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रास लफान पर ईरान का हमला- भारत के लिए कितना अहम LNG का ये हब, दुनिया की गैस राजधानी की क्या है कहानी?

रास लफान पर ईरान का हमला पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है. जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत एलएनजी आता है, वही हब अब युद्ध का निशाना बन गया है. भारत समेत कई देश गैस संकट की चपेट में आ सकते हैं. पढ़ें रास लफान की कहानी.

रास लफान पर ईरान का हमला- भारत के लिए कितना अहम LNG का ये हब, दुनिया की गैस राजधानी की क्या है कहानी?
रास लाफान- दुनिया की LNG राजधानी
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  • रास लाफान पर ईरान के हमले से वैश्विक LNG सप्लाई बाधित. कतर ने उत्पादन रोका, दुनिया भर में गैस-तेल कीमतें बढ़ीं
  • भारत समेत एशियाई देशों पर सीधा असर, ऊर्जा संकट गहराने की आशंका.
  • 50 साल पहले रास लाफान में रेत के सिवा कुछ नहीं था, आज यह 80 मिलियन टन से ज्यादा एलएनजी हर साल निर्यात करता है.
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ईरान ने कतर के सबसे बड़े गैस हब रास लफान पर हमला कर पूरी दुनिया को झकझोर दिया है. कतर सरकार के मुताबिक रास लफान स्थित दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी प्रोसेसिंग प्लांट पर ईरानी मिसाइलों ने सीधा निशाना साधा, जिससे वहां भारी नुकसान हुआ. आग लगने की घटनाएं सामने आईं, हालांकि बाद में उस पर काबू पा लिया गया. इस हमले के बाद कतर ने एलएनजी उत्पादन और सप्लाई को अस्थायी रूप से रोक दिया है. इस हमले का असर तुरंत वैश्विक तेल, गैस बाजारों पर भी देखने को मिला. इससे पहले 2 मार्च 2026 को ईरानी ड्रोन ने मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी के एक पावर प्लांट और रास लफान के एक ऊर्जा केंद्र को निशाना बनाया था.

कतर और ईरान के बयान

कतर सरकार ने इस हमले को देश की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है और कतर अपने बचाव का अधिकार सुरक्षित रखता है. कतर ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ईरान के दो राजनयिकों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया. दूसरी ओर ईरान ने इस हमले को जवाबी कार्रवाई बताया. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने चेतावनी दी कि अगर उनके ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रहे तो इसके परिणाम पूरी दुनिया को झेलने होंगे. ईरान ने पहले ही कतर, सऊदी अरब और यूएई के कई ऊर्जा ठिकानों को संभावित निशाने के रूप में चिन्हित किया था. हालांकि अब तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है पर रास लफान पर उसके इस हमले का मकसद, दुनिया की 20% एलएनजी (LNG) सप्लाई को ठप करके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाना हो सकता है.

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ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भूचाल

रास लफान पर हमले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई.  कतर दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक है और रास लफान अकेले वैश्विक एलएनजी सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत संभालता है.एलएनजी सप्लाई रुकने से एशिया और यूरोप के कई देश सीधे प्रभावित हुए हैं. चीन, भारत, दक्षिण कोरिया, जापान और पाकिस्तान जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ा है.

भारत पर सीधा असर

भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरतों का लगभग 40 से 50 प्रतिशत कतर से आयात करता है. रास लफान बंद होने के बाद भारत में गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है. कई उद्योगों को गैस की आपूर्ति में 10 से 30 प्रतिशत तक कटौती करनी पड़ी है. सरकार ने बिजली और उर्वरक जैसे जरूरी सेक्टर को प्राथमिकता दी है, जबकि अन्य उद्योगों पर असर साफ दिख रहा है. गेल और पेट्रोनेट जैसी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई है और वैकल्पिक सप्लाई के लिए रूस, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से संपर्क बढ़ाया गया है.

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रास लाफान अकेले 80 मिलियन टन से ज्यादा एलएनजी हर साल निर्यात करता है

रास लाफान अकेले 80 मिलियन टन से ज्यादा एलएनजी हर साल निर्यात करता है
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रास लफान क्या है और क्यों है इतना महत्वपूर्ण

कतर की राजधानी दोहा से करीब 80 किलोमीटर दूर रास लफान के समुद्र तट पर महज 50 साल पहले तक रेत के सिवा कुछ नहीं था. सत्तर के दशक में दुनिया की सबसे बड़े गैस फील्ड की खोज ने इसे दुनिया की ऊर्जा जरूरतों का बेताज बादशाह बना दिया. आज भी इसका नाम आम आदमी नहीं जानता. लेकिन भारत, चीन, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, जापान, पाकिस्तान और यूरोपीय देशों समेत दुनिया के करीब एक चौथाई देशों तक LNG सप्लाई के कनेक्शन यहीं से जुड़े हैं.

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आज रास लफान, कतर का एक विशाल औद्योगिक शहर है. जहां दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी प्रोसेसिंग और निर्यात केंद्र है. यहां कतर के नॉर्थ फील्ड से निकलने वाली गैस को प्रोसेस कर एलएनजी में बदला जाता है और फिर दुनिया भर में भेजा जाता है. यह अकेले 80 मिलियन टन से ज्यादा एलएनजी हर साल निर्यात करता है.

दुनिया का सबसे बड़ा गैस खजाना

रास लफान की असली ताकत इसके पीछे मौजूद नॉर्थ फील्ड है, जिसे 1971 में खोजा गया था. यह दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार है, जिसमें 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट से ज्यादा गैस मौजूद है. ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड के साथ यह एक साझा गैस रिजर्व है, जो दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है.

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विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल ताकत

रास लफान में दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी प्लांट, सबसे बड़ा कृत्रिम बंदरगाह और कई बड़े पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट मौजूद हैं. यहां कतर एनर्जी के एलएनजी प्लांट, पर्ल जीटीएल, ओरिक्स जीटीएल, लफान रिफाइनरी और कई पावर और वाटर प्लांट स्थित हैं. यह बंदरगाह हर साल हजारों जहाजों को संभालने की क्षमता रखता है और दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी कैरियर यहां से संचालित होते हैं.

एशिया और यूरोप की लाइफलाइन

कतर के कुल एलएनजी निर्यात का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा एशिया जाता है. चीन सबसे बड़ा ग्राहक है, जबकि भारत, दक्षिण कोरिया, जापान और पाकिस्तान भी बड़े खरीदार हैं. यूरोप भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कतर पर निर्भर है, खासकर रूस यूक्रेन संकट के बाद.

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LNG क्या है और क्यों जरूरी है

LNG (एलएनजी) यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस को माइनस 162 डिग्री तापमान पर ठंडा करके तरल रूप में बदला जाता है. इससे इसका वॉल्यूम करीब 600 गुना कम हो जाता है, जिससे इसे आसानी से जहाजों के जरिए दुनिया भर में भेजा जा सकता है. यह बिजली उत्पादन, उर्वरक, उद्योग, परिवहन और घरेलू उपयोग में बेहद अहम भूमिका निभाता है.

क्या दुनिया ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है

रास लफान पर हमला वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है. अगर यह संघर्ष लंबा चला तो दुनिया को गैस की भारी कमी, महंगाई और औद्योगिक उत्पादन में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है. मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब सीधे दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को चुनौती दे रहा है.

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