Sawan Shivratri And Mahashivratri : भगवान शिव की पूजा करने वाले ज्यादातर लोग सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि को एक ही पर्व मान लेते हैं. दोनों दिन व्रत रखा जाता है, शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है और भोलेनाथ की पूजा होती है. यही वजह है कि कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर दोनों में फर्क क्या है? क्या सिर्फ महीने का अंतर है या फिर दोनों के पीछे अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं? अगर आपके मन में भी कभी यह सवाल आया है, तो इसका जवाब जानना दिलचस्प है. दरअसल, इन दोनों शिवरात्रियों का महत्व एक जैसा नहीं माना जाता.
पहले समझिए, साल में कितनी बार आती है शिवरात्रि?
बहुत से लोग यही नहीं जानते कि शिवरात्रि साल में सिर्फ एक बार नहीं आती. पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि होती है. यानी पूरे साल में 12 शिवरात्रियां आती हैं. इनमें फाल्गुन महीने की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है, जबकि श्रावण महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है.
महाशिवरात्रि को भगवान शिव का सबसे प्रमुख पर्व माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए इस दिन को शिव और शक्ति के मिलन का पर्व भी कहा जाता है. देशभर के शिव मंदिरों में पूरी रात पूजा, भजन और विशेष अनुष्ठान होते हैं.
सावन शिवरात्रि का महत्व अलग क्यों है?
सावन का महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय माना जाता है. इसलिए इस महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि का भी खास महत्व है. इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और बेलपत्र अर्पित करते हैं. कांवड़ यात्रा भी इसी पर्व से जुड़ी होती है. कांवड़िए पवित्र जल लेकर लंबी यात्रा पूरी करते हैं और सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.
समुद्र मंथन की कथा से भी जुड़ा है सावन
सावन शिवरात्रि का संबंध समुद्र मंथन की कथा से भी जोड़ा जाता है. मान्यता है कि जब समुद्र मंथन से हलाहल विष निकला, तब भगवान शिव ने पूरे संसार की रक्षा के लिए उसे अपने कंठ में धारण कर लिया. विष की तपिश कम करने के लिए देवताओं ने उन पर जल चढ़ाया. इसी वजह से सावन में जलाभिषेक की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है.
अगर आसान शब्दों में समझें, तो महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से जुड़ी सबसे बड़ी शिवरात्रि मानी जाती है. वहीं सावन शिवरात्रि श्रावण महीने में आने वाली मासिक शिवरात्रि है, जिसका महत्व सावन और कांवड़ यात्रा की परंपरा से जुड़ा हुआ है. दोनों ही दिन भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है, लेकिन इनके पीछे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और महत्व अलग-अलग माने जाते हैं.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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