Pradosh Vrat Kab Se Shuru Karna Chahie: हिंदू धर्म में प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष में पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव की कृपा दिलाने वाले प्रदोष व्रत का विधान है. पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास का प्रदोष व्रत 12 जून 2026 को पड़ेगा. शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण यह शुक्र अधिक कृष्ण प्रदोष कहलाएगा. हिंदू मान्यता के अनुसार सप्ताह के अलग-अलग दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत का अपना एक अलग ही धार्मिक महत्व होता है. आइए जानते हैं कि देवों के देव महादेव की कृपा बरसाने वाले प्रदोष व्रत की शुरुआत कब करनी चाहिए? प्रदोष व्रत को करने पर कौन सी मनोकामना पूरी होती है? आइए प्रदोष व्रत से जुड़ी सभी जरूरी बातों को विस्तार से जानते हैं.
प्रदोष व्रत कब शुरू करना चाहिए?

सनातन परंपरा में जिस प्रकार भगवान विष्णु की पूजा के लिए एकादशी तिथि अत्यधिक शुभ और फलदायी मानी गई है, कुछ वैसे ही भगवान शिव की पूजा, व्रत एवं उपवास के लिए त्रयोदशी तिथि या फिर कहें प्रदोष व्रत को सबसे उत्तम माना गया है. यदि आपकी जीवन से जुड़े सभी कष्टों को दूर और शिव कृपा बरसाने वाले इस व्रत को करना चाहते हैं तो आपको किसी भी मास के शुक्लपक्ष के प्रदोष व्रत इसकी शुरुआत करना चाहिए. महादेव के इस व्रत की शुरुआत सोम प्रदोष व्रत से होने पर और भी ज्यादा शुभ और फलदायी हो जाती है.
सप्ताह के वार के अनुसार प्रदोष व्रत का फल
रवि प्रदोष व्रत
रविवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत रवि प्रदोष कहलाता है. इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने पर साधक पर शिव संग सूर्य नारायण की कृपा बरसती है. रवि प्रदोष व्रत के पुण्य प्रभाव से साधक की कुंडली का पितृ दोष दूर होता है और उसे सौभाग्य के साथ आरोग्य की प्राप्ति होती है.
सोम प्रदोष व्रत
सोमवार के दिन पड़ने वाला व्रत सोम प्रदोष कहलाता है. इस व्रत को नियमपूर्वक करने पर साधक को शिव संग चंद्र देवता का आशीर्वाद मिलता है. सोम प्रदोष के पुण्य प्रभाव से साधक के जीवन से जुड़े सभी मानसिक कष्ट दूर और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

भौम प्रदोष व्रत
मंगलवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत भौम प्रदोष व्रत कहलाता है. इस दिन विधि-विधान से शिव पूजा और प्रदोष व्रत को रखने पर साधक को सभी प्रकार के पाप, कर्ज और रोग आदि से शीघ्र ही मुक्ति मिलती है.
बुध प्रदोष व्रत
पंचांग के अनुसार जब त्रयोदशी तिथि बुधवार के दिन पड़ती है तो उस दिन बुध प्रदोष व्रत रहता है. हिंदू मान्यता के अनुसार बुध प्रदोष व्रत के पुण्यफल से साधक को न सिर्फ देवों के देव महादेव का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि उस पर नवग्रहों के राजकुमार माने जाने वाले बुध देव भी मेहरबान रहते हैं. बुध प्रदोष व्रत के पुण्य प्रताप से साधक की वाणी और बुद्धि प्रभावशाली होती है और उसे करियर-कारोबार में मनचाही सफलता प्राप्त होती है.
गुरु प्रदोष व्रत
हिंदू मान्यता के अनुसार जो प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है, वह गुरु प्रदोष व्रत कहलाता है. देवताओं के गुरु भगवान बृहस्पति से जुड़ाव होने पर इस व्रत के पुण्यफल में वृद्धि हो जाती है और व्यक्ति भगवान भोलेनाथ के साथ गुरु ग्रह की शुभता भी प्राप्त होती है. गुरु प्रदोष व्रत से साधक के ज्ञान, शिक्षा, धन और धर्म में वृद्धि होती है.
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शुक्र प्रदोष व्रत
पंचांग के अनुसार शुक्रवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने पर शुक्र प्रदोष व्रत होता है. शुक्र प्रदोष व्रत को विधिपूर्वक रखने पर साधक को धन-संपदा, सौंदर्य और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
शनि प्रदोष व्रत
शनिवार के दिन पड़ने वाला शनि प्रदोष व्रत संतान सुख एवं इससे जुड़े कष्टों को दूर करने के लिए फलदायी माना गया है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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