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Himalayan Gold: हिमालय की बर्फ में बन रहा सोना, खोज में ग्रामीणों ने घर-बार छोड़ पहाड़ों में बनाया आशियाना

एनर्जी, स्टेमिना और यौन स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन हिमालयन गोल्ड कीड़ा जड़ी की खोज के लिए इन दिनों तिब्बत से सटे नेपाली के गांवों के लिए पहाड़ियों पर डेरा डाल दिया है, ताकि 15-20 लाख रुपए किलो बिकने वाले कीड़ा जड़ी को ढूंढ कर उसे बाजार में महंगे दामों में बेच सके.

Himalayan Gold: हिमालय की बर्फ में बन रहा सोना, खोज में ग्रामीणों ने घर-बार छोड़ पहाड़ों में बनाया आशियाना
हिमालय में सोना खोज रहे हैं नेपाली ग्रामीण
Nepalese searching gold in Himalayas

Himalayan Gold: तिब्बत की सीमा से सटे नेपाल के इलाके के ग्रामीण हिमालय गोल्ड की तलाश में हिमालय की ऊंची पहाड़ियों पर कूच रहे हैं. हिमालय गोल्ड के नाम से मशहूर कीड़ा जड़ी बूटी (Cordyceps sinensis Himalayan fungus) की तलाश में ग्रामीण अपने घरों को छोड़कर पहाड़ियों पर कीड़ा जड़ी को ढूंढने के लिए पहुंचने लगे है. कीड़ा जड़ी बूटी अनुमानित बाजार कीमत 15 से 20 लाख रुपए प्रति किलो बताई जाती है.

इंसानी शरीर को कई सारे फायदे पहुंचाने वाली हिमालयन गोल्ड 'कीड़ा जड़ी' बूटी को बनाने में ठंड और बर्फ का अहम रोल होता है. चूंकि गर्मी के मौसम में बर्फ तेजी से पिघलने लगते हैं और यह जड़ी बूटी बर्फ के नीचे मिलती है. एंटी एजिंग, इम्युनिटी बूस्टिंग और यौन स्वास्थ्य के लिए बेहद गुणकारी होने के कारण कीड़ा जड़ी की बहुत डिमांड रहती है. 

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हिमालयन रेंज में अधिक पाया जाता है कीड़ा जड़ी

नेपाल में इसे यारसा गुमा नाम दिया गया है. यह एक प्रकार का कीड़ा होता है, जो बर्फीले पहाड़ियों में पाया जाता है. यह हिमालयन रेंज में अधिक पाया जाता है. इसे पाने के लिए दुर्गम बर्फीले पहाड़ियों में जाना पड़ता है. यह जीवित जड़ी बूटी नेपाल के हिमालयन रेंज में ही पाया जाता है. इन कीड़ों की अधिक मात्रा में मुक्तिनाथ से ऊपर दुर्गम पहाड़ियों में मिलने की संभावना होती है.  इमयूनिटी पावर, सेक्स पावर सहित कई तरह के काम में आने वाले कीड़ा जड़ी बूटी का कीमत प्रति किलो 15-20 लाख रुपए होती हैं, यह मुख्य रूप से इसे सेक्स से जुड़े दावा के तौर पर लिया जाता हैं.

यह नेपाल (और हिमालय) में ही क्यों पाई जाती है?

​कीड़ा जड़ी के उगने के लिए प्रकृति ने बहुत ही विशिष्ट और दुर्लभ परिस्थितियाँ  तय की हैं, जो केवल नेपाल और तिब्बत से लगे हिमालयी क्षेत्रों में ही उपलब्ध हैं, जहां ​सटीक ऊंचाई और तापमान हो. यह जड़ी केवल समुद्र तल से 3,500 मीटर से 5,000 मीटर (11,000 से 16,000 फीट) की ऊंचाई वाले अल्पाइन घास के मैदानों में ही उग सकती है. नेपाल का एक बड़ा हिस्सा इसी ऊंचाई पर आता है. इससे कम या ज्यादा ऊंचाई पर न तो वह कीड़ा जीवित रहता है और न ही वह फंगस.

​सर्दियों में इन पहाड़ों पर भारी बर्फबारी होती है, जो जमीन के अंदर नमी बनाए रखती है. इस अत्यधिक ठंड (-10°C से -20°C) में ही वह खास फंगस (कवक) एक्टिव होता है, जो कैटरपिलर को संक्रमित करता है. नेपाल की भौगोलिक स्थिति इस फंगस के पनपने के लिए एकदम मुफीद है, जहां यह वृहद मात्रा में पाई जाती है.

 नेपाल के गांव के गांव खाली हो रहे हैं?

​मई से जुलाई के बीच नेपाल के दार्चुला, डोल्पा, जुमला और मुगु जैसे जिलों के सैकड़ों गांव पूरी तरह सुनसान हो जाते हैं. स्कूलों में ताले लग जाते हैं और लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ पहाड़ों की तरफ चले जाते हैं. इसके पीछे कुछ मुख्य कारण बड़ी कमाई हैं. बड़ी कमाई के लिए लोग अपना घर की सुरक्षा के लिए लोगों को मोटा रकम चुकाने से नहीं चूकते हैं. 

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​एक सीजन में होती है सालभर की कमाई

रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल के पहाड़ी इलाकों में रोजगार के साधन बहुत सीमित हैं. खेती से बमुश्किल गुजारा हो पाता है, लेकिन यार्सागुम्बा (कीड़ा जड़ी) को बेचकर एक व्यक्ति महज दो महीनों में इतना कमा लेता है, जितना वह सालभर मजदूरी करके भी नहीं कमा सकता. एक अच्छी कीड़ा जड़ी की कीमत बाजार में हजारों रुपए तक होती है.

यह बूटी जिस कीड़े से बनती है, वह 'घोस्ट मोथ' का लार्वा है. यह कीड़ा केवल हिमालय की सूखी और ठंडी मिट्टी में पाया जाता है. चूंकि नेपाल के पास तिब्बत पठार जैसी लंबी और ऊंची सीमा रेखा है, इसलिए वहां इन कीड़ों की तादाद प्राकृतिक रूप से बहुत ज्यादा हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार, कीड़ा जड़ी शरीर को कई बेहतरीन फायदे देती है.

पहाड़ों पर कई दिन टेंट लगा कर रहते हैं

यह जड़ी केवल वसंत ऋतु में बर्फ पिघलने के बाद (मई से जुलाई) ही दिखाई देती है. अगर इस दौरान इसे नहीं ढूंढा गया, तो यह सड़ जाएगी या जंगली जानवर इसे खा जाएंगे. इसलिए लोगों के पास सोचने का समय नहीं होता है और पूरा का पूरा  गांव एक साथ मिशन पर निकल पड़ता है. ग्रामीण कीड़ा जड़ी बूटी की खोज में पहाड़ियों पर कई-कई टेंट लगा कर भी रहते हैं.

​अस्थायी तंबू (High-Altitude Camps):

रिपोर्ट कहती है कि यह जड़ी 12,000 से 15,000 फीट की ऊंचाई पर मिलती है, इसलिए लोग पहाड़ों पर ही तिरपाल और तंबू लगाकर अस्थायी गांव बसा लेते हैं. वे राशन-पानी साथ लेकर जाते हैं और वहीं रहकर कई हफ्तों तक कड़ाके की ठंड में काम करते हैं. कीड़ा जड़ी के मुख्य स्वास्थ्य लाभ कै सारे हैं, खास कर सेक्स से जुड़ी संसय के लिए यह राम बाण हैं.

कीड़ा जड़ी घास के बीच बहुत छोटी सी भूरी डंडी जैसी दिखती है, इसे ढूंढने के लिए तेज नजरों और जमीन पर लेटकर रेंगने की जरूरत होती है. बच्चे और महिलाएं इसे ढूंढने में ज्यादा माहिर होते हैं. इसलिए, केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार पहाड़ों पर जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा जड़ी इकट्ठा की जा सके.

​​शोधकर्ताओं और पारंपरिक चीनी चिकित्सा के अनुसार शरीर को कई बेहतरीन फायदे देती है-

स्टैमिना व एनर्जी बूस्टर 

​कीड़ा जड़ी शरीर में एटीपी (ATP - Adenosine Triphosphate) के उत्पादन को बढ़ाती है, जो कोशिकाओं को ऊर्जा देने का काम करता है. इससे एथलीटों और शारीरिक श्रम करने वाले लोगों की कार्य क्षमता बढ़ती है, थकान दूर होती है और स्टैमिना में जबरदस्त सुधार होता है

​इम्युनिटी बूस्टर

हिमायल गोल्ड पुकारे जाने वाले कीड़ा जड़ी बूटी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलीसेकेराइड्स शरीर के इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को मजबूत करते हैं। यह शरीर को बाहरी बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने की ताकत देती है।

​एंटी-एजिंग गुण:

​बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने में यह बूटी मददगार मानी जाती है. यह शरीर में फ्री रेडिकल्स से लड़ती है, जिससे त्वचा में कसाव रहता है और कमजोरी दूर होती है.

​यौन स्वास्थ्य में सुधार

​कीड़ा जड़ी को 'हिमालयन वियाग्रा' भी कहा जाता है. पारंपरिक रूप से इसका उपयोग कामेच्छा (Libido) बढ़ाने, पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को ठीक करने और टेस्टोस्टेरोन के स्तर को सुधारने के लिए किया जाता रहा है.

फेफड़ों के लिए फायदेमंद

​यह फेफड़ों में ऑक्सीजन की खपत की क्षमता को बढ़ाती है। अस्थमा (दमा), ब्रोंकाइटिस और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए इसे बेहद असरदार माना गया है.

​ क्रोनिक बीमारियों से बचाव

​दिल के लिए यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और दिल की धड़कन को नियंत्रित रखने में मदद करती है. ​किडनी और लिवर में यह शरीर से टॉक्सिन्स  को बाहर निकालकर किडनी और लिवर को सुरक्षित रखती है.

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लेखक के बारे में
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रमन राय
रिपोर्टर
रमन राय वर्तमान में एनडीटीवी ग्रुप में कार्यरत हैं, पिछले एक साल से वह NDTV ग्रुप से जुड़े हुए हैं. पूर्व में वह ANI और NBT (नव भारत टाइम्स) जैसे संस्... और पढ़ें
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