Mauni Amavasya Ki Puja Kaise Karen: सनातन परंपरा में जिस मौनी अमावस्या के पर्व पर स्नान-दान, जप-तप आदि का बहुत ज्यादा महत्व बताया गया है, वह आज मनाया जा रहा है. मौनी अमावस्या के महापर्व पर प्रयागराज के माघ मेला का तीसरा बड़ा पर्व माना जाता है, जिसका पुण्यफल पाने के लिए लोग लाखों की संख्या में संगम स्नान करने के लिए पहुंचते हैं. प्रयागराज के अलावा देश के अन्य जलतीर्थ जैसे हरिद्वार-काशी के गंगातट और गोदावरी आदि नदियों के किनारे भी लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं.
काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शंकर मालवीय के अनुसार मौनी अमावस्या की तिथि 17 जनवरी 2026, शनिवार की रात 11:55 से प्रारंभ होकर आज 18 जनवरी 2026, रविवार की रात को 1:09 तक रहेगी. ऐसे में मौनी अमावस्या का मौन स्नान-दान आदि पूजा-पाठ आज 18 जनवरी को प्रातःकाल से प्रारंभ होकर पूरे दिन तक चलेगा. आइए मौनी अमावस्या के महापर्व पर मौन स्नान और दान के धार्मिक महत्व के साथ पूजा से जुड़े उपाय आदि के बारे में पं. अतुल मालवीय से विस्तार से जानते हैं.

मौनी अमावस्या पर कैसे मिलेगा पुण्यफल
- मौनी अमावस्या पर मौन स्नान करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान से पूर्व शौचादि से निवृत्त हों.
- मौनी अमावस्या वाले दिन मौन व्रत का पालन करें. स्नान से पहले और बाद में कम से कम कुछ समय तक मौन रहना श्रेष्ठ माना गया है. यदि संभव हो तो पूरे दिन मौन रखें.
- मौनी अमावस्या पर पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करें. इस महापर्व पर गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन संगम स्थल, नर्मदा, गोदावरी आदि पवित्र नदियों में स्नान सर्वोत्तम है. यह संभव न हो तो घर पर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
- मौनी अमावस्या पर स्नान से पूर्व भगवान विष्णु या अपने इष्टदेव का स्मरण कर मन में संकल्प लें.
- मौन स्नान के समय मौन रहकर या मन ही मन 'ॐ नमो नारायणाय नमः' अथवा 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जप करें.
- स्नान के उपरांत पितरों का तर्पण करें. अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, घी, कंबल आदि का दान विशेष फलदायी माना गया है.
मौनी अमावस्या की पूजा के नियम
मौनी अमावस्या के दिन तामसिक भोजन, मद्य, मांस आदि से पूर्णतः दूर रहें तथा क्रोध, असत्य और हिंसा से बचें
मन, वचन और कर्म से शुद्धता बनाए रखें-यही इस स्नान का मुख्य उद्देश्य है. मौनी अमावस्या वाले दिन सूर्यास्त से पूर्व धार्मिक कार्य पूर्ण करें. दान-पुण्य और जप-तप दिन में ही कर लें. मौनी अमावस्या पर इन नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति के पापों का क्षय और पितृ दोष की शांति होती है. मौनी अमावस्या के पुण्य प्रभाव से मन की शुद्धि तथा धर्म-अध्यात्म में उन्नति होती है.

मौनी अमावस्या का महाउपाय
मौनी अमावस्या पर धन की देवी मां लक्ष्मी और भगवान श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए स्नान के बाद स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें. पीले आसन पर बैठकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विधिवत पूजन करें. पीले पुष्प, चंदन, अक्षत, धूप–दीप अर्पित करें. मौनी अमावस्या के दिन साधक को श्रीसूक्त का श्रद्धा और विश्वास के साथ 11 या 16 बार पाठ करना चाहिए. यदि यह संभव न हो पाए तो कमलगट्टे की माला से 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जप करना चाहिए.

मौनी अमावस्या के मौन स्नान का महत्व
पवित्र माघ मास के तीसरे सबसे बड़े स्नान मौनी अमावस्या पर मौन होकर स्नान और दान किए जाने का विधान है. हिंदू धर्म में माघ मास की अमावस्या तिथि को अत्यधिक पुण्यदायी माना गया है. धर्म शास्त्र के अनुसार माघ मास की अमावस्या तिथि पर संगम तट पर या फिर किसी अन्य जलतीर्थ जैसे पवित्र नदी या सरोवर में मौन होकर स्नान करने से मन प्राण और शरीर में असीम आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है. इससे अक्षय पुण्य कार्य की प्रवृत्ति बनती है, जो मोक्ष प्राप्ति में सहायक होती है. मौनी अमावस्या का स्नान आध्यात्मिक ऊर्जा और असीम शक्ति को लिए रहता है, जिसे प्राप्त करने के लिए साधु-संत से लेकर गृहस्थ तक तमाम जलतीर्थ पर पहुंचते हैं.

अगर न जा पएं गंगा तट पर तो क्या करें?
पंडित अतुल मालवीय के अनुसार शास्त्रों में यह विधान बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी कारण से प्रयाग या काशी न पहुंच सके तो उसे इस महापर्व पर अपने निकट के किसी कूप या तालाब या पवित्र नदी में इन तीर्थों का मन में स्मरण करते हुए स्नान करना चाहिए. मौनी अमावस्या पर इस प्रकार से मौन स्नान करने पर उसे पूरा पुण्यफल प्राप्त होगा.
मौनी अमावस्या के मौन स्नान के लाभ
- मौनी अमावस्या पर संगम तट पर मौन स्नान करने पर समस्त पाप का नाश होता है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है.
- धर्म शास्त्र के अनुसार मौनी अमावस्या के मौन स्नान से व्यक्ति की आत्म-शुद्धि होती है. इस महापर्व के पुण्य प्रभाव से व्यक्ति की शांति और एकाग्रता बढ़ती है.
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- मौनी अमावस्या पर मौन साधना करने से शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वाणी से जुड़े दोष दूर होते हैं.
- किसी भी मास की अमावस्या तिथि पर पितरों की तृप्ति से संबंधित श्राद्ध, तर्पण, दान और ब्राह्मण भोजन कराने का विधान है. मौनी अमावस्या पर इन कार्यों को करने पर सभी प्रकार के पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितरों द्वारा आशीर्वाद प्राप्त होता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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