फाइल फोटो
नई दिल्ली:
दिल्ली के साथ चल रहे जल विवाद मामले में हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि पिछले साल को तुलना में इस साल पानी हथनी कुंड बैराज में 50 फीसदी कम आ रहा है. लिहाज मामले की सुनवाई के दौरान इस बात को भी गौर किया जाये. हालांकि हरियाणा सरकार ने कहा कि दिल्ली सरकार के 450 क्यूसेक पानी प्रतिदिन छोड़ने की मांग पर विचार करेगा. सुप्रीम कोर्ट अब मामले की सुनवाई 11 मई को करेगा. दरअसल राजधानी में पानी की दिक्कत पैदा होने को हवाला देते हुए दिल्ली जल बोर्ड ने हरियाणा सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
दिल्ली सरकार ने SC से कहा, जलापूर्ति के मामले में हरियाणा से बात हो रही है
दिल्ली जल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह अंतरिम आदेश जारी कर हरियाणा सरकार को यमुना में कम से कम 450 क्यूसेक पानी प्रतिदिन छोड़ने का निर्देश दे. हरियाणा इस समय 330 क्यूसेक पानी प्रतिदिन दिल्ली को दे रहा है. दायर याचिका में दिल्ली जल बोर्ड ने कहा है कि हरियाणा के यमुना नदी में पानी की सप्लाई बंद कर देने की वजह से दिल्ली में पानी संकट पैदा हा गया है.
वीडियो : दिल्ली में पिछले साल पानी महंगा हुआ था
पड़ोसी राज्य पर पर आरोप लगाते हुए बोर्ड ने कहा कि वह पानी की सप्लाई से जुड़े अदालती आदेशों का उल्लंघन कर यमुना के बहाव को लेकर बेहतर स्थिति में होने का गैर वाजिब फायदा उठा रहा है.
दिल्ली सरकार ने SC से कहा, जलापूर्ति के मामले में हरियाणा से बात हो रही है
दिल्ली जल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह अंतरिम आदेश जारी कर हरियाणा सरकार को यमुना में कम से कम 450 क्यूसेक पानी प्रतिदिन छोड़ने का निर्देश दे. हरियाणा इस समय 330 क्यूसेक पानी प्रतिदिन दिल्ली को दे रहा है. दायर याचिका में दिल्ली जल बोर्ड ने कहा है कि हरियाणा के यमुना नदी में पानी की सप्लाई बंद कर देने की वजह से दिल्ली में पानी संकट पैदा हा गया है.
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पड़ोसी राज्य पर पर आरोप लगाते हुए बोर्ड ने कहा कि वह पानी की सप्लाई से जुड़े अदालती आदेशों का उल्लंघन कर यमुना के बहाव को लेकर बेहतर स्थिति में होने का गैर वाजिब फायदा उठा रहा है.
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Delhi Jal Board