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उपन्यास पर बना था 1988 का दूरदर्शन का सीरियल, पालकी गीत ने बनाया पॉपुलर, नूतन बनी कालीगंज की बहू

1988 में दूरदर्शन पर आने वाला शो लेखक बिमल मित्र के चर्चित उपन्यास 'आसामी हाजिर' पर आधारित था. राकेश चौधरी निर्देशित इस सीरियल में नूतन ने 'कालीगंज की बहू' का यादगार किरदार निभाया.

उपन्यास पर बना था 1988 का दूरदर्शन का सीरियल, पालकी गीत ने बनाया पॉपुलर, नूतन बनी कालीगंज की बहू
दूरदर्शन पर 1988 में आया था नूतन का सीरियल, बांग्ला उपन्यास पर था आधारित
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नई दिल्ली:

दूरदर्शन के दौर में ऐसे कई सीरियल आए जिन्होंने अपनी कहानी और कलाकारों के दम पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. उस दौर में किसी भी मशहूर उपन्यास पर शो या फिल्म बनाना भी एक ट्रेंड सा था. इसलिए दूरदर्शन की शुरुआत में ऐसे कई सीरियल्स का जिक्र मिलता है जो किसी मशहूर लेखक के उपन्यास पर बने हों. ऐसा ही एक सीरियल था, जो मशहूर साहित्यकार बिमल मित्र के चर्चित उपन्यास 'आसामी हाजिर' पर आधारित था. दमदार कहानी, सामाजिक ताने-बाने और बेहतरीन अभिनय ने इसे उस दौर का पसंदीदा शो बना दिया. खास बात ये भी रही कि हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री नूतन ने इसमें 'कालीगंज की बहू' का किरदार निभाया. जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया.

बिमल मित्र के उपन्यास से टीवी तक का सफर

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दूरदर्शन के इस शो का नाम था 'मुजरिम हाजिर'. जिसका निर्देशन राकेश चौधरी ने किया था. जबकि इसका प्रोडक्शन संवाद वीडियो प्राइवेट लिमिटेड ने किया था. लेखक मीर मुनीर ने बिमल मित्र के उपन्यास 'आसामी हाजिर' को छोटे पर्दे के लिए तैयार किया था. सीरियल की कहानी समाज, रिश्तों और इंसानी भावनाओं के इर्द-गिर्द घूमती है. इसमें उस दौर के सोशल सिस्टम और लोगों की सोच को बेहद सादगी से दिखाया गया था. यही वजह थी कि ये शो दर्शकों से इमोशनली जुड़ गया.

इस सीरियल की स्टार कास्ट भी काफी दमदार थी. इसमें नूतन, उत्पल दत्त, रीता भादुड़ी, राजीव वर्मा, मंगल ढिल्लों, वीरेंद्र सिंह, अजीत वचानी, मोहन भंडारी, अंजन श्रीवास्तव और शशि पुरी जैसे कलाकार नजर आए थे. वहीं अभिनेत्री नवनी परिहार ने इसी सीरियल से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने इसमें नयनतारा की भूमिका निभाई थी.

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पालकी गीत 'गुन गुना' और नूतन के किरदार ने जीता दिल

'मुजरिम हाजिर' की पॉपुलैरिटी की एक बड़ी वजह इसका संगीत भी था. सीरियल में एक सेकेंडरी थीम सॉन्ग 'गुन गुना' इस्तेमाल किया गया था. जो बिमल मित्र की रचना 'पालकीर गान' से प्रेरित था. जब भी नूतन का किरदार पालकी में नजर आता. ये गीत बजता था. धीरे-धीरे ये धुन दर्शकों की जुबान पर चढ़ गई और शो की पहचान बन गई. ये गाना उस दौर के बच्चों की जुबान पर रहता था और कालीगंज की बहू भी काफी लोकप्रिय थी.

नूतन ने सीरियल में 'कालीगंज की बहू' का किरदार निभाया था. उनके दमदार और इमोशनल अंदाज ने इस भूमिका को यादगार बना दिया. दिलचस्प बात ये है कि 'मुजरिम हाजिर' नूतन के जीवन का आखिरी टीवी प्रोजेक्ट था, क्योंकि इसके कुछ समय बाद उनका निधन हो गया. बता दें कि दूरदर्शन पर 1980 के दशक मे अधिकतर सीरियल भारतीय और विदेशी साहित्यकारों की कहानियों पर आधारित होते थे.

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