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कंक्रीट के जंगल में 'बाघों का बसेरा': चंदनपुरा में मॉर्निंग वॉक; भोपाल क्यों बन रहा टाइगर की पहली पसंद?

भोपाल देश का संभवतः अकेला ऐसा राज्य मुख्यालय है, जिसके शहरी इलाकों में अक्सर बाघ चहलकदमी करते नजर आ जाते हैं. हाल ही में चंदनपुरा क्षेत्र में मॉर्निंग वॉक पर निकले एक दंपती के सामने बाघ के आ जाने की घटना ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर भोपाल का यह चंदनपुरा इलाका बाघों को इतना रास क्यों आ रहा है?

कंक्रीट के जंगल में 'बाघों का बसेरा': चंदनपुरा में मॉर्निंग वॉक; भोपाल क्यों बन रहा टाइगर की पहली पसंद?
भोपाल में फिर दिखा बाघ: मॉर्निंग वॉक कर रहे दंपती के सामने आया टाइगर, चंदनपुरा में दहशत

Bhopal Tiger Movement: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर बाघ (Tiger) की मौजूदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. चंदनपुरा क्षेत्र में शुक्रवार सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले एक दंपती के सामने अचानक बाघ आ गया. कुछ ही दूरी पर बाघ को देख महिला घबरा गई और शोर मचाने लगी. शोर सुनते ही बाघ झाड़ियों की ओर चला गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया. घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सर्च अभियान शुरू कर दिया. इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर भोपाल के शहरी और रिहायशी इलाकों में बाघों की आवाजाही क्यों लगातार बढ़ रही है.

मॉर्निंग वॉक के दौरान सामने आया बाघ

घटना भोपाल के चंदनपुरा क्षेत्र की बताई जा रही है. सुबह-सुबह एक दंपती रोज की तरह टहलने निकला था. इसी दौरान उनकी नजर सामने मौजूद एक बड़े वन्यजीव पर पड़ी. महिला ने बताया कि शुरुआत में उसे लगा कि कोई कुत्ता बैठा हुआ है, लेकिन जब करीब से देखा तो वह बाघ था. बाघ को इतने पास देखकर दंपती घबरा गया और महिला ने जोर से शोर मचा दिया. शोर सुनकर बाघ झाड़ियों की तरफ चला गया और संभावित खतरा टल गया.

Bhopal Tiger Movement: चंदनपुरा एरिया

Bhopal Tiger Movement: चंदनपुरा एरिया

फार्महाउस की ओर बढ़ा बाघ

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाघ कुछ देर बाद क्षेत्र के एक निजी फार्महाउस की बाउंड्री के अंदर जाता दिखाई दिया. घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने वन विभाग को जानकारी दी. इसके बाद वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची और आसपास के क्षेत्र में सर्चिंग शुरू की. फिलहाल बाघ की लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास जारी है.

Bhopal Tiger Movement: वन विभाग के अधिकारी पड़ताल करते हुए

Bhopal Tiger Movement: वन विभाग के अधिकारी पड़ताल करते हुए

वन विभाग ने जारी की एडवाइजरी

घटना के बाद वन विभाग ने चंदनपुरा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है. लोगों को फिलहाल जंगल से लगे इलाकों में अकेले जाने, सुबह और शाम के समय मॉर्निंग वॉक करने तथा घने झाड़ियों वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है. वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और बाघ की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं.

पहले भी बैरसिया रोड क्षेत्र में दिखा था मूवमेंट

यह पहली घटना नहीं है जब भोपाल के आसपास बाघ की सक्रियता देखी गई हो. इससे पहले बैरसिया रोड और हलाली नदी के आसपास के क्षेत्रों जैसे कनेरा, करौंद खुर्द, अगरिया और मुगालिया कोट में भी बाघ की आवाजाही दर्ज की गई थी. उस दौरान कई मवेशियों के शिकार की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे सात गांवों में भय का माहौल बन गया था. वन विभाग लगातार इन क्षेत्रों में निगरानी कर रहा है.

क्यों बन रहा है चंदनपुरा बाघों की पसंद?

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार चंदनपुरा क्षेत्र का भौगोलिक स्वरूप बाघों के लिए अनुकूल माना जाता है.

  • रातापानी का प्राकृतिक कॉरिडोर : भोपाल के आसपास का क्षेत्र रातापानी अभयारण्य और उससे जुड़े जंगलों से जुड़ा हुआ है. यह प्राकृतिक कॉरिडोर बाघों को सुरक्षित आवाजाही का रास्ता उपलब्ध कराता है. कलियासोत, केरवा और मेंडोरा के जंगल सीधे इसी वन क्षेत्र से जुड़े हैं, जिसके कारण बाघ अक्सर भोपाल के बाहरी इलाकों तक पहुंच जाते हैं.
  • पानी और शिकार की उपलब्धता : भोपाल झीलों और जल स्रोतों का शहर है. यहां नीलगाय, जंगली सूअर और कई अन्य वन्यजीव मौजूद हैं, जो बाघों के लिए संभावित शिकार बनते हैं. यही कारण है कि शहर से सटे कुछ इलाके बाघों को आकर्षित करते हैं.
  • घनी झाड़ियां और हरियाली : चंदनपुरा और उससे लगे क्षेत्रों में अभी भी पर्याप्त हरियाली और झाड़ियों वाले हिस्से मौजूद हैं. ये स्थान बाघों को छिपने और आराम करने के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराते हैं.

बाघों की बढ़ती संख्या भी एक वजह

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. हर वयस्क बाघ को अपना अलग क्षेत्र चाहिए होता है. जब जंगलों में बाघों की संख्या बढ़ती है तो युवा बाघ नई टेरिटरी की तलाश में निकलते हैं और कई बार मानव आबादी के करीब पहुंच जाते हैं.

शहरी विस्तार से सिमट रहे प्राकृतिक रास्ते

भोपाल में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को भी बाघों की बढ़ती मौजूदगी की बड़ी वजह माना जा रहा है. नई कॉलोनियां, सड़क परियोजनाएं, फार्महाउस और रियल एस्टेट विकास ने कई प्राकृतिक वन्यजीव गलियारों को प्रभावित किया है. जिन रास्तों से वन्यजीव पहले सुरक्षित गुजरते थे, वहां अब मानव गतिविधियां बढ़ गई हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जब प्राकृतिक कॉरिडोर टूटते हैं तो वन्यजीव भटककर रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं.

मानव-वन्यजीव संघर्ष चिंता का विषय

चंदनपुरा में हुई ताजा घटना केवल एक रोमांचक वन्यजीव मूवमेंट नहीं, बल्कि बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष का संकेत भी है. फिलहाल वन विभाग अलर्ट मोड पर है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है. वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और कॉरिडोर को सुरक्षित रखना ही ऐसे घटनाओं को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है.

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