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Ashadh Maas 2026: कब से लगेगा आषाढ़ मास? जानें इसका धार्मिक महत्व और पूजा के महाउपाय

Ashadh Maas 2026 Start and End Date: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास चौथा महीना होता है, जिसमें भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा,  गुरु पूर्णिमा और गुप्त नवरात्रि जैसे कई तीज-त्योहार पड़ते हैं. आषाढ़ मास की शुरुआत इस साल कब होगी? इसमें किस देवी या देवता की पूजा की जाती है? पूजा-पाठ से लेकर धार्मिक महत्व को जानने के लिए पढ़ें ये लेख.

Ashadh Maas 2026: कब से लगेगा आषाढ़ मास? जानें इसका धार्मिक महत्व और पूजा के महाउपाय
Ashadh Maas 2026: आषाढ़ मास का धार्मिक महत्व और उपाय
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Ashadh Maas 2026 Kab Se Lagega: सनातन परंपरा में साल के चौथे मास या​नि आषाढ़ मास का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व माना गया है क्योंकि इसी पावन मास में वर्षा ऋतु का आगमन होता है तो वहीं इसी मास में गुरु पूर्णिमा, देवशयनी एकादशी, रथ यात्रा जैसे बड़े पर्वों के साथ चातुर्मास की शुरुआत होती है. हिंदू धर्म में साधना-आराधना, व्रत-उपवास, स्नान-दान की दृष्टि से यह मास क्या मायने रखता है? आषाढ़ मास की शुरुआत कब होगी और यह कब समाप्त होगा? आषाढ़ मास में किस देवी-देवता की पूजा करने पर पुण्य की प्राप्ति होती है, आइए इन सभी बातों को विस्तार से जानते हैं. 

आषाढ़ मास कब से शुरू होगा?

हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की शुरुआत इस साल 30 जून 2026, मंगलवार से होगी और यह 29 जुलाई 2026, बुधवार को व्यास पूर्णिमा या फिर कहें गुरु पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा. आषाढ़ के इस पावन मास में शक्ति की साधना का महापर्व यानि गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026 से प्रारंभ होकर 23 जुलाई 2026 तक मनाया जाएगा. इसी पावन मास में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 16 जुलाई 2026 को निकलेगी. 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी पर जहां श्री हरि योगनिद्रा में चले जाएंगे तो वहीं 26 जुलाई 2026 से चार्तुमास प्रारंभ होगा. 

आषाढ़ मास में किसकी पूजा होती है?

हिंदू मान्यता के अनुसार आषाढ़ का महीना भगवान विष्णु, सूर्य देवता, मां दुर्गा और इन सभी देवताओं का ज्ञान प्रदान करने वाले गुरु की पूजा के लिए समर्पित है. आषाढ़ मास में जल देवता की पूजा का भी बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व माना गया है. 

आषाढ़ मास की पूजा के उपाय 

  • आषाढ़ मास में जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन पूजा में 'विष्णु सहस्त्रनाम' का विशेष रूप से पाठ करना चाहिए. 
  • सनातन परंपरा में सूर्य देवता को भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना जाता है, इसीलिए उन्हें सूर्य नारायण कहकर पूजा जाता है. आषाढ़ मास में व्यक्ति को सूर्य देवता का आशीर्वाद पाने के लिए प्रात:काल भोर में उठकर स्नान करना चाहिए और उसके बाद तांबे के लोटे में रोली, अक्षत और लाल पुष्प डालकर श्रद्धा और विश्वास के साथ सूर्य देवता को अर्घ्य देना चाहिए. 
  • आषाढ़ मास में सूर्य देवता की तरह मंगल देवता की पूजा का भी बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ऐसे में इस मास के प्रत्येक मंगलवार को भूमिपुत्र मंगल की विधि-विधान से पूजा करें. 

Gupt Navratri 2026 Date: आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि कब है? जानें 10 महाविद्या की पूजा के बड़े लाभ

  • आषाढ़ मास में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा 9 स्वरूप या फिर 10 महा​विद्या की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार देवी दुर्गा की यह पूजा जितनी गुप्त रूप से की जाती है, वह उतनी ज्यादा सफल और फलदायी साबित होती है. 
  • आषाढ़ मास में स्नान, पूजा-पाठ के साथ दान का भी बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ऐसे में व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार इस पावन मास में ​मंदिर के पुजारी या फिर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, शुद्ध जल, छतरी, चप्पल-जूते, मौसमी फल जैसे आम आदि के साथ धन एवं वस्त्र का दान करना अत्यंत ही शुभ और पुण्यदायी माना गया है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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