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Sarvapitru Amavasya 2026: कब है सर्वपितृ अमावस्या? जानें इस दिन श्राद्ध और तर्पण करने का महत्व

Sarva Pitru Amavasya Puja Vidhi: सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को है. इस दिन ज्ञात-अज्ञात पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है. आइए आचार्य मदन मोहन से जानें इसका महत्व.

Sarvapitru Amavasya 2026: कब है सर्वपितृ अमावस्या? जानें इस दिन श्राद्ध और तर्पण करने का महत्व
Sarva Pitru Amavasya 2026
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पितृ पक्ष में सभी तिथियों का अपना महत्व है, लेकिन सर्वपितृ अमावस्या को विशेष माना जाता है. यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है. इस दिन उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है. जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं है या किसी वजह से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि इस दिन पितरों का स्मरण कर विधि-विधान से कर्म करना चाहिए.

सर्वपितृ अमावस्या क्यों है खास?

आचार्य मदन मोहन बताते हैं कि पितृ पक्ष में आमतौर पर पूर्वजों का श्राद्ध उनकी मृत्यु तिथि के अनुसार किया जाता है. लेकिन जिनकी तिथि ज्ञात नहीं है, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है. अमावस्या, पूर्णिमा या चतुर्दशी तिथि को जिनका निधन हुआ हो. उनका श्राद्ध भी इस दिन किया जा सकता है. इसी वजह से इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है.

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कब है सर्वपितृ अमावस्या 2026?

आचार्य के ने बताया कि वर्ष 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर शनिवार को है. अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर रात 9:35 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर रात 9:19 बजे तक रहेगी. इसलिए श्राद्ध कर्म 10 अक्टूबर को कियाा जाएगा. इस दिन कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल को श्राद्ध के लिए महत्वपूर्ण मानाा जाता है.

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इस दिन क्या करना चाहिए?

सर्वपितृ अमावस्या पर सुबह स्नान के बाद पितरों का स्मरण कर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने की परंपरा है. इसके बाद ब्राह्मण भोजन कराने, जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र देने और सामर्थ्य के अनुसार अन्न-तिल का दान करने की मान्यता है. पितरों के निमित्त दीपदान करनाा और गाय को हरा चारा खिलाना भी शुभ माना जाता है.

महालया से क्या है संबंध?

उन्होंने बताया कि सर्वपितृ अमावस्या को महालया अमावस्या भी कहा जाता है. यह पितृ पक्ष के समापन और देवी पक्ष की शुरुआत से जुड़ी मानी जाती है. बंगाल और पूर्वी भारत में महालया का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व विशेष है.

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