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जिस विमान धमाके में गई थी 329 लोगों की जान, 40 साल बाद कनाडा ने माना- उसमें था खालिस्तानियों का हाथ

टोरंटो से मुंबई जा रहे एयर इंडिया के जिस विमान में 1985 में बम धमाका हुआ था, उसे लेकर कनाडा ने अब मान लिया है कि ये धमाका खालिस्तानी आतंकियों ने करवाया था.

जिस विमान धमाके में गई थी 329 लोगों की जान, 40 साल बाद कनाडा ने माना- उसमें था खालिस्तानियों का हाथ
लैंडिंग से 45 मिनट पहले हो गया था धमाका.

एयर इंडिया की फ्लाइट 182 में साल 1985 में एक बम धमाका हुआ था. इस धमाके में 329 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे. इस हमले के 40 साल बाद कनाडा ने पहली बार माना है कि इस बम धमाके में खालिस्तानी आतंकवादी शामिल थे. 

भारत का हमेशा से ही स्टैंड रहा है कि यह धमाका कनाडा से काम कर रहे खालिस्तानी आतंकियों ने करवाया था. अब कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) ने भी इस बात को औपचारिक रूप से मान लिया है.

इस भयानक हमले को देश के इतिहास का 'सबसे घातक आतंकवादी हमला' बताते हुए CSIS ने कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा समुदाय के लिए एक 'अहम मोड़' साबित हुआ.

फेसबुक पोस्ट कर मानी बात

फेसबुक पर एक पोस्ट में CSIS ने लिखा, '23 जून 1985 को कनाडा में मौजूद खालिस्तानी चरमपंथियों के बम ने विमान को उड़ा दिया था, जिससे उसमें सवार सभी लोगों की मौत हो ग.  इनमें से ज्यादातर कनाडाई नागरिक थे. यह कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला है और हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा समुदाय के लिए एक अहम मोड़ है.'

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी मंगलवार को कहा था कि यह बम धमाका 'देश के इतिहास का सबसे घातक हमला था और देश हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ है. 

2005 में, कनाडा सरकार ने आधिकारिक तौर पर 23 जून को आतंकवाद के पीड़ितों की याद में 'राष्ट्रीय स्मृति दिवस' घोषित किया था.

क्या हुआ था 1985 में?

एयर इंडिया का विमान, एक बोइंग 747, जिसे 'सम्राट कनिष्क' के नाम से भी जाना जाता था, टोरंटो से मुंबई जा रहा था, तभी उसमें बम धमाका हुआ था. 

प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन 'बब्बर खालसा' के एक सदस्य ने विमान के लगेज कंपार्टमेंट में बम रखा था, जबकि वह खुद उस विमान में नहीं बैठा था. विमान के हीथ्रो हवाई अड्डे पर उतरने से 45 मिनट पहले ही हवा में वह बम फट गया.

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कनाडा का मानना, भारत के लिए अहम क्यों?

उस समय, इस बम धमाके को 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' के जवाब में की गई कार्रवाई के तौर पर देखा गया था. 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' एक बड़ा मिलिट्री ऑपरेशन था, जिसका आदेश पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया था. इसका मकसद अमृतसर के गोल्डन टेम्पल कॉम्प्लेक्स से हथियारबंद सिख अलगाववादी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों को हटाना था.

लेकिन 2010 में कनाडाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस जॉन मेजर की अगुवाई में हुई एक पब्लिक इंक्वायरी में पता चला कि उस दिन एजेंसियों से कई गलतियां हुई थीं, जिसकी वजह से जांच ठीक से नहीं हो पाई. इसके अलावा, इस घटना को 'भारतीय मामला' माना गया, जिससे इस पर तुरंत कार्रवाई करने की जरूरत को कम करके आंका गया.

कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने 23 जून, 2010 को 1985 के एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके के पीड़ितों के परिवारों से औपचारिक रूप से माफी मांगी. उन्होंने सरकार की नाकामियों को माना और उन संस्थागत कमियों का जिक्र किया जिनकी वजह से यह त्रासदी हुई. साथ ही, उन्होंने दुख में डूबे परिवारों के साथ कनाडाई अधिकारियों के बुरे बर्ताव और 'प्रशासनिक उपेक्षा' की बात भी मानी.

2023 में कूटनीतिक रिश्तों में आई भारी खटास के बाद कनाडा और भारत तेजी से अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से बेहतर बना रहे हैं. यह खटास तब आई थी जब पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था.

कूटनीतिक रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की यह पहल मार्च 2025 में मार्क कार्नी के कनाडा के प्रधानमंत्री बनने के बाद शुरू हुई.

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