- वडोदरा वनडे में विराट कोहली ने 45वीं बार मैन ऑफ़ द मैच का ख़िताब जीतकर अपनी मां को ट्रॉफ़ी भेंट की
- विराट कोहली के पिता की मृत्यु के बाद उनकी मां ने बेटे को टीम के लिए खेलने की अनुमति दी थी
- विराट कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मैन ऑफ़ द मैच के मामले में सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरे स्थान पर हैं
Virat Kohli: वडोदरा वनडे में 45वीं बार मैन ऑफ़ द मैच का ख़िताब जीतने के बाद विराट कोहली के अपनी मां को दिए गये बयान के बाद खेलों की दुनिया में मां-बेटे के एक साथ संघर्ष, बेटे की कामयाबी और मां के प्यार से जुड़ी कई दिल को छू लेनेवाली कहानियां सामने आ गई हैं. वडोदरा वनडे में अपना 45वां मैन ऑफ़ द मैच का ख़िताब जीतने के बाद पोस्ट मैच प्रेज़ेन्टेशन के दौरान विराट ने हर्षा भोगले को बताया कि वो अपनी ट्रॉफ़ी का क्या करते हैं, उन्हें कहां रखते हैं, क्या इसके लिए उन्हें एक्स्ट्रा रूम की ज़रूरत पड़ेगी. विराट ने कहा,"मैं अपनी ट्रॉफ़ी मां के पास भेज देता हूं जो गुड़गांव में रहती हैं. उन्हें सारी ट्रॉफ़ी को रखना अच्छा लगता है. वो फ़ख़्र महसूस करती हैं."
Moment of the Match
— Satyajit Chutia (@satyajitch0611) January 12, 2026
Harsha Bhogle - How many ‘Player of the Match' awards
do you have?
Virat Kohli - Honestly, I have no idea. I just send them to
my mom in Gurugram - she likes keeping them.
Mom ❤️#viratkholi #INDvsNZ pic.twitter.com/i6FCvXXbJE
विराट कोहली की कामयाबी के किस्से तो दुनिया दुहराती है. विराट के संघर्ष और उनकी फ़ाइटिंग स्पिरिट की भी फ़ैन्स दाद देते हैं. लेकिन उनकी मां सरोज कोहली का बड़ा संघर्ष दुनिया ने शायद ही देखा है.
2006 में जब 18 साल के विराट कोहली के पिता प्रेम कोहली की मृत्यु हुई तब विराट कर्नाटक के ख़िलाफ़ दिल्ली के लिए रणजी मैच खेल रहे थे. विराट ने अगले दिन आकर अपनी पारी पूरी की और 90 रन बनाए, और फिर पिता के दाह संस्कार के लिए जा पाए. विराट को अपने पिता की मौत के बाद भी अपनी टीम के लिए अपनी ड्यूटी निभाने की इजाज़त के पीछे उनकी मां का प्यार और बेहद मज़बूत दिल ही था जो चीकू इतना बड़ा फ़ैसला ले पाए. यही वजह है कि कोहली का कद आज इतना विराट हो पाया है.
सचिन के रिकॉर्ड के नज़दीक पहुंचते विराट
वडोदरा वनडे मैच में विराट कोहली 45वीं बार मैन ऑफ़ द मैच के ख़िताब से नवाज़े गए. अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में ये उनका 71वां मैन ऑफ़ द मैच ख़िताब रहा. वर्ल्ड क्रिकेट में इस मामले में वो सचिन तेंदुलकर (76) के बाद वो दूसरे नंबर पर हैं. जबकि, अंतर्राष्ट्रीय वनडे में विराट (45 मैन ऑफ़ द मैच ख़िताब), सचिन तेंदुलकर (62) और सनथ जयसूर्या (48) के बाद तीसरे नंबर पर हैं.
एंब्रोस की मां बजा देती थीं घंटी
वेस्ट इंडीज़ के नामचीन और घातक तेज़ गेंदबाज़ कर्टली एम्ब्रोस की एक मशहूर कहानी है कि उनकी मां हीलि ने एंटीगा में अपने घर के बाहर एक घंटी बांध रखी थी. एम्ब्रोस के हर टेस्ट विकेट पर वो बाहर जाकर वो घंटी बजाती थीं ताकि वहां के लोगों को एम्ब्रोस के टेस्ट शिकार का अंदाज़ा हो सके.
एम्ब्रोस को लेकर ये भी कहा जाता है कि उन्हें बास्केटबॉल भी उतना ही पसंद था. लेकिन क्रिकेट की फ़ैन अपनी मां हीलि की खुशी के लिए वो क्रिकेटर बने और फिर 98 टेस्ट मैचों में 2.30 की इकॉनमी के साथ उन्होंने 405 विकेट अपने नाम कर लिए.
बुमराह, ईशान किशन, श्रेयस के मां की दास्तां
कई भारतीय महिला क्रिकेटर और पुरुष क्रिकेटरों की मां के संघर्ष की ऐसी दर्द भरी कहानियां भी सामने आईं हैं जहां क्रिकेटर की मां के बलिदान की वजह से खिलाड़ियों ने अपना और देश का नाम रोशन किया.
मां ने बेच दिए गहने
हाल ही में IPL 2026 के ऑक्शन में राजस्थान के 19 साल के विकेटकीपर बैटर कार्तिक शर्मा को चेन्नई की टीम ने 14.20 करोड़ में खरीदकर उन्हें अबतक के आईपीएल इतिहास का सबसे महंगा खिलाड़ी बना दिया तो वो सुर्ख़ियों में आ गए. लेकिन तभी ये कहानी भी सामने आई कि उन्हें क्रिकेट के मैदान पर रोशन रखने के लिए उनकी मां राधा शर्मा को अपने गहने बेच देने पड़े.
बेटे के भविष्य को बनाने के लिए ईशान किशन और वैभव सूर्यवंशी के मां के त्याग की कहानी को लेकर भी अब क्रिकेट सर्किट में बात होती रहती है. वहीं जसप्रीत बुमराह और उनके मां की संघर्ष की कहानियों से भी क्रिकेट की दुनिया अच्छी तरह वाकिफ़ है.
सचिन ने मां को लेकर क्या कहा- सबकी पहली टीचर-कोच
ज़िन्दगी के मैदान और खेल चाहे जो भी हों, हर स्टार के संघर्ष में उसकी मां और पिता का वो रोल ज़रूर होता है जिसके बारे में बात कम ही होती है. मां- तकरीबन हर शख़्सियत की पहली टीचर भी रही होती हैं. एब्राहम लिंकन अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति एब्राहम लिंकन ने कहा था,"आज मैं जो भी हूं या जो बनना चाहता हूं, उन सबके पीछे मेरी मां का हाथ है."
सचिन तेंदुलकर अक्सर अपनी मां के बारे में कहते रहे हैं,"मैं जो कुछ भी हूँ, उसकी शुरुआत उनकी प्रार्थनाओं और उनकी शक्ति से हुई है. मेरी आई (मां) हमेशा मेरे लिए एक सहारा रही हैं, जैसे हर मां अपने बच्चे के लिए होती है." सचिन ये भी कहते हैं,"मेरी माँ मेरी जड़ है, मेरा आधार है. उन्होंने मेरे जीवन का बीज बोया है, और वह यह विश्वास है कि हासिल करने की क्षमता आपके मन में शुरू होती है."
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