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बिहार : गयाजी में 1 करोड़ की फर्जी रंगदारी का खुलासा, FIR दर्ज कराने वाला डॉक्टर ही निकला आरोपी

गयाजी में न्यूरो सर्जरी विभाग के HOD डॉ. सत्येंद्र कुमार द्वारा दर्ज कराई गई 1 करोड़ रुपये रंगदारी की एफआईआर पुलिस जांच में फर्जी निकली. जांच में खुलासा हुआ कि डॉक्टर ने ही अपने कंपाउंडरों से पत्नी के मोबाइल पर रंगदारी कॉल करवाया था, गया पुलिस ने डॉक्टर सहित तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. (एनडीटीवी के लिए रंजन सिन्हा की रिपोर्ट)

बिहार : गयाजी में 1 करोड़ की फर्जी रंगदारी का खुलासा, FIR दर्ज कराने वाला डॉक्टर ही निकला आरोपी
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गयाजी:

बिहार के गयाजी में अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां के न्यूरो सर्जरी विभाग के एचओडी की दर्ज कराई गई 1 करोड़ रुपये रंगदारी मांगने की FIR का सच कुछ और ही निकला. पुलिस ने खुलासा किया है कि डॉक्टर ने ही खुद अपने कंपाउंडर के जरिए यह रंगदारी की कहानी गढ़ी थी, ताकि वह अपनी पत्नी से पैसा हड़प सकें. इस मामले में डॉक्टर सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है और सभी से पूछताछ जारी है.

डॉक्टर ने ही बनवाया था पत्नी के फोन पर रंगदारी का कॉल

7 जनवरी को डॉ. सत्येंद्र कुमार ने मगध मेडिकल थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी. जिसमें उन्होंने बताया था कि किसी अज्ञात शख्स ने उनकी पत्नी के मोबाइल पर कॉल कर 1 करोड़ रुपये रंगदारी की मांग की है. इसका एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद ये मामला गंभीर हो गया था. लेकिन पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी वैसे ही मामले की तस्वीर बदल गई.

दो कंपाउंडरों की गिरफ्तारी, पुलिस जांच में बड़ा खुलासा

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि रंगदारी की कॉल कोई बाहरी गिरोह नहीं, बल्कि डॉक्टर का ही प्लान था. सिटी एसपी कोटा किरण कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि रंगदारी कॉल डॉक्टर के ही कंपाउंडर ने किया था. इस मामले में मुंबई से मो. नौशाद अहमद और इरशाद अहमद को गिरफ्तार किया गया. दोनों ही डॉक्टर के यहां कंपाउंडर के रूप में काम कर चुके थे.

डॉक्टर अपना निजी नर्सिंग होम भी चलाते थे, जिसकी बिल्डिंग किराये पर ली गई थी. किराया बकाया था और पत्नी से पैसे मिलने में समस्या आ रही थी. इसके साथ ही पुलिस ने बताया कि डॉक्टर और उनकी पत्नी विभा देवी के बीच लंबे समय से संबंध अच्छे नहीं थे, इसी वजह से डॉक्टर ने यह पूरी प्लानिंग की, ताकि वह पत्नी से 1 करोड़ रुपये की रकम को हासिल कर सके. 

कॉल डिटेल्स ने खोली डॉक्टर की पोल 

पुलिस को मामले में संदेह तब हुआ जब कॉल डिटेल्स की गहराई से जांच की गई. सीडीआर में पाया गया कि मुंबई से कॉल करने वाले व्यक्ति का डॉक्टर और उनके कंपाउंडरों से सीधा संपर्क था. रंगदारी की कॉल डॉक्टर के निर्देश पर की गई थी, कारोबारी साझेदारी में डॉक्टर और मो. नौशाद आपस में जुड़े हुए थे. इन सभी तकनीकी सबूतों के आधार पर पुलिस टीम मुंबई पहुंची और दोनों कंपाउंडरों को गिरफ्तार कर लिया. फिर पूछताछ में पूरा काला चिट्ठा सामने आ गया.

तीनों से पूछताछ जारी, और भी खुलासे संभव

फिलहाल डॉक्टर सत्येंद्र कुमार, मो. नौशाद और इरशाद तीनों पुलिस हिरासत में हैं. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या किसी और की भी इस साजिश में भूमिका थी? डॉक्टर की आर्थिक स्थिति या निजी विवाद ने इस घटना को किस हद तक प्रभावित किया? वायरल हुई रंगदारी ऑडियो क्लिप किसने रिकॉर्ड और प्रसारित की?

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पीयूष जयजान
Sub Editor
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