दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी को लेकर अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए. सत्येंद्र जैन के वकील हरिहरन और सह-आरोपी नागेंद्र यादव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने दावा किया कि गिरफ्तारी कानून के अनुरूप नहीं की गई. उनका कहना था कि जैन को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, न कि गिरफ्तार करने के लिए. बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मामले में एफआईआर दर्ज होने के 27 महीने बाद गिरफ्तारी की गई, जबकि इस दौरान जांच में पूरा सहयोग किया गया. साथ ही टेंडर प्रक्रिया में सत्येंद्र जैन की भूमिका और कथित रिश्वत के आरोपों पर भी सवाल उठाए गए.
गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन की ओर से पेश वकील हरिहरन ने अदालत में कहा कि गिरफ्तारी कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हुई. हरिहरन ने कहा, "मुझे गिरफ्तारी से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया." उन्होंने अदालत को बताया कि वर्ष 2024 में इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी और उसके लगभग 27 महीने बाद गिरफ्तारी की गई. "केस रजिस्टर होने के 27 महीने बाद अरेस्ट हुआ है." उन्होंने कहा कि इस पूरे दौरान उन्हें केवल एक बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था. "इस बीच में मुझे सिर्फ एक बार पूछताछ के लिए बुलाया गया."
ACB की कार्रवाई पर आपत्ति
सत्येंद्र जैन के वकील ने कहा कि उन्हें जांच में सहयोग के लिए बुलाया गया था. हरिहरन ने दलील दी, "18 अगस्त को मैं दोबारा पूछताछ के लिए आया. 10 बजे ACB पहुंचा जांच में सहयोग के लिए." उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी ने उन्हें धारा 41A के तहत पूछताछ के लिए बुलाया था. "मुझे 41A के तहत जांच अधिकारी ने पूछताछ के लिए बुलाया क्योंकि मुझे गिरफ्तार नहीं किया जाना था." वकील ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के आधार पर्याप्त नहीं थे. "गिरफ्तारी के आधार पूरी तरह गलत हैं. ED की चार्जशीट में ऐसा कुछ नहीं है."
टेंडर प्रक्रिया में भूमिका से किया इनकार
बचाव पक्ष ने अदालत में यह भी कहा कि जिस टेंडर प्रक्रिया को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसमें सत्येंद्र जैन की कोई भूमिका नहीं थी. हरिहरन ने कहा, "टेंडर प्रक्रिया में सत्येंद्र जैन की कोई भूमिका नहीं." उन्होंने यह भी कहा कि आरोपित रिश्वत की रकम जैन तक पहुंचने का कोई सबूत जांच एजेंसियों के पास नहीं है. "रिश्वत की रकम सत्येंद्र जैन को मिली इसके कोई सबूत नहीं."
ED मामले का भी किया जिक्र
वकील ने अदालत को बताया कि जिन टेंडरों की बात की जा रही है, वे अक्टूबर 2022 में जारी हुए थे. हरिहरन ने कहा, "सबसे ज़रूरी बात ये है कि ये टेंडर अक्टूबर 2022 में दिए गए थे और मुझे दूसरे ED मामले में पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था, इसलिए जब टेंडर दिए गए तो मैं वहां नहीं था." उन्होंने यह भी कहा कि ईडी ने इसी मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन तब गिरफ्तारी नहीं हुई थी.
नागेंद्र यादव की ओर से मनिंदर सिंह की दलील
सह-आरोपी नागेंद्र यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने भी ACB की कार्रवाई पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "पहले ACB ने 3 और 6 अगस्त को जांच के लिए बुलाया था और फिर 16 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया, उसके बाद गिरफ्तार कर लिया." मनिंदर सिंह ने दलील दी कि जांच एजेंसी को लिखित रूप से बताना चाहिए था कि गिरफ्तारी क्यों की जा रही है. "ACB को लिखित में बताना चाहिए कि क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है."
जमानत याचिका दायर करने की तैयारी
सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन की ओर से यह भी कहा गया कि उनकी तरफ से जमानत याचिका दाखिल की जा रही है. वकील ने बताया, "हम सत्येंद्र जैन की बेल एप्लीकेशन डाल रहे हैं."
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
हरिहरन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि मजिस्ट्रेट को यह देखना चाहिए कि गिरफ्तारी के लिए जांच एजेंसी के पास पर्याप्त सामग्री मौजूद है या नहीं. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने जांच में कोई बाधा नहीं पहुंचाई. "FIR होने से लेकर मुझे गिरफ्तार करने तक मैंने जांच में कोई बाधा नहीं पहुंचाई." साथ ही उन्होंने अदालत से कहा, "मेरी गिरफ्तारी पूरी तरह गैरकानूनी, मुझे जेल भेजे जाने की कोई जरूरत नहीं."
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