
फाइल फोटो...
नई दिल्ली:
दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने बीते डेढ़ साल के दौरान आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार के मंत्रियों, निजी स्टाफ और अन्य अधिकारियों की ओर से किए गए विदेश दौरों का ब्यौरा मांगा है. उपराज्यपाल के दफ्तर ने ये ब्यौरा 12 सितंबर तक जमा करने का निर्देश दिया है. इस ब्यौरे में यात्रा का कारण, किस देश की यात्रा की गई, यात्रा की अवधि और किस श्रेणी के तहत यात्रा की गई इसका ब्यौरा देना होगा.
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मंत्री सत्येंद्र जैन ने हाल ही में वेटिकन सिटी का दौरा किया और वो आज ही देश वापस लौट रहे हैं. सरकार बनने के बाद केजरीवाल का ये पहला विदेश दौरा था.
बीजेपी नेता विवेक गर्ग को मिली आरटीआई जानकारी और केजरीवाल-सत्येंद्र जैन के हाल के विदेश दौरे को शामिल करते हुए कहा जा सकता है कि बीते डेढ़ साल में सीएम अरविंद केजरीवाल एक बार, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया चार, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन चार और श्रम मंत्री गोपाल राय एक बार विदेश दौरे पर गए हैं, जिसमें करीब 35-40 लाख रुपये खर्च का अनुमान है.
एलजी द्वारा यह जानकारी मांगने का मतलब ये निकाला जा रहा है कि हाल में दिल्ली हाइकोर्ट ने एलजी को दिल्ली का मुखिया बताकर उनकी मंज़ूरी लिए बिना सरकार के किसी फैसले को अवैध बताया था, जिसके बाद एलजी ने केजरीवाल सरकार के बीते डेढ़ साल के सभी ऐसे फैसलों की फाइल मंगाई थी, जिसमें एलजी की मंज़ूरी लेनी ज़रूरी थी, लेकिन नहीं ली गई.
ऐसे में हो सकता है कि एलजी विदेशी दौरों के बारे में लिए फैसलों की कानूनी प्रक्रिया और वैद्यता देखना चाहते हों.. जांचना चाहते हो कि दौरों की क्या ज़रूरत थी, समझना चाहते हों कि कितने स्टाफ़ को इन दौरों पर ले जाना जरूरी था या नहीं था. एक तरह से एलजी केजरीवाल सरकार के इस फैसले की समीक्षा करना चाहते हैं, क्योंकि इसमें सरकार का पैसा खर्च हुआ है.
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मंत्री सत्येंद्र जैन ने हाल ही में वेटिकन सिटी का दौरा किया और वो आज ही देश वापस लौट रहे हैं. सरकार बनने के बाद केजरीवाल का ये पहला विदेश दौरा था.
बीजेपी नेता विवेक गर्ग को मिली आरटीआई जानकारी और केजरीवाल-सत्येंद्र जैन के हाल के विदेश दौरे को शामिल करते हुए कहा जा सकता है कि बीते डेढ़ साल में सीएम अरविंद केजरीवाल एक बार, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया चार, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन चार और श्रम मंत्री गोपाल राय एक बार विदेश दौरे पर गए हैं, जिसमें करीब 35-40 लाख रुपये खर्च का अनुमान है.
एलजी द्वारा यह जानकारी मांगने का मतलब ये निकाला जा रहा है कि हाल में दिल्ली हाइकोर्ट ने एलजी को दिल्ली का मुखिया बताकर उनकी मंज़ूरी लिए बिना सरकार के किसी फैसले को अवैध बताया था, जिसके बाद एलजी ने केजरीवाल सरकार के बीते डेढ़ साल के सभी ऐसे फैसलों की फाइल मंगाई थी, जिसमें एलजी की मंज़ूरी लेनी ज़रूरी थी, लेकिन नहीं ली गई.
ऐसे में हो सकता है कि एलजी विदेशी दौरों के बारे में लिए फैसलों की कानूनी प्रक्रिया और वैद्यता देखना चाहते हों.. जांचना चाहते हो कि दौरों की क्या ज़रूरत थी, समझना चाहते हों कि कितने स्टाफ़ को इन दौरों पर ले जाना जरूरी था या नहीं था. एक तरह से एलजी केजरीवाल सरकार के इस फैसले की समीक्षा करना चाहते हैं, क्योंकि इसमें सरकार का पैसा खर्च हुआ है.
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