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काशी का पिशाच मोचन कुंड, जहां श्राद्ध व तर्पण से पितरों को मिलता है मोक्ष

पितृपक्ष के समय पिशाच मोचन कुंड पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है. कहा जाता है कि पिशाच मोचन कुंड में किए गए श्राद्ध से पितरों को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है.

काशी का पिशाच मोचन कुंड, जहां श्राद्ध व तर्पण से पितरों को मिलता है मोक्ष
काशी का पिशाच मोचन कुंड
file photo

सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है. 16 दिनों तक चलने वाले इस काल में हम अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहे. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों पितर पृथ्वी लोक पर आते हैं और अपने वंशजों से अन्न व जल ग्रहण करने की कामना रखते हैं. श्राद्ध की शुरुआत के साथ वाराणसी में लोगों की भीड़ उमड़ने लगती है. जिन लोगों की पितृपक्ष की तिथि पूर्णिमा को आती है.

इस अवसर पर काशी के प्राचीन और श्रद्धा-स्थल पिशाच मोचन कुंड पर हर दिन हजारों श्रद्धालु जुटते हैं. यहां वे विधि-विधान से अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं. मान्यता है कि पिशाच मोचन कुंड में किए गए श्राद्ध से पितरों को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. पिशाच मोचन कुंड को लेकर कहा जाता है कि मरने के बाद काशी में मुक्ति तो मिलती है, लेकिन अगर कोई परिवार का सदस्य पिशाच मोचन पर पिंडदान और श्राद्ध करता है तो उससे उनके मृत परिजन को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है. यह परंपरा अनादिकाल से चल रही है, जो भी प्रेत या ब्रह्म दोष होते हैं, पिशाच मोचन कुंड पर पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मुक्ति मिलेगी.

पिशाच मोचन कुंड का महत्व

पिशाच मोचन कुंड पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है. यह स्थान केवल एक कुंड नहीं, बल्कि एक दिव्य ऊर्जा केंद्र है, जहां त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है. त्रिपिंडी श्राद्ध में तीन पिंड बनाए जाते हैं, पहला पितृकुंड (पिता के लिए), दूसरा मातृकुंड (माता के लिए) और तीसरा विमल तीर्थ (अन्य दिवंगत परिजनों के लिए). मान्यता है कि यहां स्नान करने से पिशाच बाधा, भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है.

पीपल पेड़ की मान्यता

कुंड के पास एक पीपल का पेड़ है. कहा जाता है कि इस पेड़ पर सिक्के रखने से पितरों का सभी उधार चुकता हो जाता है और उन्हें सभी बाधाओं से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त होता है. इसके साथ ही सात्विक, राजस और तामस प्रेत बाधा से मुक्ति के लिए काले, लाल और सफेद झंडे लगाए जाते हैं. एक मान्यता यह भी कि स्वयं भगवान विष्णु ने इस कुंड को पिशाच मोचन का वरदान दिया, ताकि जो भी यहां श्रद्धा से स्नान और पूजा करे, उसके जीवन से अशुभ बाधाएं दूर हो जाएं.

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