Pradosh Vrat ke Niyam: सनातन परंपरा में भगवान शिव की साधना सभी दुखों को दूर करके सुख, सौभाग्य और आरोग्य दिलाती है. हिंदू धर्म में अपने भक्तों के द्वारा औघड़दानी बुलाए जाने वाले महादेव की पूजा लिए प्रदोष व्रत को सबसे उत्तम माना गया है. शिव कृपा बरसाने वाले यह प्रदोष व्रत प्रत्येक मास की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है, जिसका पूरा पुण्यफल पाने के लिए हमारे यहां धर्मशास्त्र में कुछेक नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है. आइए समस्त कामनाओं को पूरा करके कष्टों से मुक्ति दिलाने वाले प्रदोष व्रत से जुड़े नियम को विस्तार से जानते हैं.
1. हिंदू मान्यता के अनुसार औघड़दानी कहलाने वाले भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित प्रदोष व्रत को कोई भी व्यक्ति किसी भी मास के शुक्लपक्ष की त्रयोदशी तिथि से प्रारंभ कर सकता है. हालांकि यदि इसे श्रावण या फिर कार्तिक मास के शुक्लपक्ष में प्रारंभ किया जाए तो और भी ज्यादा शुभ साबित होता है. प्रदोष व्रत को हमेशा एक निश्चित संख्या में विधि-विधान से करने का संकल्प लेकर प्रारंभ करना चाहिए.

2. हिंदू मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत वाले दिन साधक को प्रात:काल स्नान करने के बाद यदि संभव हो तो सफेद वस्त्र धारण करना चाहिए. प्रदोष व्रत वाले दिन भूलकर भी काले अथवा नीले जैसे गहरे रंग वाले कपड़े नहीं पहनना चाहिए. प्रदोष व्रत वाले दिन गहरे रंग के कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है.
3. प्रदोष व्रत वाले दिन आप भगवान शिव की पूजा कभी भी कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए सबसे उत्तम समय प्रदोष काल (प्रदोष काल) को ही माना जाता है जो कि सूर्यास्त से ठीक पहले शुरू होकर लगभग दो घंटे तक रहता है.
4. पंचांग के अनुसार जून महीने के आखिरी प्रदोष व्रत का प्रदोषकाल 27 जून 2026, शनिवार को सायंकाल 07:23 बजे से लेकर रात्रि 09:23 तक रहेगा.

5. हिंदू मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत वाले दिन सिर्फ देवों के देव कहलाने वाले महादेव के साथ प्रथम पूजनीय माने जाने वाले भगवान श्री गणेश, शिव की शक्ति कहलाने वाली माता पार्वती, शिव के गण नंदी और उनके पुत्र कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है.
6. प्रदोष व्रत वाले दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए साधक को उनकी प्रिय चीजें जैसे गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, बेलपत्र, शमीपत्र, बेल का फल, भांग, धतूरा, आक के पुष्प, भस्म, भांग और रुद्राक्ष जरूर अर्पित करना चाहिए. शिव पूजा में चढ़ाए जाने वाले बेलपत्र और शमीपत्र की डंठल को हमेशा तोड़ने के बाद उलटा करके चढ़ाएं.
7. हिंदू मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक आप भगवान शिव की महिमा का गान करने वाली प्रदोष व्रत की कथा और उनकी आरती नहीं कहते हैं. प्रदोष व्रत का पूरा पुण्यफल पाने के लिए पूरी श्रद्धा के साथ कथा और आरती कहें या फिर सुनें.

8. हिंदू मान्यता के अनुसार प्रत्येक दिन के हिसाब से प्रदोष व्रत को अपना एक अलग महत्व होता है. ऐसे में जिस वार को प्रदोष व्रत पड़े, उस वार के हिसाब से शिव की पूजा और उससे जुड़े उपाय करते हुए इसकी शुभता और पुण्यफल प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए.
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9. जून महीने के आखिरी में प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ने जा रहा है, इसलिए इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाएगा. हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन शिव संग शनि पूजा से जुड़े उपाय करने पर साधक को इन दोनों ही देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
10. हिंदू मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत वाले दिन पूरे दिन निराहार रहना चाहिए. प्रदोष काल की पूजा करने के बाद सात्विक चीजें जैसे फल, दूध, मखाने और सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें, जैसे खीर, हलवा, पूड़ी, आदि के साथ फल ग्रहण करने का विधान है. प्रदोष व्रत वाले दिन भूलकर भी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. खाने की चीजों में सफेद नमक की जगह सेंधा नमक का प्रयोग करना चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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