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आखिर कैसे 'बर्बाद' हो गया पाकिस्तान क्रिकेट? कभी दुनिया में बजता था डंका, वजह आपको भी झकझोर देंगे

एक दौर था जब पाकिस्तान क्रिकेट की पूरी दुनिया में तूती बोला करती थी. इमरान खान, वसीम अकरम, वकार यूनुस, शाहिद अफरीदी और शोएब अख्तर जैसे दिग्गज टीम की पहचान थे. आखिर ऐसा क्या हुआ कि कभी अर्श पर रहने वाली पाकिस्तान टीम आज फर्श पर नजर आती है? जानिए प्रमुख कारण.

आखिर कैसे 'बर्बाद' हो गया पाकिस्तान क्रिकेट? कभी दुनिया में बजता था डंका,  वजह आपको भी झकझोर देंगे
पाकिस्तान क्रिकेट की बर्बादी के कारण

एक समय था जब पड़ोसी देश पाकिस्तान क्रिकेट की पूरी दुनिया में तूती बोला करती थी. टीम में एक से बढ़कर एक खिलाड़ी थे. जो हारी हुई बाजी को जिताने का दम रखते थे. टीम में इमरान खान, इंजमाम उल हक, शाहिद अफरीदी, वसीम अकरम, वकार यूनुस, शोएब अख्तर जैसे नाम हुआ करते थे. जो केवल पाकिस्तान ही नहीं पूरी दुनिया में क्रिकेट का चेहरा हुआ करते थे. टीम दिन प्रतिदिन नई बुलंदियों को छू रही थी. मगर ऐसा क्या हुआ जो अर्श पर रहने वाली टीम आज फर्श पर नजर आती है? ये सवाल हर किसी जेहन में आता है. आना भी लाजमी है. अगर आपके दिमाग में भी यही सवाल आता है और आपको जवाब नहीं मिल पा रहा था, तो परेशान ना हों. ये केवल आपका ही सवाल नहीं दुनिया भर के लाखों फैंस का सवाल है और उसी सवाल का जवाब आज हम लेकर आए हैं. पाकिस्तान क्रिकेट की बर्बादी में एक नहीं बल्कि कई प्रमुख कारण हैं, जो कुछ इस प्रकार है-  

राजनीतिक दखल

भारत में आप देखते होंगे कि सरकार चाहे जिस पार्टी की हो, वो खेल में दखल नहीं देते हैं. मगर पड़ोसी देश पाकिस्तान में ऐसा नहीं हैं. वहां सरकार बदलते ही क्रिकेट में भी उठापटक शुरू हो जाती है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष बदल दिए जाते हैं. जिसके बड़े उदाहरण रमीज राजा, नजम सेठी और जका अशरफ जैसे शख्स हैं. ऐसा नहीं है कि ये दिग्गज बिना टैलेंट के वहां तक पहुंचे थे. मगर उधर सरकार बदली. इधर इनकी कुर्सी भी डगमगा गई. परिणाम ये रहा कि पिछले अध्यक्ष का प्लान लागू भी नहीं हो पाया था कि नए अध्यक्ष ने आते ही नए प्लान ला दिए और खिलाड़ी दो राहे पर खड़े हो गए. मौजूदा समय में पाकिस्तान क्रिकेट के बेड़ा गर्क होने में राजनीतिक दखल का अहम रोल है. 

हाल के सालों में बोर्ड ने कप्तान और कोच पर कम दिखाया है भरोसा 

पाकिस्तान क्रिकेट की बदहाली में मौजूदा लिए गए फैसले भी अहम हैं. जिसमें सबसे प्रमुख फैसला जल्दी-जल्दी कप्तानों और कोचो का तबादला है. हाल के सालों में पीसीबी की तरफ से कप्तानी और कोचिंग स्टाफ पर बहुत जल्दी-जल्दी और कड़े फैसले लिए गए हैं. जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले पांच सालों में बोर्ड की तरफ से सभी प्रारूपों में मिलाकर सात से ज्यादा कप्तान बदले जा चुके हैं. यहीं नहीं पिछले पांच सालों में 11 बार कोचिंग स्टाफ में भी बदलाव हुआ है. जिसका परिणाम यह हुआ है कि खिलाड़ियों के बीच तालमेल की कमी हो गई है और टीम कई धड़ों में बट चुकी है. 

बरबाद हो चुका है घरेलू क्रिकेट!

ये तो मामना होगा कि पाकिस्तान का घरेलू क्रिकेट पूरी तरह से चौपट हो चुका है. भारत में जहां घरेलू क्रिकेट से दिन प्रतिदिन एक से बढ़कर एक होनहार खिलाड़ी निकल रहे हैं. वहीं पाकिस्तान का घरेलू क्रिकेट स्ट्रक्चर पूरी तरह से खत्म हो चुका है. पूर्व कप्तान अजहर अली और कई अन्य क्रिकेटरों ने इस बात को माना भी है. उनका कहना है पाकिस्तान में 'डिपार्टमेंटल क्रिकेट' जिसमें रेलवे, बैंकों और क्लब के मैच शामिल हैं. लगभग-लगभग खत्म हो चुके हैं. जिससे वहां युवा प्रतिभाओं की नर्सरी तैयार ही नहीं हो पा रही है. परिणाम यह निकलकर सामने आ रहा है कि टीम को प्रतिभावान और अनुशासित खिलाड़ी मिल ही नहीं पा रहे हैं. 

अनुशासनहीनता में नहीं आ रही है कमी 

पाकिस्तानी खिलाड़ियों की एक सबसे बड़ी कमी तो उनकी अनुशासनहीनता ही है. चन्द प्रदर्शन के बाद ही वह खुद को स्टार समझने लगते हैं और ऊलजलूल हरकतें करने लगते हैं. प्रैक्टिस सेशन, फिटनेस, डाइट आदि चीजों को वह गंभीरता से नहीं लेते हैं. जिसका परिणाम यह निकलता है कि धीरे-धीरे उनका फिटनेस लेवल नीचे गिरता जाता है और उनका प्रदर्शन भी अर्श से फर्श पर आ जाता है. 

सिफारिश के दम चलता है काम 

ये बात तो सत्य है कि पाकिस्तान में आज भी खिलाड़ी टैलेंट के बलबूते नहीं, बल्कि सिफारिश के दम पर ज्यादा पहुंचते हैं. अगर ऐसा नहीं होता तो सोचिए इतनी खराब फिटनेस और औसत प्रदर्शन के बावजूद मोइन खान के बेटे आजम खान पाकिस्तान की टीम तक कैसे पहुंच जाते. वहीं नहीं कई और बड़े नाम भी शामिल हैं. इसके अलावा पाक टीम ने कभी भी मजबूत संस्थाएं विकसित नहीं कीं, जो कि आज खस्ता हालात के प्रमुख कारण हैं. 

व्यक्तिगत प्रदर्शन पर जोर 

पाक खिलाड़ी आज भी टीम से ज्यादा अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन पर तवज्जो देते हैं. जिससे उनकी सीट बची रही. पिछले कुछ सालों तक ऐसा ही चला आ रहा था. मगर अब उसमें सुधार हुआ है. युवा खिलाड़ी टीम भावना के तहत खेलते हुए नजर आ रहे हैं. 

प्राकृतिक प्रतिभा पर निर्भर है टीम 

पाकिस्तान में मेहनती खिलाड़ियों की कमी है. एक समय था जब शोएब अख्तर जैसे खिलाड़ी कठिन मेहनत किया करते थे. जिसका असर मैदान में भी दिखता था. मगर आज के खिलाड़ी प्राकृतिक प्रतिभा वाले नजर आते हैं. ऐसा लगता है वो दुनिया से अलग एक अलग ही तरीके का खेल, खेल रहे हैं. बिना ठोस योजना के व्यक्तिगत चमक ज्यादा समय देर तक नहीं टिक पाता है.

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