जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के लड्डू गोपाल स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. पूजा में तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा भी है. इस साल जन्माष्टमी का व्रत 4 सितंबर को रखा जाएगा. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि जब पूजा में तुलसी जरूरी है, तो क्या जन्माष्टमी के दिन ही तुलसी तोड़ सकते हैं. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि शास्त्रीय मान्यताओं में इस दिन तुलसी तोड़ने से बचने की बात कही गई है.
पहले से तोड़कर रख लें तुलसी
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि ब्रह्मवैवर्त पुराण की मान्यता के मुताबिक जन्माष्टमी के दिन तुलसी का पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए. पूजा के लिए तुलसी दल पहले ही तोड़कर रख लेना बेहतर माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि तोड़े हुए तुलसी के पत्ते 11 दिनों तक बासी नहीं माने जाते है. जरूरत पड़ने पर इन्हें साफ करके पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है.
इन दिनों भी न तोड़ें तुलसी
उन्होंने बताया कि धर्मशास्त्र की मान्यताओं के अनुसार एकादशी, अमावस्या, द्वादशी, चतुर्दशी, सप्तमी और रविवार को तुलसी तोड़ने से बचनाा चाहिए. बिना स्नान किए और सूर्यास्त के बाद भी तुलसी दल तोड़ने की मनाही बताई गई है.
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तुलसी तोड़ते समय बोलें ये मंत्र
तुलसी तोड़ते समय आचार्य मदन मोहन ने इस मंत्र का जाप करने की बात कही है- "मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी, नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोऽस्तुते". इसका भााव है कि हे माता तुलसी, आप भगवान गोविंद की प्रिय हैं और नारायण की पूजा के लिए मैं आपको ग्रहण कर रहा या रही हूं.
नाखून से न तोड़ें पत्ते
उन्होंने आगे बताया कि तुलसी के पत्ते नाखून लगाकर नहीं तोड़ने चाहिए. पत्ते को हल्के हाथ से तोड़ें और इस दौरान पौधे को नुकसाान न पहुंचे, इसका ध्यान रखें. इस तरह श्रद्धा के साथ तुलसी लेकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जा सकती है.
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