हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व माना जाता है. जब यह शनिवार के दिन पड़ता है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस बार 27 जून को पड़ रहा शनि प्रदोष व्रत कई वजहों से खास है. इस दिन साध्य योग, शुभ योग और रवि योग जैसे तीन शुभ संयोग भी बन रहे हैं. मान्यता है कि जो दंपति संतान सुख की इच्छा रखते हैं, वे अगर इस दिन श्रद्धा के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें, व्रत रखें और संतान की कामना करें, तो उन्हें शुभ फल मिल सकता है. यही वजह है कि इस बार का शनि प्रदोष व्रत नवविवाहित और संतान की चाह रखने वाले दंपतियों के लिए विशेष माना जा रहा है.
27 जून को बन रहे हैं तीन शुभ योग
इस बार शनि प्रदोष के दिन साध्य योग, शुभ योग और रवि योग का संयोग बन रहा है. इस प्रकार के संयोग कम ही देखने को मिलते हैं. इन योगों को पूजा-पाठ और शुभ कामों के लिए अच्छा माना जाता है. ऐसे में प्रदोष काल में की गई शिव पूजा का महत्व और बढ़ जाता है.
कैसे करें पूजा?पति-पत्नी सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साथ मिलकर व्रत का संकल्प लें. दिनभर अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें और भगवान शिव का स्मरण करें. प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती का गंगाजल, कच्चे दूध और शहद से अभिषेक करें. इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, चंदन, फल और मिठाई अर्पित करें. पूजा के बाद 'ओम नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें और संतान सुख की प्रार्थना करें.
अगले दिन करें व्रत का पारणव्रत पूरा होने के बाद अगले दिन सुबह स्नान और दान करने के बाद पारण किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया शनि प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद दिलाता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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