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Guru Pradosh Vrat Katha: गुरु प्रदोष व्रत कब है? जानें प्रदोष व्रत कथा, पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त

सितंबर का दूसरा प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष भी कहा जाएगा. यहां जानिए प्रदोष व्रत कथा, पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त.

Guru Pradosh Vrat Katha: गुरु प्रदोष व्रत कब है? जानें प्रदोष व्रत कथा, पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त
गुरु प्रदोष व्रत कथा
file photo

हर महीने दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं. कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और परेशानियों से छुटकारा मिलता है. सितंबर का दूसरा प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष भी कहा जाएगा. चलिए आपको बताते हैं गुरु प्रदोष व्रत कब है, प्रदोष व्रत पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त क्या है?

प्रदोष व्रत कब है?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 23 सितंबर को रात 10 बजकर 50 मिनट पर होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर होगा. ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए भाद्रपद का दूसरा प्रदोष व्रत 24 सितंबर, दिन गुरुवार को रखा जाएगा.

प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • स्नान और संकल्प- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें.
  • शिवलिंग अभिषेक- प्रदोष काल यानी शाम के समय में शिव मंदिर जाएं या घर पर भगवान शिव का अभिषेक करें.
  • शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी अर्पित करें.
  • इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें और आरती करें. पूजा के आखिर में प्रसाद बांटें.

गुरु प्रदोष व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवगुरु बृहस्पति और देवताओं के बीच असुरों को लेकर युद्ध हुआ जिसमें देवताओं की विजय हुई. इस जीत के बाद देवगुरु बृहस्पति ने भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत का विधान शुरू किया. एक अन्य कथा के अनुसार, एक नगर में एक वीतराग और धर्मपरायण ब्राह्मणी रहती थी जिसके पति की मृत्यु हो चुकी थी. वह अपने दोनों पुत्रों के साथ रहती थी. एक दिन उसका बेटा नदी पर नहाने गया और अचेत हो गया. गंधर्व कन्याओं ने उसकी सहायता की और बताया कि यह लड़का नगर के राजा के यहां चोरी के झूठे इल्जाम में फंसाया गया है.

ब्राह्मणी ने भगवान शिव का गुरु प्रदोष व्रत पूरी निष्ठा से किया व्रत के प्रभाव से राजा के सपने में शिवजी आए और उन्होंने आदेश दिया कि उस निर्दोष बालक को तुरंत रिहा किया जाए. राजा ने बालक को सम्मान सहित मुक्त किया और उसकी माता को धन-संपत्ति दी. इस प्रकार गुरु प्रदोष व्रत करने वाले के सभी कष्ट दूर होते हैं और आरोग्य, ज्ञान व सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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