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फिटनेस का सीक्रेट हथियार! कोहली-रोहित की पीठ पर लगी मशीन क्या करती है?

भारत-वेस्टइंडीज सीरीज में भारतीय खिलाड़ियों के GPS डिवाइस का सबसे बड़ा मकसद खिलाड़ियों के वर्कलोड को मैनेज करना है. ट्रेनिंग सेशन के दौरान खिलाड़ी या कोच जो देख पाते हैं, सिर्फ उस पर निर्भर रहने के बजाय, परफॉर्मेंस ट्रैकिंग टीम को हर एथलीट पर पड़ने वाले फिजिकल दबाव को जानने का सटीक डेटा मिलता है. 

फिटनेस का सीक्रेट हथियार! कोहली-रोहित की पीठ पर लगी मशीन क्या करती है?
कोहली-रोहित पीठ पर क्या लगाते हैं? जानिए करोड़ों की फिटनेस टेक्नोलॉजी का राज

वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान विराट कोहली, रोहित शर्मा, शुभमन गिल और दूसरे भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार परफॉर्मेंस से फैन्स का दिल जीता ही बल्कि विराट कोहली, रोहित शर्मा, शुभमन गिल जैसे खिलाड़ियों को भी एक टेक्नोलॉजी वाले डिवाइस का इस्तेमाल करते भी देखा गया, जिसकी चर्चा हो रही है.  दरअसल, जो डिवाइस क्रिकेटर अपने कंधे पर लगाकर खेल रहे थे वह डिवाइस  क्रिकेट का कोई आम सामान या साधारण हेल्थ ट्रैकर नहीं था. 

बता दें कि यह छोटा डिवाइस एक प्लेयर ट्रैकर है, जिसे खास तौर पर एथलीट के फिजिकल वर्कलोड के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा करने के लिए बनाया गया है यह मॉडर्न स्पोर्ट्स परफॉर्मेंस के क्षेत्र में एक तकनीकी तरक्की है, जहां कोच, फिटनेस स्टाफ और खुद खिलाड़ी डेटा को ट्रैक और इस्तेमाल करके खिलाड़ी के काम की फ्रीक्वेंसी और तीव्रता को समझ सकते हैं. भारतीय क्रिकेटर  कुछ समय से GPS-बेस्ड प्लेयर ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है, जिसे मुख्य रूप से स्टैटस्पोर्ट्स जैसी कंपनियां सप्लाई करती है. 

 भारतीय क्रिकेटर कौन सा डिवाइस इस्तेमाल कर रहे

भारतीय क्रिकेटर जिस डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं, उसे कम्प्रेशन या बेस लेयर वेस्ट (बनियान) के पीछे एक पॉकेट में रखा जाता है और कंधे की हड्डियों के बीच सेट किया जाता है. इस डिवाइस में GPS और मोशन सेंसर लगे रहते हैं. जिससे  कई तरह के फिजिकल पैरामीटर रिकॉर्ड किए जाते हैं.  इसमें दूरी, स्पीड,एक्सेलरेशन, धीमी गति, तेज़ी से दौड़ना, वर्कलोड को रिकॉर्ड किया जाता है, जब ट्रैकर को हार्ट-रेट मॉनिटर से जोड़ा जाता है, तो हार्ट-रेट से जुड़ा डेटा भी इसमें शामिल मुख्य फीचर्स में से एक होता है.

भारत-वेस्टइंडीज सीरीज में भारतीय खिलाड़ियों के GPS डिवाइस का सबसे बड़ा मकसद खिलाड़ियों के वर्कलोड को मैनेज करना है. ट्रेनिंग सेशन के दौरान खिलाड़ी या कोच जो देख पाते हैं, सिर्फ उस पर निर्भर रहने के बजाय, परफॉर्मेंस ट्रैकिंग टीम को हर एथलीट पर पड़ने वाले फिजिकल दबाव को जानने का सटीक डेटा मिलता है. 

इस जानकारी का इस्तेमाल बाद में एक सेशन से दूसरे सेशन के बीच ट्रेनिंग की तीव्रता, रिकवरी और वर्कलोड को एडजस्ट करने के लिए किया जा सकता है, इसने दुनिया के कुछ सबसे फिट क्रिकेटरों की मदद भी की है. इंटरनेशनल मैचों के व्यस्त शेड्यूल के दौरान, जब थकान को मैनेज करना और चोटों और बीमारियों से बचना बहुत जरूरी होता है, तो यह डिवाइस खिलाड़ियों पर ज़्यादा बोझ पड़ने का खतरा कम करती है और यह बताने में मदद करती है कि उन्हें अपनी फिटनेस पर मैनेज करने के लिए क्या-क्या सावधानी बरतनी है. 

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