सम्मेलन में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की डायरेक्टर जनरल सुनीता नारायण ने नेपाल की हालिया त्रासदी का जिक्र करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन से इनकार करना अब वास्तविकता से मुंह मोड़ने जैसा है. उन्होंने हिमालयी इलाकों में लगातार हो रहे निर्माण, सड़क और हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि इंसान को यह भ्रम छोड़ना होगा कि वह नदियों और पहाड़ों को अपनी सुविधा के हिसाब से फिर से बना सकता है.
‘सस्टेनेबिलिटी सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं'
मोबियस फाउंडेशन की प्रेसिडेंट और CEO प्रियंका शर्मा ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी को अब सिर्फ पर्यावरण से जोड़कर देखने का वक्त गुजर चुका है. यह इस बात से जुड़ा सवाल है कि हम कैसे रहते हैं, कैसे सीखते हैं, कैसे काम करते हैं और किस तरह की अर्थव्यवस्था और जीवनशैली चाहते हैं.
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सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन (CEE) के फाउंडर डायरेक्टर कार्तिकेय साराभाई ने कहा कि पर्यावरण शिक्षा का अगला चरण सिर्फ जागरूकता पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को कार्रवाई के लिए तैयार करना है. उन्होंने पर्यावरण, गरीबी, विकास और हमारी जीवनशैली के बीच संबंध को समझने और बच्चों में सवाल पूछने व आलोचनात्मक सोच विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया.
नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में बुधवार को 8वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन सस्टेनेबिलिटी एजुकेशन (ICSE) 2026 की शुरुआत हुई. मोबियस फाउंडेशन की तरफ से आयोजित दो दिन के सम्मेलन का इस साल का विषय ‘Sustainability Education for Transformative Action' है.
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