रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार, विश्वास और एक-दूसरे की रक्षा के वादे का त्योहार है. इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी सुख-समृद्धि की कामना करती है. भाई भी बहन की रक्षा का संकल्प लेकर उसे उपहार देता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि राखी बांधने की परंपरा के पीछे कौन-कौन सी पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि श्रीकृष्ण-द्रौपदी और भगवान विष्णु-राजा बलि की कथाओं में रक्षा सूत्र के भाव का खास महत्व मिलता है.
द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की उंगली पर बांधी पट्टी
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि शिशुपाल वध के दौरान श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लग गई थी. खून निकलता देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया. श्रीकृष्ण ने उनके इस स्नेह को याद रखते हुए हमेशा उनकी रक्षा करने का वचन दिया. ऐसी मान्यताा है कि बाद में चीरहरण के समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाकर अपना वचन निभाया है.
मां लक्ष्मी ने राजा बलि को बांधी राखी
उन्होंने आगे बताया कि एक दूसरी पौराणिक कथा भगवान विष्णु और राजा बलि से जुड़ी है. वामन रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी और तीनों लोक नााप लिए. इसके बाद बलि ने भगवान से पाताल में साथ रहने का आग्रह किया.
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राखी का मान रखकर विष्णु को किया विदा
भगवान विष्णु के पाताल में रहने से मां लक्ष्मी चिंतित हुईं. वह एक महिला का रूप लेकर राजा बलि के पास पहुंचीं और उन्हें राखी बांधी. बलि ने बदले में कुछ मांगने को कहा तो लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को वापस भेजने की इच्छा जताई. राजा ने राखी का माान रखते हुए उनकी बात मान ली.
क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन
पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि इन कथाओं में राखी केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्नेह, विश्वास और रक्षा के संकल्प का प्रतीक भी मानी जाती है. इसी भावना के साथ हर साल सावन पूर्णिमा पर रक्षाबंधन मनायाा जाता है.
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