पंचांग के अनुसार फिलहाल सावन का पावन महीना चल रहा है. इस माह में भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. साथ ही इस महीने में आने वाले प्रदोष व्रत का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. पहला प्रदोष व्रत बीत चुका है और सभी भक्त दूसरे प्रदोष व्रत का इंतजार कर रहे है. प्रदोष व्रत पर भोलेनाथ की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव जी की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और समस्याओं से छुटकारा मिलता है. इसी कड़ी में आज हम आपको सावन महीने के दूसरे प्रदोष व्रत की तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त बताने जा रहे हैं. आइए जानते हैं...
कब है सावन का दूसरा प्रदोष व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार सावन महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 25 अगस्त 2026 को सुबह 06 बजकर 20 मिनट पर होगी. वहीं, तिथि का समापन 26 अगस्त को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर हो रहा है. ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए सावन का दूसरा प्रदोष व्रत 25 अगस्त दिन मंगलवार को रखा जाएगा. ये प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ रहा है इसलिए यह भौम प्रदोष व्रत कहलाएगा.

कब है पूजा का शुभ मुहूर्त?
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना अत्यंत शुभ माना जाता है. ऐसे में 25 अगस्त को प्रदोष काल शाम 06 बजकर 51 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 04 मिनट तक रहेगा. ऐसे में सभी शिव भक्त इस अवधि में भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं.
प्रदोष व्रत पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
- इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें.
- घर के मंदिर को साफ करके शिवजी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
- पूजा में घी का दीपक जलाएं और बेलपत्र, फूल, चंदन और धूप अर्पित करें.
- शाम को शिव मंदिर जाकर भगवान शिव का जल, दूध, दही और शहद से अभिषेक करें.
- इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें और आरती करें. पूजा के आखिर में प्रसाद बांटें.
यह भी पढ़ें: सावन कब खत्म हो रहा है? जानें किस दिन रखा जाएगा सावन के आखिरी सोमवार का व्रत
यह भी पढ़ें: Guru Gochar 2026: 19 अगस्त से 4 राशियों की बदलेगी किस्मत, गुरु के नक्षत्र परिवर्तन से धन-करियर में लाभ
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं