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तेल का महीनों का स्टॉक, लेकिन गैस क्यों नहीं? LPG-LNG के गणित को आसान भाषा में समझिए

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत को गैस स्टोरेज क्षमता बढ़ानी होगी, आयात स्रोतों में विविधता लानी होगी और घरेलू उत्पादन बढ़ाना होगा, तभी देश ऊर्जा सुरक्षा के मामले में ज्यादा मजबूत बन पाएगा.

तेल का महीनों का स्टॉक, लेकिन गैस क्यों नहीं? LPG-LNG के गणित को आसान भाषा में समझिए
कतर के LNG फैसिलिटी पर हमले से भारत में इसकी सप्लाई बाधित हो गई है
AFP
  • तेल लिक्विड फॉर्म में होता है, उसका भंडारण आसान है. गैस स्टोर करने के लिए उच्च दबाव और बहुत कम तापमान चाहिए.
  • भारत LNG का बड़ा हिस्सा कतर और ऑस्ट्रेलिया से आयात करता है.
  • LPG की कमी का कारण आयात निर्भरता, मांग में उछाल और सीमित गैस भंडारण क्षमता है.
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भारत में जब भी गैस सिलेंडर की कमी या सप्लाई में देरी की खबर आती है, तब एक सवाल बार-बार उठता है. जब भारत कच्चे तेल और पेट्रोल-डीजल का महीनों का भंडार रख सकता है, तो फिर गैस का भी उतना ही स्टॉक क्यों नहीं रखा जाता? सवाल आम लोगों के मन में इसलिए भी उठता है क्योंकि ऊर्जा के मामले में भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन चुका है. लेकिन असलियत यह है कि तेल और गैस दोनों को स्टोर करने का तरीका पूरी तरह अलग होता है. तकनीक, लागत और सुरक्षा के लिहाज से गैस को जमा करके रखना कहीं ज्यादा मुश्किल है.

तेल का भंडारण करना आसान क्यों है?

सबसे पहले समझिए कि कच्चा तेल और पेट्रोल-डीजल आखिर होते क्या हैं. ये सभी तरल ईंधन हैं. यानी सामान्य तापमान पर भी ये तरल रहते हैं. इसलिए इन्हें बड़े-बड़े टैंकों में आसानी से रखा जा सकता है. इसी वजह से दुनिया के कई देश अपने यहां रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाते हैं. भारत ने भी ऐसा किया है. भारत में विशाखापत्तनम, मैंगलुरु और पड्डूर में स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं. इस तरह के भंडार को जमीन के नीचे बड़े चट्टानों में बने बड़े-बड़े कैवर्न यानी गुफाओं में रखा जाता है. इनमें लाखों टन कच्चा तेल रखा जा सकता है. 

इनका मकसद क्या होता है?

बड़ी मात्रा में कच्चे तेल के भंडारण के पीछे उद्देश्य आपातकाल की स्थिति में इसकी सप्लाई कुछ दिनों के लिए बना कर रखने की है. साथ ही अगर अचानक युद्ध शुरू हो जाए या कोई वैश्विक संकट आ जाए या ऑयल सप्लाई रुक जाए, तो हमारे देश के पास कई हफ्तों या महीनों तक चलने वाला तेल स्टॉक हो. यानी तेल के मामले में देश खुद को कुछ समय तक सुरक्षित रख सकता है.

गैस को स्टोर करना इतना मुश्किल क्यों है?

तो जब तेल को स्टोर करना अपेक्षाकृत आसान है तो गैस को क्यों नहीं? गैस का सबसे बड़ा फर्क यही है कि सामान्य तापमान पर यह गैस रूप में रहती है. गैस को बड़े टैंक में भरकर वैसे ही नहीं रखा जा सकता जैसे तेल को रखा जाता है. गैस को स्टोर करने के लिए दो तरीके होते हैं. पहला, बहुत ज्यादा दबाव में रखना. दूसरा, बहुत कम तापमान पर तरल बनाकर रखना. इसे विज्ञान के उस सिद्धांत से समझा जा सकता है जहां यह बताया गया है कि गैस का दबाव, तापमान और आयतन एक-दूसरे से जुड़े होते हैं. अगर गैस को कम जगह में रखना है तो या उस पर दबाव बहुत बढ़ाना पड़ेगा या तापमान बहुत कम करना पड़ेगा और यही वजह है कि गैस का स्टोरेज बहुत जटिल और महंगा हो जाता है.

LNG क्या होती है?

LNG का पूरा नाम है लिक्विफाइड नैचुरल गैस (Liquefied Natural Gas). प्राकृतिक गैस यानी नैचुरल गैस को -162°C तापमान तक ठंडा किया जाता है. इतना ठंडा करने पर गैस तरल बन जाती है. जब गैस तरल बनती है तो उसका वॉल्यूम यानी जगह करीब 600 गुना कम हो जाता है. इससे उसे जहाजों में भरकर लंबी दूरी तक भेजना आसान हो जाता है. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में बहुत महंगा इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए. इसके लिए खास एलएनजी प्लांट होना चाहिए, क्रायोजेनिक टैंक और खास एनएलजी जहाज होने चाहिए. यानी एलएनजी के स्टोरेज से लेकर ट्रांसपोर्ट तक पूरी प्रक्रिया बेहद टेक्निकल है.

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LPG क्या होती है?

LPG का मतलब है लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस. यह पेट्रोलियम से निकलने वाली गैस होती है और इसमें मुख्य रूप से दो गैसें होती हैं- प्रोपेन और ब्यूटेन. LPG को सामान्य तापमान पर भी थोड़े दबाव में सिलेंडर में तरल रूप में रखा जा सकता है. इसी वजह से घरों में खाना पकाने के लिए LPG सिलेंडर इस्तेमाल किए जाते हैं. भारत में घरेलू गैस वितरण मुख्य रूप से तीन कंपनियां करती हैं- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम. इन कंपनियों के देशभर में हजारों बॉटलिंग प्लांट और लाखों डीलर नेटवर्क हैं.

LNG और LPG में असली फर्क क्या है?

अक्सर लोग समझते हैं कि दोनों एक ही गैस हैं. लेकिन असल में दोनों पूरी तरह अलग हैं. LPG पेट्रोलियम से निकलती है. घरों में खाना पकाने के काम आती है. सिलेंडरों में भरी जाती है. वहीं, LNG प्राकृतिक गैस से बनती है. बिजली उत्पादन और उद्योगों में इसका इस्तेमाल होता है. पाइपलाइन से सप्लाई की जाती है. यानी दोनों का उपयोग, संरचना और स्टोरेज तरीका अलग है.

भारत में LNG कहां से आती है?

भारत अपनी गैस जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. LNG के प्रमुख सप्लायर देश हैं- कतर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, रूस, संयुक्त अरब अमीरात.

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भारत में LNG टर्मिनल कहां हैं?

भारत में कई LNG टर्मिनल हैं. इनमें दाहेज, हाजिरा, कोच्चि, धामरा एलएनजी टर्मिनल शामिल हैं. यहां LNG को गर्म करके फिर से गैस में बदला जाता है और फिर पाइपलाइन से देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है.

भारत में LPG की कमी क्यों होती है?

कभी-कभी देश के कुछ हिस्सों में LPG की कमी की खबरें सामने आती हैं. इसके पीछे प्रमुख कारण इसके आयात पर हमारी निर्भरता है. भारत अपनी LPG जरूरत का 60% से ज्यादा हिस्सा आयात करता है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बाधित हो जाए तो असर भारत पर भी पड़ सकता है. मांग में अचानक उछाल आने से भी इसकी कमी हो सकती है. जैसे पर्व, त्योहारों के दौरान और सर्दियों में इसकी मांग सामान्य तौर पर बढ़ जाती है.  

इसके अलावा लॉजिस्टिक की लंबी प्रक्रिया भी इसकी कमी होने का कारक हैं. दरअसल, एलपीजी की सप्लाई एक लंबी चेन से गुजरती है.
यह रिफाइनरी से बॉटलिंग प्लांट और गैस एजेंसियों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचती है. अगर इनमें से कोई भी एक प्रभावित होता है तो सप्लाई में बाधा आती है.

साथ ही तेल की तरह भारत के पास गैस का बड़ा रणनीतिक भंडार नहीं है. यही वजह है कि गैस सप्लाई ज्यादा संवेदनशील होती है.

हालांकि भारत धीरे-धीरे गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. सरकार की योजना है कि देश की ऊर्जा खपत में गैस का हिस्सा 6% से बढ़ाकर करीब 15% तक किया जाए. इसके लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. नए LNG टर्मिनल, गैस पाइपलाइन नेटवर्क, शहरों में पाइप्ड गैस जैसे काम किए जा रहे हैं. इस दिशा में काम कर रही जो प्रमुख कंपनी है, वो है गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता बन चुका है. जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था विकसित होती जाती है, वैसे-वैसे ऊर्जा की जरूरतें भी बढ़ती हैं. तेल के मामले में भारत ने रणनीतिक भंडार बनाकर कुछ सुरक्षा जरूर हासिल की है. लेकिन गैस के मामले में अभी भी काफी काम बाकी है.

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