महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनाव प्रचार के अंतिम दिन राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए मराठी अस्मिता, संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन और कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए.
मुंबई में चुनाव प्रचार के समापन के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए रविंद्र चव्हाण ने कहा कि “मराठी माणूस के नाम पर राजनीति करने वालों को पहले इतिहास में झांकना चाहिए और वर्तमान को भी देखना चाहिए.” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में शहीद हुए 105 मराठी लोगों पर गोली चलाने का पाप कांग्रेस का है और यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है जिसे बदला नहीं जा सकता.
संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन और कांग्रेस पर सीधा आरोप
रविंद्र चव्हाण ने याद दिलाया कि 16 जनवरी 1956 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई को केंद्रशासित प्रदेश बनाने की घोषणा की थी. उसी निर्णय के विरोध और मराठी माणूस के न्यायसंगत अधिकारों के लिए बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की थी. उन्होंने कहा कि यह भी एक निर्विवाद सत्य है कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों पर गोलीबारी करने वाली सरकार केंद्र और राज्य—दोनों स्तरों पर कांग्रेस की ही थी. इसके बावजूद आज कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर मराठी अस्मिता की बात करना पूरी तरह से पाखंड है.
“कांग्रेस की गोद में बैठकर मराठी अस्मिता का ढोल”
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि आज उद्धव ठाकरे कांग्रेस के समर्थन से राजनीति कर रहे हैं, जो वैसा ही है जैसे “कांग्रेस की बंदूक अपने कंधे पर रखकर चलाना.” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाकर उद्धव ठाकरे ने संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के 105 शहीदों का अपमान किया. केवल अपनी राजनीतिक दुकान चलाने के लिए कांग्रेस से समझौता करते समय उन्हें मराठी अस्मिता का सुविधाजनक विस्मरण हो गया, यह बात महाराष्ट्र की जनता ने भली-भांति देखी है.
कोंकण रेलवे और विकास का मुद्दा
रविंद्र चव्हाण ने कोंकण रेलवे का उदाहरण देते हुए कहा कि 1990 के दशक में कोंकण रेलवे की शुरुआत मधु दंडवते और जॉर्ज फर्नांडिस जैसे दूरदर्शी नेताओं के प्रयासों से हुई थी, उस समय कांग्रेस सत्ता में नहीं थी. उन्होंने कहा कि 2014 के बाद भाजपा सरकार के कार्यकाल में कोंकण रेलवे के स्टेशनों और आसपास के क्षेत्रों का कायाकल्प हुआ, उन्हें आधुनिक और सुसज्जित बनाया गया. इसके विपरीत कांग्रेस के शासनकाल में कोंकण के लिए कुछ ठोस नहीं किया गया, फिर भी उन्हीं कोंकणी लोगों के समर्थन से उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस की बैसाखियों पर मुख्यमंत्री पद हासिल किया.
“मराठी के असली हितैषी कौन?”
उबाठा सेना और मनसे पर सवाल उठाते हुए चव्हाण ने कहा कि ये दल खुद को बाकी पार्टियों से ज्यादा मराठी हितैषी कैसे साबित करते हैं, इसका ईमानदार जवाब आज तक नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि भाजपा में आने वाला कोई भी अमराठी भाषी व्यक्ति केवल अपनी भाषा के कारण नहीं आता, बल्कि इसलिए आता है क्योंकि अन्य दलों में नेतृत्व, विचारधारा और भविष्य सीमित है. यही आज की राजनीतिक वास्तविकता है.
भाजपा के कार्यों का किया उल्लेख
भाजपा के योगदान पर बोलते हुए रविंद्र चव्हाण ने कहा कि मराठी भाषा, संस्कृति और मराठी माणूस के लिए ठोस और परिणामकारी काम भाजपा ने किया है. मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा दिलाने के लिए देवेंद्र फडणवीस और भाजपा नेताओं ने केंद्र सरकार के स्तर पर लगातार प्रयास किए. उन्होंने कहा कि “माय मराठी” को अभिजात भाषा का दर्जा मिलना देवेंद्र फडणवीस के निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है और इसे स्वीकार करना होगा.
BDD चाली और मुंबई का मराठी सवाल
एक सवाल के जवाब में चव्हाण ने कहा कि मुंबई की BDD चाली में रहने वाले मराठी परिवारों को उनका हक़ का घर केवल देवेंद्र फडणवीस सरकार की पहल से ही मिल सका. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आते ही उद्धव ठाकरे को मराठी माणूस याद आता है, लेकिन बाकी पांच वर्षों में वे ‘मराठी' शब्द तक भूल जाते हैं. महापालिका के ठेके देते समय परप्रांतीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन पिछले 30 वर्षों में मुंबई के मराठी माणूस के लिए वास्तव में क्या किया गया, इसका सार्वजनिक उत्तर देने की चुनौती उन्होंने उबाठा सेना को दी.
“मी मराठी” से “मी मुंबईकर” तक
मराठी सांस्कृतिक पहचान पर बोलते हुए रविंद्र चव्हाण ने कहा कि आज पूरे देश में जिस भव्य गुड़ी पाड़वा हिंदू नववर्ष शोभायात्रा का गौरव से उल्लेख होता है, उसकी संकल्पना डोंबिवली के संघ–भाजपा कार्यकर्ताओं की ही देन है. उन्होंने आरोप लगाया कि “मी मराठी” की पहचान को बदलकर “मी मुंबईकर” की अवधारणा थोपने का काम उद्धव ठाकरे ने किया, जिससे मुंबई की मराठी पहचान को नुकसान पहुंचा. उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसे बदलाव बालासाहेब ठाकरे को स्वीकार्य होते?
भावनाओं नहीं, काम का हिसाब चाहिए
अपने बयान का समापन करते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि मराठी माणूस का सम्मान, भाषा, संस्कृति और भविष्य केवल भावनात्मक नारों से सुरक्षित नहीं होते, बल्कि ज़मीन पर किए गए काम से तय होते हैं.
उन्होंने दावा किया कि घोषणाओं से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वास्तव में क्या किया गया है और यह काम भाजपा ने करके दिखाया है. “यह सच्चाई सूरज की रोशनी जितनी साफ है,” ऐसा कहते हुए रविंद्र चव्हाण ने उद्धव ठाकरे और उनकी राजनीति पर सीधा हमला बोला.
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