Pitru Paksh 2026: इस साल 26 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है और इसका समापन 10 अक्टूबर को होगा. ऐसे में प्रयागराज में पितृ पक्ष को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. दरअसल, इस दौरान पितरों का तर्पण और पिंडदान के लिए त्रिवेणी संगम पर लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है. अगर आप विदेश में रहते हैं और आपको पिंडदान करना है तो अब आपको प्रयागराज संगम आने की जरूरत नहीं है. इस बार तीर्थ पुरोहितों ने विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए ऑनलाइन पिंडदान की सुविधा भी रखी है.
पिंडदान का महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार पिंडदान पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संस्कार है. माना जाता है कि पिंडदान करने से पितरों की अपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति होती है, उन्हें शांति मिलती है और उनकी आत्मा उच्च लोकों की ओर अग्रसर होती है. पितृ कर्म करने के लिए प्रयागराज का संगम खास महत्व रखता है. यहां लोग देश-विदेश से आकर अपने पुरखों और पूर्वजों को पिंडदान कर परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं.
ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था
प्रयागराज में विदेश में रहने वाले लोगों के लिए तीर्थ पुरोहितों ने ऑनलाइन पिंडदान की भी व्यवस्था भी रखी है. ऐसे में जो लोग किसी कारण से पिंडदान और पितरों के तर्पण के लिए प्रयागराज नहीं पहुंच सकते हैं, वे इस ऑनलाइन सुविधा का फायदा उठा सकते हैं.
कब किया जाता है श्राद्ध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, उसी तिथि में पितृ पक्ष के दौरान उसका श्राद्ध किया जाता है. इसलिए केवल अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख देखकर श्राद्ध की तिथि तय नहीं की जाती. हिंदू तिथि को देखा जाता है. अगर किसी परिजन की मृत्यु की तिथि पता नहीं है, श्राद्ध का समय और विधि स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार तय करना उचित माना जाता है.
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