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20 days ago

Mauni Amavasya 2026 Timing: मौनी अमावस्या हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और फलदायी पर्व माना जाता है. यह दिन विशेष रूप से स्नान, दान, पूजा और मौन व्रत के लिए जाना जाता है. मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन किए गए पुण्य कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है. वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या आज यानी रविवार 18 जनवरी के दिन मनाई जा रही है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है. रविवार और अमावस्या का संयोग धार्मिक दृष्टि से बहुत शुभ माना जाता है.

मौनी अमावस्या का मुख्य भाव 'मौन' यानी चुप्पी का पालन करना है. इस दिन श्रद्धालु सूर्योदय से पहले उठकर बिना बोले पवित्र नदी, विशेषकर गंगा में स्नान करते हैं. यदि गंगा स्नान संभव न हो तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है. स्नान के बाद भगवान शिव, विष्णु और मां गंगा की पूजा की जाती है. माना जाता है कि इस दिन शिव भक्ति से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है.

दान का भी इस दिन विशेष महत्व है. मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया दान पितरों को भी तृप्त करता है. ऐसे में आइए जानते हैं मौनी अमावस्या के दिन दान व पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि व उपाय-

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर करें इन मंत्रों का जाप

ॐपितृभ्यः नमः

ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः

ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः पितृगणाय च नमः

ॐ पितृगणाय विद्हे, जगत धारिणी धीमहि, तन्नो पितृ प्रचोदयात्

Mauni Amavasya Niyam: मौनी अमावस्या पर न करें ये काम

वाणी का दुरुपयोग न करें

झूठ, कटु वचन, गाली-गलौज, निंदा और विवाद से बचें.


क्रोध और अहंकार न करें

गुस्सा करना, अपमान करना या अहंकार दिखाना इस दिन अशुभ माना जाता है.

तामसिक भोजन से बचें

मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन आदि का सेवन न करें.

सात्त्विक भोजन या फलाहार उत्तम माना गया है.

हिंसा या किसी को कष्ट न दें

मन, वचन और कर्म-तीनों से किसी को नुकसान न पहुंचाएं.

नकारात्मक सोच से दूर रहें

बुरी भावनाएं, ईर्ष्या, द्वेष और लोभ से बचें.

असत्य और छल से दूर रहें

किसी को धोखा देना या गलत मार्ग अपनाना वर्जित माना गया है.

Mauni Amavasya 2026 Aarti: मौनी अमावस्या पर करें पितरों की आरती

जय जय पितरजी महाराज, मैं शरण पड़यो हूं थारी।

शरण पड़यो हूं थारी बाबा, शरण पड़यो हूं थारी।

आप ही रक्षक आप ही दाता, आप ही खेवनहारे।

मैं मूर्ख हूं कछु नहि जाणू आप ही हो रखवारे॥

जय जय पितरजी महाराज।

आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रखवारी।

हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये अरज गुजारी।।

जय जय पितरजी महाराज।

देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई।

काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुखदाई।।

जय जय पितरजी महाराज।

भक्त सभी हैं शरण आपकी, अपने सहित परिवार।

रक्षा करो आप ही सबकी, रटूं मैं बारम्बार।।

जय जय पितरजी महाराज।

Vishnu Chalisa Lyrics in Hindi: मौनी अमावस्या पर पठें श्री विष्णु चालीसा

दोहा


विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।

कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ।।

विष्णु चालीसा


नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।

प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ।।सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।

तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ।।

शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।

सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ।।

सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।

सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ।।

पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।

करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ।।

धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।

भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ।।

आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।

धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया।।

अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।

देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया।।

कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।

शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ।।

वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।

मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ।।

असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।

हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई।।

सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।

तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी।।

देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।

हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी।।

तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।

गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे।।

हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।

देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे।।

चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।

जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ।।

शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।

करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ।।

करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।

सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ।।

दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।

पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ।।

सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।

निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै।।

गंगा स्तोत्र का पाठ कैसे करें?

पहले 'ॐ नमः शिवाय' या 'ॐ नमो गंगायै नमः' का 11 बार जाप करें.

फिर गंगा स्तोत्र का 1, 3 या 11 बार श्रद्धा से पाठ करें.

उच्चारण स्पष्ट रखें, जल्दबाजी न करें.

मौनी अमावस्या पर करें गंगा स्तोत्र का पाठ

देवि सुरेश्वरि भगति गंगे त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे ।

शंकरमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ।।1।।

भागीरथि सुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यात: ।

नाहं जाने तव महिमानं पाहि कृपामयि मामज्ञानम ।।2।।

 

हरिपदपाद्यतरंगिणि गंगे हिमविधुमुक्ताधवलतरंगे ।

दूरीकुरू मम दुष्कृतिभारं कुरु कृपया भवसागरपारम ।।3।।

तव जलममलं येन निपीतं परमपदं खलु तेन गृहीतम ।

मातर्गंगे त्वयि यो भक्त: किल तं द्रष्टुं न यम: शक्त: ।।4।।

 

पतितोद्धारिणि जाह्रवि गंगे खण्डितगिरिवरमण्डितभंगे ।

भीष्मजननि हेमुनिवरकन्ये पतितनिवारिणि त्रिभुवनधन्ये ।।5।।

कल्पलतामिव फलदां लोके प्रणमति यस्त्वां न पतति शोके ।

पारावारविहारिणि गंगे विमुखयुवतिकृततरलापांगे ।।6।।

 

तव चेन्मात: स्रोत: स्नात: पुनरपि जठरे सोsपि न जात: ।

नरकनिवारिणि जाह्रवि गंगे कलुषविनाशिनि महिमोत्तुंगे ।।7।।

 

पुनरसदड़्गे पुण्यतरंगे जय जय जाह्रवि करूणापाड़्गे ।

इन्द्रमुकुट मणिराजितचरणे सुखदे शुभदे भृत्यशरण्ये ।।8।।

 

रोगं शोकं तापं पापं हर मे भगवति कुमतिकलापम ।

त्रिभुवनसारे वसुधाहारे त्वमसि गतिर्मम खलु संसारे ।।9।।

अलकानन्दे परमानन्दे कुरु करुणामयि कातरवन्द्ये ।

तव तटनिकटे यस्य निवास: खलु वैकुण्ठे तस्य निवास: ।।10।।

 

वरमिह: नीरे कमठो मीन: कि वा तीरे शरट: क्षीण: ।

अथवा श्वपचो मलिनो दीनस्तव न हि दूरे नृपतिकुलीन: ।।11।।

 

भो भुवनेश्वरि पुण्ये धन्ये देवि द्रवमयि मुनिवरकन्ये ।

गंगास्तवमिमममलं नित्यं पठति नरो य: सजयति सत्यम ।।12।।

येषां ह्रदये गंगाभक्तिस्तेषां भवति सदा सुख मुक्ति: ।

मधुराकान्तापंझटिकाभि: परमानन्द कलितललिताभि:

 

गंगास्तोत्रमिदं भवसारं वांछितफलदं विमलं सारम ।

शंकरसेवकशंकरचितं पठति सुखी स्तव इति च समाप्त: ।।

Mauni Amavasya 2026 Puja Vidhi LIVE: मौनी अमावस्या पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर बिना बोले (मौन रखकर) स्नान करें. यदि संभव हो तो गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करें. घर पर स्नान करते समय पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें.
  • स्नान के बाद मन ही मन मौन व्रत और पूजा का संकल्प लें. पूरे दिन कम से कम आवश्यक बोलें या पूर्ण मौन रखें.
  • घर के मंदिर को साफ करें. चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. भगवान शिव, विष्णु और माता गंगा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें.
  • पूजा स्थल पर बैठकर सरसों के तेल या घी का दीपक जलाएं.
  • भगवान शिव को जल, बेलपत्र, दूध और सफेद फूल अर्पित करें.
  • विष्णु जी को तुलसी दल और पीले फूल चढ़ाएं.
  • 'ॐ नमः शिवाय', 'ॐ नमो नारायणाय' इन मंत्रों का 108 बार जप करना बहुत शुभ माना जाता है.
  • जल में काले तिल डालकर पितरों का तर्पण करें. इससे पितृ दोष शांत होता है.
  • शाम के समय पीपल या तुलसी के पास दीपक जलाएं और मौन व्रत का समापन करें.

मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर पाप नष्ट होते हैं, मन शांत रहता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

मौनी अमावस्या पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

हर्षण योग- रात 9 बजकर 11 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक

अमृत काल- सुबह 5 बजकर 2 मिनट से सुबह 6 बजकर 44 मिनट तक (19 जनवरी)

मौनी अमावस्या पर दान का शुभ मुहूर्त क्या है?

मौनी अमावस्या पर अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, चावल, काले तिल, कंबल और धन का दान करना बहुत शुभ माना जाता है. साथ ही जरूरतमंदों को भोजन कराना भी पुण्यदायी होता है. 

मौनी अमावस्या पर पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान शुभ मुहूर्त: सुबह 11:30 बजे से दोपहर 02:30 बजे तक 

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