आज अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी है. हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव माना जाता है. किसी भी शुभ काम की शुरुआत सबसे पहले भगवान गणेश का आशीर्वाद लेकर की जाती है. सालभर आने वाली सभी गणेश चतुर्थियों का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर पड़ने वाली अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी को विशेष रूप से शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश के अनिरुद्ध विनायक स्वरूप की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं, रुके हुए काम पूरे होने लगते हैं और घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. ऐसे में आज के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करते हैं.
अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 17 जुलाई 2026 को सुबह 6 बजकर 28 मिनट से शुरू होगी और 18 जुलाई 2026 को सुबह 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगी. इसी दौरान श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान गणेश की विशेष पूजा करेंगे.
पूजा का शुभ मुहूर्त- भगवान गणेश की मध्याह्न पूजा का शुभ समय सुबह 11 बजकर 5 मिनट से दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इस दौरान पूजा करना शुभ माना गया है.
- वहीं, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय भगवान गणेश की आराधना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
- अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
- इसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
- गणपति बप्पा को लाल फूल, दूर्वा, सिंदूर, अक्षत और मोदक या लड्डू का भोग अर्पित करें.
- फिर धूप और दीप जलाकर उनकी विधिवत पूजा करें.
- पूजा के दौरान भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें.
- इसके बाद परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में सफलता की कामना करें.
ॐ गं गणपतये नमः॥
वक्रतुंड महाकाय मंत्रवक्रतुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ।
निर्विघ्नम कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दंती प्रचोदयात्॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एकदन्त, दयावन्त, चार भुजा धारी।
माथे पर तिलक सोहे, मूषक की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डूवन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शम्भु सुतवारी।
कामना को पूरा करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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