विज्ञापन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज करेंगी गोवर्धन के दानघाटी मंदिर के दर्शन, जानिए इसकी क्‍या है मान्‍यता और क्यों है खास?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 21 मार्च को गोवर्धन के दानघाटी मंदिर में दर्शन करेंगी.जानिए इस मंदिर का इतिहास, भगवान कृष्ण की दान लीला से जुड़ी मान्यता, और क्यों यहां रोजाना लाखों क्विंटल दूध चढ़ाया जाता है.यह मंदिर भक्ति और आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज करेंगी गोवर्धन के दानघाटी मंदिर के दर्शन, जानिए इसकी क्‍या है मान्‍यता और क्यों है खास?
क्यों खास है दानघाटी मंदिर? राष्ट्रपति के दौरे से बढ़ी चर्चा

यूपी की अपनी तीन दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा के अंतिम दिन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज आस्था और भक्ति के रंग में सराबोर नजर आएंगी. अयोध्या में रामलला के दर्शन और वृंदावन में संतों के सान्निध्य के बाद, राष्ट्रपति आज अपनी यात्रा का समापन गोवर्धन पर्वत की सप्तकोसीय परिक्रमा और दानघाटी मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ करेंगी. ब्रज की पावन रज को नमन करने और गिरराज महाराज का आशीर्वाद लेने के बाद, वे सीधे नई दिल्ली के लिए रवाना होंगी. कल राष्ट्रपति ने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से भी मुलाकात की थी.

आज गोवर्धन की परिक्रमा करेंगी राष्ट्रपति

जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति की यात्रा का अंतिम दिन 21 मार्च को गोवर्धन के दानघाटी मंदिर में प्रार्थना और सात कोस यानी 21 किलोमीटर की पारंपरिक गोवर्धन परिक्रमा के साथ समाप्त होगा. इसके बाद वे नई दिल्ली के लिए रवाना होंगी. सुबह करीब साढ़े 8 बजे राष्ट्रपति के गोवर्धन पहुंचने और दानघाटी मंदिर में पूजा-अर्चना करने की उम्मीद है. मंदिर में दर्शन के बाद वे गोल्फ कार्ट के जरिए लगभग 21 किमी की गोवर्धन परिक्रमा शुरू करेंगी. उनके इस दौरे से गोवर्धन का यह प्राचीन दानघाटी मंदिर मंदिर एक बार फिर चर्चा में आ गया है. यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण की दान लीला से जुड़ा हुआ है और यहां हर दिन बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं.

दानघाटी मंदिर की मान्यता क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यही वह स्थान है जहां भगवान कृष्ण ने गोपियों से माखन और दही का दान मांगा था. कहा जाता है कि भगवान कृष्ण की इस लीला के कारण ही इस स्थान का नाम दानघाटी पड़ा. यह कथा प्रेम, भक्ति और भगवान के सरल रूप को दर्शाती है, जहां वे अपने भक्तों के साथ सामान्य इंसान की तरह व्यवहार करते हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

कैसे छोटे मंदिर से बना भव्य धाम

करीब 1957 में इस मंदिर की शुरुआत एक छोटे से स्थान से हुई थी, जहां सिर्फ एक साधारण संरचना और रोशनी के लिए लालटेन होती थी. समय के साथ भक्तों की आस्था बढ़ती गई और मंदिर ने भव्य रूप ले लिया. 

- 1998 में स्वर्ण कलश और ध्वज लगाए गए
- 2003 में चांदी के दरवाजे बने
- 2005 में चांदी का छत्र चढ़ाया गया
- 2013 में चांदी के सिंहासन पर भगवान विराजमान हुए

आज यह मंदिर भक्ति और भव्यता का अद्भुत संगम बन चुका है.

क्यों चढ़ता है यहां इतना दूध?

दानघाटी मंदिर की सबसे खास बात है कि यहां रोजाना लाखों क्विंटल दूध चढ़ाया जाता है. भक्त भगवान को प्रसन्न करने के लिए दूध, दही, माखन और शहद से अभिषेक करते हैं. यहां रोज पंचामृत से पूजा होती है और भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है.

यहीं से क्यों शुरू होती है परिक्रमा?

गोवर्धन पर्वत की लगभग 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा का विशेष महत्व है. हालांकि, भक्त कहीं से भी परिक्रमा शुरू कर सकते हैं, लेकिन अधिकतर लोग दानघाटी मंदिर से ही इसकी शुरुआत करते हैं. इसे सबसे पवित्र स्थान माना जाता है.

दानघाटी मंदिर में लगभग हर दिन कोई न कोई धार्मिक आयोजन होता है. महीने में कई बार फूल बंगला सजाया जाता है. छप्पन भोग का आयोजन होता है और मंदिर रंग-बिरंगी रोशनी से सजा रहता है. इसी वजह से इसे 'त्य उत्सव भूमि'भी कहा जाता है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

यह भी पढ़ें: Eid Ul-Fitr 2026: एक ईद में मिठास, दूसरी में कुर्बानी! जानें ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा में क्या है अंतर

Premanand Maharaj और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बीच मंत्रों के जाप और जीवन दर्शन पर हुई खास बातचीत, आधे घंटा चला संवाद

Kanyakumari: दक्षिण के इस शक्तिपीठ को क्यों कहते हैं कन्या कुमारी? जानें पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व 

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Danghati Temple Govardhan, Droupadi Murmu, Govardhan Temple
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com