, लेकिन बंटवारा-1947 में सनी पाजी अपने चिरपरिचित अंदाज में नजर नहीं आने वाले हैं, जिससे उनके हॉर्डकोर फैन्स को निराशा हाथ लग सकती है.
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प्रख्यात नाटककार के नाटक पर बेस्ड है बंटवारा-1947
अभिनेता सनी देओल की नई फिल्म 'बंटवारा 1947' (पहले 'लाहौर 1947' ) प्रख्यात नाटककार असगर वजाहत के कालजयी नाटक 'जिस लाहौर नई देख्या, ओ जम्या ई नई' पर बेस्ड है. साल 1989 में लिखे गए इस नाटक की कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी पर है. प्रख्यात नाटककार ने नाटक की कहानी विभाजन की त्रासदी के बीच सांप्रदायिक सौहार्द को बयां करती है. फिल्म में सनी देओल एक मुस्लिम का करेक्टर प्ले कर रहे हैं.

मशहूर नाटकर असगर वजाहत
Photo Credit: Wikipedia
क्या है असगर वजाहत की नाटक की कहानी का प्लॉट?
मशहूर नाटक' जिस लाहौर नई देख्या, ओ जम्या ई नई' की कहनाी भारत-पाकिस्तान के विभाजन के तुरंत बाद की है. कहानी का प्लॉट लाहौर का है, जहां भारत से विस्थापित होकर एक मुस्लिम परिवार (मिर्जा परिवार) लाहौर पहुंचता है. विभाजन से उपजी नफरत लेकर पाकिस्तान पहुंचे मिर्जा परिवार को तब झटका लगता है जब रहने के लिए सरकार की ओर से मिली हवेली में एक हिंदू बुजुर्ग महिला नजर आती है, जो विभाजन के बाद लाहौर का अपना घर छोड़ने को तैयार नहीं हुई थी.
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फिल्म में लॉर्जर देन लाइफ है सनी देओल का किरदार?
बुजुर्ग हिंदू महिला का परिवार विभाजन के बाद भारत भाग गया था, लेकिन बुजुर्ग महिला अपना घर और लाहौर दोनों छोड़ने को तैयार नहीं हुईं. हवेली में हिंदू महिला की मौजूदगी मिर्जा परिवार को असहज करता है, लेकिन प्यार से माई पुकारी जाने वाली बुजुर्ग हिंदू महिला का बच्चों के प्रति निश्छल स्वभाव से मिर्जा परिवार उन्हें अपना लेता है. यह बात कट्टरपंथियों को पसंद नहीं आती है और वो माई को मारने की साजिशें रचते हैं, लेकिन पूरा मिर्जा परिवार न केवल उनकी रक्षा करता है, बल्कि उनकी प्राकृतिक मौत के बाद हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार भी करता है.

बंटवारा-1947 में मुस्लिम किरदार में एक्टर सनी देओल
Photo Credit: फिल्म टीजर से ग्रैब्ड
'खुदा कसम' में मुस्लिम बने सनी को फैन्स ने नकारा
फिल्म में मिर्जा परिवार के मुखिया के किरदार में सनी देओल हैं और उनकी पत्नी के रोल में अभिनेत्री प्रीति जिंटा है, जबकि माई का किरदार वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी ने प्ले किया है. फिल्मी पर्दे पर तीसरी बार मुस्लिम का किरदार प्ले करने जा रहे सनी देओल कितने सफल होंगे, यह तो थियेटर में फिल्म की रिलीज के बाद सामने आएगा, लेकिन फिल्म 'खुदा कसम' में निभाए मुस्लिम किरदार का हश्र कौन भूला होगा, जिसमें सनी देओल फैन्स को बिल्कुल पंसद नहीं आए थे. हालांकि 1984 में रिलीज हुई उनकी फिल्म 'सोहनी-महीवाल' सफल रही थी, जो कि एक रोमांटिक फिल्म थी.
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लाहौर में हिंदू की रक्षा करते नजर आएंगे सिकंदर मिर्जा
एक्टर सनी देओल फिल्म में 'सिकंदर मिर्जा' के मुख्य किरदार में हैं, जो फिल्म में विभाजन के बाद इस्लामिक देश के रूप उभर कर सामने आए पाकिस्तान की तत्कालीन राजधानी लाहौर में बुजुर्ग हिंदू माई की रक्षा करते नजर आएंगे. फिल्म बंटवारा-1947 में सनी, जो एक खुद एक मुस्लिम हैं, वो इस्लामिक देश पाकिस्तान में कट्टरपंथी मुस्लिमों से हिंदू महिला की जान बचाने के लिए सब कुछ झोंक देते हैं. असगर वजाहत की यह कहानी नफरत और सीमाओं के बंटवारे के बावजूद इंसानियत को ऊपर रखती है, पर्दे पर क्या गुल खिलाएगी, यह देखने वाली बात होगी.
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