Pipal Ke Ped Ka Dharmik Mahatva: सनातन परंपरा में पेड़-पौधे सिर्फ प्रकृति का हिस्सा भर नहीं बल्कि देवी-देवताओं के साक्षात रूप होते हैं, जिनकी पूजा करने पर साधक को सकारात्मक ऊर्जा और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है. हिंदू मान्यता के अनुसार इन पेड़ पौधों का संबंध देवी-देवताओं से लेकर पितरों और नवग्रहों तक से जुड़ा हुआ है. तीज-त्योहार से लेकर तमाम मांगलिक अवसरों पर पूजे जाने वाले इन पेड़-पौधों में आखिर किसे कलयुग का कल्पवृक्ष कहा जाता है? किस पेड़ की पूजा करने पर न सिर्फ देवी-देवताओं का बल्कि पितरों का आशीर्वाद बरसता है? आइए इसे विस्तार से जानते हैं.
पीपल की पूजा से मिलत है त्रिदेव का आशीर्वाद

हिंदू मान्यता के अनुसार पीपल (Peepal) के वृक्ष का संबंध त्रिदेव से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि इस दिव्य वृक्ष की जड़ों में परमपिता ब्रह्मा (Lord Brahma), तने में जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान विष्णु (Lord Vishnu) और इसकी पवित्र शाखाओं में देवों के देव महादेव (Lord Shiva) का वास होता है. ऐसे में जो कोई भी पीपल की पूजा करता है, उस पर त्रिदेव की कृपा हर समय बनी रहती है.
पीपल पर पितरों का भी होता है वास
हिंदू मान्यता के अनुसार अत्यंत ही पवित्र माने जाने वाले पीपल पर पितरों का भी वास होता है. जिसकी पूजा करने पर पितर प्रसन्न होते हैं. पितरों को प्रसन्न करने और पितृदोष दूर करने के लिए व्यक्ति को शनिवार और अमावस्या के दिन जल में काला तिल मिलाकर पीपल की जड़ में श्रद्धा के साथ डालना चाहिए तथा इसके नीचे संध्या के समय सरसों के तेल का दीया जलाना चाहिए.
मान्यता है कि पीपल की पूजा करने वाले साधक से लक्ष्मी जी सदैव प्रसन्न रहती हैं और उस पर हर समय अपनी कृपा बरसाती हैं. इसी प्रकार शनिवार के दिन पीपल की पूजा से शनि की ढैय्या, साढ़ेसाती और महादशा से जुड़े कष्ट दूर होते हैं.
पीपल का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में पीपल को अत्यंत ही पवित्र वृक्ष माना गया है और इसकी पूजा पौराणिक काल से होती चली आ रही है. सनातन परंपरा में पीपल को 'अश्वत्थ' के नाम से भी जाना जाता है. श्रीमद्भगवद गीता भगवान श्रीकृष्ण स्वयं को सभी वृक्षों में पीपल बताते हैं. मान्यता है कि पीपल का दर्शन और इसकी जड़ में जल देने से मनुष्य के सारे दुख दूर हो जाते हैं. पीपल की पूजा करने पर पितरों का आशीर्वाद बरसता है और व्यक्ति की सभी कामनाएं पूरी होती हैं.
Puja Ke Phool: देवी-देवताओं को खुश करना है तो हमेशा पूजा में चढ़ाएं उनकी पसंद का फूल
हिंदू मान्यता के अनुसार जो कोई व्यक्ति पीपल के पेड़ की 7 बार परिक्रमा करता है, उसे कई हजार गाय के दान पुण्यफल प्राप्त होता है. मान्यता है कि भगवान श्री विष्णु के अवतार माने जाने वाले गौतम बुद्ध ने भी पीपल के नीचे ही बोधि प्राप्त की थी. पीपल की दिव्यता को इस प्रकार से समझा जा सकता है कि इसके नीचे बैठकर मंत्रजप, पूजन और हवन करने पर साधक को कई गुना ज्यादा पुण्यफल प्राप्त होता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं