कुछ हफ्ते पहले तक पूर्वी दिल्ली की संजय झील सूखते जलस्तर, काई और बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियों की वजह से चर्चा में थी. अब इसी झील को फिर से संवारने की तैयारी हो रही है. योजना के तहत झील में उपचारित पानी की नियमित आपूर्ति बहाल करने, जल गुणवत्ता सुधारने, फव्वारे और एरेटर लगाने तथा 5,000 देशी पेड़ लगाने का प्रस्ताव है. गुरुवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने संजय झील का दौरा कर चल रहे कार्यों की समीक्षा की. अधिकारियों ने उन्हें 52 एकड़ में फैली झील और आसपास के 165 एकड़ संरक्षित वन क्षेत्र के लिए तैयार चरणबद्ध कार्ययोजना की जानकारी दी.
मछलियों की मौत के बाद चर्चा में आई थी संजय झील
मई में संजय झील तब सुर्खियों में आई थी जब जलस्तर तेजी से घटने के बीच बड़ी संख्या में मछलियां मृत पाई गई थीं. स्थानीय लोगों ने भी झील में बढ़ती काई, गंदगी और बदबू की शिकायत की थी. अधिकारियों के मुताबिक, उपचारित पानी की आपूर्ति प्रभावित होने और भीषण गर्मी का असर झील पर पड़ा था. संजय झील पूर्वी दिल्ली के सबसे बड़े हरित क्षेत्रों में से एक मानी जाती है. मयूर विहार फेज-2, त्रिलोकपुरी और कल्याणपुरी के बीच स्थित यह झील लंबे समय से इलाके के लोगों के लिए सैर, व्यायाम और मनोरंजन का प्रमुख केंद्र रही है.
पानी की सप्लाई बहाल करने पर जोर
निरीक्षण के दौरान उपराज्यपाल ने अधिकारियों को झील तक उपचारित पानी पहुंचाने वाली पाइपलाइन की मरम्मत में तेजी लाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि डल्लूपुरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से उपचारित पानी की नियमित आपूर्ति जल्द बहाल की जानी चाहिए, ताकि झील का जलस्तर बना रहे.फिलहाल झील में काई और खरपतवार हटाने का काम जारी है. इसके अलावा बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए किनारों को मजबूत किया जा रहा है और क्षतिग्रस्त बाउंड्री वॉल की मरम्मत की जा रही है.
अगस्त 2026 तक क्या होगा?
पहले चरण में अगस्त 2026 तक झील के आसपास जमा होने वाले पानी को मुख्य जलाशय तक पहुंचाने की व्यवस्था, बायो-स्वेल्स का निर्माण, पैदल मार्गों की मरम्मत और झील के तल में उगी घास को हटाने का काम किया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि बायो-स्वेल्स से वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन और भूजल रिचार्ज में मदद मिलेगी, जबकि जलभराव की समस्या भी कम हो सकती है.
दूसरे चरण में फव्वारे, एरेटर और बायो-रिमेडिएशन
मई 2027 तक प्रस्तावित दूसरे चरण में झील की जल गुणवत्ता सुधारने पर फोकस रहेगा. इसके तहत बायो-रिमेडिएशन, एरेटर और फव्वारों की स्थापना की योजना है. अधिकारियों के अनुसार, इससे पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर बेहतर होगा और झील की स्थिति में सुधार आएगा. इसके साथ ही आसपास के इलाकों से आने वाले पानी को झील तक पहुंचाने की व्यवस्था का दायरा भी बढ़ाया जाएगा, ताकि जलस्तर बनाए रखने में मदद मिल सके.
5,000 नए पेड़ लगाने की तैयारी
योजना के तहत झील और उसके आसपास 5,000 देशी पेड़ लगाए जाएंगे. वर्तमान में यहां नीम, अर्जुन, अशोक, पिलखन, कनेर और चांदनी समेत कई प्रजातियों के पेड़ मौजूद हैं. नए पौधों के जरिए क्षेत्र की जैव विविधता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी.निरीक्षण के दौरान उपराज्यपाल ने अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर काम पूरा करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि "संजय झील को उसकी पुरानी पहचान दिलाना जरूरी है."
पूर्वी दिल्ली के लोगों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हाल के महीनों में बदहाल स्थिति के कारण चर्चा में रही संजय झील आने वाले दो वर्षों में वाकई अपनी खोई हुई पहचान वापस हासिल कर पाएगी. फव्वारों, साफ पानी और नई हरियाली की यह योजना अब जमीन पर कितना असर दिखाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी.
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