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Anant Chaturdashi 2026: 24 या 25 सितंबर कब है अनंत चतुर्दशी? जानिए इस दिन क्यों बांधा जाता है 14 गांठों वाला धागा

अनंत चतुर्दशी पर अनंत भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है. अनंत सूत्र में 14 गांठें होनी चाहिए, इन 14 गांठों को 14 लोकों से जोड़कर देखा जाता है.

Anant Chaturdashi 2026: 24 या 25 सितंबर कब है अनंत चतुर्दशी? जानिए इस दिन क्यों बांधा जाता है 14 गांठों वाला धागा
अनंत चतुर्दशी 2026
Photo Credit: NDTV

Anant Chaturdashi 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत-पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है. साथ ही इसी दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है. साथ ही अनंत चतुर्दशी पर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधने का भी विधान है. इसी कड़ी में आइए जानते हैं इस साल अनंत चतुर्दशी कब है और इस दिन 14 गांठों वाला धागा क्यों बांधा जाता है.

कब है अनंत चतुर्दशी?

हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर हो रही है. वहीं, इस तिथि का समापन 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी.

क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त?

अनंत चतुर्दशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 28 मिनट से लेकर रात 11 बजकर 6 मिनट तक है. इस अवधि में सभी भक्त भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकते हैं.

क्यों बांधा जाता है 14 गांठों वाला धागा?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अनंत चतुर्दशी पर अनन्त भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है. अनंत सूत्र में 14 गांठें होनी चाहिए, इन 14 गांठों को 14 लोकों से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता के अनुसार, पुरुष इसे दाहिने हाथ में जबकि महिलाएं बांय हाथ पर बांधती हैं. साथ ही माना जाता है कि इसे धारण करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.

पूजा विधि

  • अनंत चतुर्दशी पर प्रात:स्नान करके व्रत का संकल्प करें.
  • कलश पर शेषनाग की शैय्या पर लेटे भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को रखें.
  • उनके समक्ष चौदह ग्रंथियों (गांठों) से युक्त अनंत सूत्र रखें.
  • इसके बाद 'ॐ अनन्तायनम:' मंत्र से भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की षोडशोपचार-विधि से पूजा करें.
  • पूजन के बाद अनंत सूत्र को मंत्र पढकर पुरुष अपने दाहिने हाथ और स्त्री बाएं हाथ में बांध लें.
  • अनंत सूत्र बांध लेने के बाद किसी ब्राह्मण को नैवेद्य में निवेदित पकवान देकर स्वयं सपरिवार प्रसाद ग्रहण करें.

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