- रोज वैली चिटफंड घोटाले में अब तक 17.50 करोड़ से अधिक रुपये जुटाए गए थे, जिनमें से छह हजार करोड़ नहीं लौटाए
- प्रवर्तन निदेशालय ने अप्रैल दो हजार छब्बीस तक लगभग 17350 निवेशकों को एक सौ सत्ताइस करोड़ रुपये लौटाए हैं
- ईडी ने अब तक 1568 की अचल और चल संपत्तियां पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम समेत कई राज्यों में जब्त की हैं
पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में फैले चर्चित रोज वैली चिटफंड घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय लगातार पीड़ितों को उनका पैसा वापस दिलाने की दिशा में काम कर रहा है. ED के कोलकाता जोनल ऑफिस ने एसेट डिस्पोज़ल कमेटी (ADC) के साथ मिलकर अब तक रिफंड की 16 चरणों की प्रक्रिया पूरी कर ली है. अप्रैल 2026 तक कुल 1 लाख 73 हजार 350 निवेशकों को करीब 127.69 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं. रोज वैली ग्रुप ने निवेशकों को मोटा मुनाफा देने का लालच देकर करीब 17,520 करोड़ रुपये जुटाए थे. लेकिन इनमें से 6,666 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस नहीं किए गए, जिससे लाखों लोग ठगी का शिकार हो गए. यह घोटाला पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और अन्य राज्यों में फैला हुआ था.
रोज वैली घोटाला: 17,520 करोड़ जुटाए, 6,666 करोड़ नहीं लौटे
साल 2014 में जांच शुरू होने के बाद से ED लगातार इस मामले में संपत्तियों को ट्रेस करने, जब्त करने और सुरक्षित रखने का काम कर रहा है. अब तक ED करीब 1,568 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अटैच या जब्त कर चुका है. ये संपत्तियां पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में फैली हुई हैं. इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा पैसा रिकवर करके पीड़ितों को लौटाना है. रिफंड प्रक्रिया में एक बड़ा मोड़ 22 अप्रैल 2025 को आया, जब ED ने भुवनेश्वर की स्पेशल कोर्ट के आदेश के बाद 517.54 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट ADC को सौंपा. इससे पीड़ितों को पैसा लौटाने की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिली.
1,568 करोड़ की संपत्तियां जब्त, कोर्ट आदेश से रिफंड तेज
इस पूरे सिस्टम को और तेज और पारदर्शी बनाने के लिए अब ED और ADC ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया है. 31 मार्च 2026 को हाईकोर्ट से इसकी मंजूरी भी मिल चुकी है. इसके तहत स्टॉक होल्डिंग डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड नाम की सरकारी कंपनी के साथ मिलकर रिफंड पोर्टल को अपग्रेड किया जा रहा है. नए सिस्टम में KYC डेटा की ऑटोमैटिक जांच और मल्टी-स्टेज वेरिफिकेशन होगा, जिससे फर्जी दावों पर रोक लगेगी और असली पीड़ितों को जल्दी पैसा मिल सकेगा.
1,568 करोड़ की संपत्तियां जब्त, कोर्ट आदेश से रिफंड तेज
ED का कहना है कि वो सिर्फ रोज वैली ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के अन्य चिटफंड घोटालों की भी जांच कर रहा है और कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा पीड़ितों को जल्द राहत मिले. एजेंसी का फोकस है कि जब्त की गई संपत्तियों को बेचकर या मॉनिटाइज करके पारदर्शी तरीके से पैसा वापस किया जाए. रोज वैली घोटाले में भले ही हजारों करोड़ की ठगी हुई हो, लेकिन अब जांच एजेंसियों की कोशिशों से धीरे-धीरे पीड़ितों को राहत मिल रही है. आने वाले समय में AI आधारित सिस्टम से रिफंड प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है, जिससे लाखों लोगों को उनका हक मिल सकेगा.
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