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धरती पर प्रलय की बातें तो न जाने कितनी बार हो चुकी हैं. कई धर्मों के मिथकों में तो अलग-अलग तरह से इस प्रलय का ज़िक्र किया गया है. प्रलय यानी वो दिन जब सब ख़त्म हो जाएगा. इसे लेकर न जाने कितने मिथक तैरते रहते हैं. लेकिन वैज्ञानिक भी मानते हैं कि ऐसा दिन कभी तो आएगा ही. कुछ रिसर्च कहती हैं कि पांच से छह अरब साल बाद ऐसा हो सकता है जब सूर्य का इंधन, उसकी हाइड्रोजन ख़त्म हो जाए और ख़त्म होने के क्रम में सूर्य धरती समेत कई ग्रहों को भी निगल जाए. लेकिन कुछ रिसर्च कहती हैं कि पर्यावरण में भारी बदलाव के कारण धरती पर जीवन उससे कहीं पहले ख़त्म हो सकता है. क़रीब एक अरब तीस करोड़ साल बाद. मगर उससे पहले धरती को न जाने कितनी बड़ी चुनौतियां झेलनी होंगी.
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2032 में धरती से टकराने की आशंका
महाविलुप्ति जैसी चुनौतियां जिसकी वजह अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहा कोई एस्टेरॉयड यानी क्षुद्र ग्रह भी हो सकता है. ऐसा ही एक एस्टेरॉयड इन दिनों वैज्ञानिकों के बीच चर्चा में है. ये है Asteroid 2024 YR4 जिसके 2032 में धरती से टकराने की आशंका को लेकर वैज्ञानिक चिंता में हैं. इस एस्टेरॉयड के धरती से टकराने की संभावना नए-नए आंकड़ों के सामने आने से बदल रही है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कुछ अर्सा पहले तक इसके धरती से टकराने की आशंका 3.1 फीसदी बताई थी. लेकिन फिर इसके ऑर्बिट यानी कक्षा से जुड़ी नई गणनाएं सामने आने के बाद इसके धरती से टकराने की आशंका 1.6 बताई गई है. यानी 67 में से एक चांस इसके धरती से टकराने का है. अब यूरोपियन स्पेस एजेंसी के मुताबिक ये आशंका और भी कम हो गई है.
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मान लीजिए ये एस्टेरॉयड अगर धरती से टकराया तो कितना भयानक नुक़सान होगा, इस पर आगे आपको देंगे विस्तार से जानकारी. लेकिन उससे पहले बता दें एक ऐसे एस्टेरॉयड के बारे में जो धरती से टकराने के बाद जीवन की महाविलुप्ति का कारण बना था.
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डायनासोर की पूरी कहानी इसी एक एस्टेरॉयड ने ख़त्म कर दी
करीब छह करोड़ साठ लाख साल पहले का एक दिन धरती के लिए बहुत बुरा साबित हुआ था. किसी छोटे पहाड़ के आकार का एक एस्टेरॉयड चिक्सूलूब आज के मैक्सिको देश के युकातान पेनिनसुला के क़रीब उथले समुद्र में बिजली की तेज़ी से गिरा. उस भीषण टक्कर से इतनी ऊर्जा निकली जितनी दस करोड़ परमाणु बमों से निकलेगी. इस एस्टेरॉयड ने धरती की सतह पर 200 किलोमीटर चौड़ा और 20 किलोमीटर गहरा एक घाव बना दिया. इसकी टक्कर से धरती पर बड़े बड़े भूंकप आए, समुद्र में सुनामी आईं, आग के तूफ़ान चले. आसमान कई किलोमीटर ऊंचाई तक धूल, धुएं से घिर गया. लंबे समय तक सूर्य की किरणें धरती तक नहीं पहुंच पाईं और धरती का तापमान कम हो गया. धरती की आधी से ज़्यादा जीवों की प्रजातियां ख़त्म हो गईं. इनमें विशाल डायनासोर भी थे. डायनासोर की पूरी कहानी इसी एक एस्टेरॉयड ने ख़त्म कर दी. इसके बाद धरती पर बची हुई प्रजातियों का जीवन नए सिरे से शुरू हुआ.
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ये कहानी बहुत लंबी है. लेकिन अभी बस इतना बताना ही जरूरी है कि ऐसे ऐस्टिरॉयड आगे भी धरती से कभी टकरा सकते हैं. इन दिनों जिस Asteroid 2024 YR4 को लेकर वैज्ञानिक सतर्क हैं वो अगर धरती से टकराया तो इतना ख़तरनाक नहीं होगा. लेकिन किसी बड़े शहर को तबाह ज़रूर कर सकता है.
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खगोल वैज्ञानिकों ने करीब डेढ़ महीने पहले इसएस्टेरॉयड पर ध्यान दिया. जब ये धरती की ओर बढ़ रहा था. इसे सबसे पहले पिछले साल दिसंबर में चिली की El Sauce Observatory ने देखा. इसके बाद इसके ऑर्बिट यानी कक्षा का करीबी से अध्ययन तेज हुआ और इस बात की गणना की गई कि ये एस्टेरॉयड क्या धरती से टकरा सकता है और टकरा सकता है तो कब.
नासा की ताजा गणनाओं के मुताबिक ये 22 दिसंबर, 2032 को पृथ्वी के सबसे करीब से गुजरेगा और एक बहुत छोटी आशंका ये भी है कि धरती से टकरा भी सकता है. वैसे अच्छी बात ये है कि नई कैलकुलेशन सामने आने के साथ ये आशंका और कम होती जा रही है. अभी तक के अनुमान के मुताबिक ये एस्टेरॉयड 40 से 90 मीटर आकार का है. इसके साइज का अनुमान इसकी चमक से ही लगाया जा रहा है. लेकिन आगे के अध्ययन के आधार पर इसके आकार का सही-सही पता लग पाएगा.
सवाल ये है कि ये धरती से टकराया तो क्या होगा?
प्लैनेटरी सोसायटी के चीफ़ साइंटिस्ट ब्रूस बेट्स के मुताबिक ये ऐसी घटना है जो बहुत, बहुत कम देखी गई है. फिलहाल संकट नहीं है. ये डायनासोर किलर जैसे एस्टेरॉयड भी नहीं है. प्लैनेट किलर भी नहीं है. ज़्यादा से ज़्यादा ये एक शहर के लिए ख़तरनाक हो सकता है. ब्रूस बेट्स कहते हैं कि ये एस्टेरॉयड अगर पेरिस, लंदन, मुंबई या न्यू यॉर्क जैसे शहरों से टकराया तो इतने बड़े शहरों को पूरी तरह तबाह कर सकता है.
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ख़ास बात ये है कि इस एस्टेरॉयड के अध्ययन के लिए समय बहुत ज़्यादा नहीं है, क्योंकि अप्रैल के महीने तक अपनी कक्षा में घूमता हुआ ये सूर्य के पीछे चला जाएगा. जब धरती के टेलीस्कोप इसे देख नहीं पाएंगे और उससे पहले ही इसके ऑर्बिट को लेकर सटीक गणना हो जाना काफ़ी ज़रूरी है. एक बार नज़रों से ओझल हो जाने के बाद इसके बारे में अगली जानकारी 2028 में ही हासिल हो पाएगी. जब ये एक बार फिर धरती के करीब आते समय दिखना शुरू होगा. इसके बाद ये फिर नज़रों से ओझल हो जाएगा और फिर 2032 में लौट कर धरती के करीब आएगा. कई रिसर्च के तहत ये आकलन हो रहा है कि अगर ये धरती से टकराया तो कैसा असर होगा.
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अगर ये धरती से टकराया तो...
कुछ रिसर्च के मुताबिक अगर 2024 YR4 धरती के वायुमंडल में प्रवेश करता है तो इससे airburst हो सकता है. इसका मतलब ये है कि ये एस्टेरॉयड बीच हवा में फट सकता है जिससे क़रीब आठ मेगाटन टीएनटी के बराबर ऊर्जा निकलेगी. इस ऊर्जा को आप इस तरह समझ सकते हैं कि जितनी ऊर्जा हिरोशिमा पर गिरे परमाणु बम से निकली उससे 500 गुना ज़्यादा इस एस्टेरॉयड के airburst से रिलीज़ होगी. अगर ये धरती से टकराया तो इससे 500 मीटर से लेकर 2000 मीटर चौड़ा गड्ढा यानी क्रेटर बन सकता है.
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रास्ता भटका के लिए रॉकेट भेजने पर विचार
नासा के मुताबिक अगर ये एस्टेरॉयड धरती के वायुमंडल में समुद्र के ऊपर प्रवेश करता है तो उसके पानी से टकराने से पैदा होने वाली ऊर्जा से बड़ी सुनामी की ज़्यादा आशंका नहीं है. एक चर्चा ये भी चल रही है कि क्या इस एस्टेरॉयड को अंतरिक्ष में ही नष्ट किया जा सकता है. आपमें से कई लोगों ने शायद 1998 में बनी अमेरिका की साइंस फिक्शन फिल्म देखी होगी, जिसमें एक एस्टेरॉयड की धरती से टक्कर को रोकने के लिए एक ऑयल रिग क्रू को स्पेसक्राफ्ट के जरिए एस्टेरॉयड तक भेजा जाता है. नाटकीय घटनाक्रम से भरी इस फिल्म में ये क्रू एस्टेरॉयड में ड्रिल कर विस्फोटक डालता हैं और उसे टुकड़ों में तोड़ देता है. अभिनेता ब्रूस विलिस की ये फिल्म काफी चर्चा में रही. ये एक साइंस फिक्शन फिल्म थी और साइंस फिक्शन समय के साथ-साथ सच में बदलते रहे हैं. कुछ जानकारों के मुताबिक नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां विस्फोटकों से भरे रॉकेट भेजने पर विचार कर सकते हैं जो एस्टेरॉयड पर पहुंचकर विस्फोट करें और उसका रास्ता भटका दें या फिर उसे पूरी तरह बर्बाद कर दें.
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कैनेडी स्पेस सेंटर में नासा के एक प्रोजेक्ट मैनेजर के मुताबिक इसे नष्ट करना आसान रहेगा. इसमें बहुत विस्फोटक नहीं लगेंगे. उससे ज़्यादा ज़रूरी बात ये है कि इस पर पहुंचा कैसे जाएगा और सही समय पर सही एंगल पर विस्फोटक कैसे पहुंचाए जाएंगे. ये ज़्यादा पेचीदा काम है. इस वैज्ञानिक के मुताबिक ये भी हो सकता है कि इससे कोई ख़तरा न हो. उनके मुताबिक अगर ये ज़रा भी wobble करता है यानी डगमगाता है तो जब तक ये लौट कर आएगा इसके रास्ते में हज़ारों मील का अंतर आ चुका होगा. इसलिए इस पर ध्यान रखना ज़रूरी है. फिलहाल आसमान नहीं गिर रहा है. लेकिन ये काम भी तब हो पाएगा जब एस्टेरॉयड की बनावट स्पष्ट होगी. अभी तक ये साफ़ नहीं हुआ है.
दरअसल, कुछ एस्टेरॉयड कम घनत्व वाले होते हैं, porous होते हैं. उन्हें आसानी से नष्ट किया जा सकता है. लेकिन अगर एस्टेरॉयड अधिक सघन हुआ तो उसे तोड़ने के लिए ज़्यादा ताक़त की ज़रूरत होगी. नासा की ओर से अभी तक ऐसा कोई ब्योरा नहीं दिया गया है कि अगर एस्टेरॉयड को तोड़ने की ज़रूरत पड़ ही गई तो क्या परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा या किसी और तरीके से ऐसा किया जाएगा.
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इस एस्टेरॉयड को ट्रैक करने के लिए दुनिया की कई स्पेस एजेंसीज़ मिलकर काम कर रही हैं. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा, चीन की नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन, रूस की एजेंसी Roscosmos, यूरोपियन स्पेस एजेंसी इस मुद्दे पर मिलकर काम कर रही हैं. इसके अलावा International Asteroid Warning Network के खगोल वैज्ञानिक भी लगातार इस पर निगाह लगाए हुए हैं और इसके रास्ते का सटीक अनुमान लगाने और इसके ख़तरों का अनुमान लगाने में जुटे हुए हैं. एस्टेरॉयड 2024 YR4 से पहले एक और एस्टेरॉयड को लेकर ऐसी चिंता पैदा हुई थी जो निर्मूल साबित हुई.
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2024 में ही Apophis नाम के एक एस्टेरॉयड को देखा गया था जिसका आकार YR4 से कहीं ज़्यादा है. यानी करीब 340 मीटर. मूंगफली की शक्ल के इस एस्टेरॉयड के ऑर्बिट के आधार पर हुई शुरुआती गणना में इसके अप्रैल 2029 में धरती से टकराने के चांस 2.7 फीसदी बताए गए थे. लेकिन बाद में और पुख्ता गणनाओं के आधार पर इस आशंका को खारिज कर दिया गया. अब ये साफ है कि ये अप्रैल 2029 में धरती से सुरक्षित दूरी से गुजर जाएगा.
धरती पर बाहरी अंतरिक्ष से टकराने वाली चीजें कम नहीं हैं. उल्का पिंड के तौर पर हम Meteorites को अक्सर धरती के वायुमंडल में घुसते और चमकते हुए देखते हैं. लेकिन वो बहुत छोटे होते हैं. अधिकतर धरती के वायुमंडल में हवा के घर्षण से ही वेपोराइज होकर ख़त्म हो जाते हैं. कुछ धरती पर गिरते हैं तो थोड़ा बहुत नुकसान पहुंचाते हैं. लेकिन Meteorites के मुकाबले ऐस्टिरॉयड काफी बड़े होते हैं और ज़्यादा ख़तरनाक होते हैं.
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