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IPL का 19 साल पहले हुआ था आगाज और लाया गया था आइकन प्लेयर्स का कॉन्सेप्ट, पर क्या रही इसकी कहानी

आज के दिन 2008 में शुरू हुआ था IPL, साथ ही लॉन्च हुआ था आइकन प्लेयर्स का नया कॉन्सेप्ट. पर बाद के IPL में आइकन प्लेयर्स क्यों नहीं दिखे?

IPL का 19 साल पहले हुआ था आगाज और लाया गया था आइकन प्लेयर्स का कॉन्सेप्ट, पर क्या रही इसकी कहानी
AFP

18 अप्रैल 2008 को जब IPL का पहला संस्करण शुरू हुआ था, तब पहला मैच RCB और KKR के बीच हुआ था. पहले ही मैच में IPL को पहला शतकवीर (ब्रेंडन मैकुलम) मिल गया था. उस पहले IPL टूर्नामेंट की सबसे महंगी टीम मुंबई इंडियंस (111.9 मिलियन डॉलर) थी तो सबसे महंगे क्रिकेटर और कोई नहीं बल्कि महेंद्र सिंह धोनी थे. जिन्हें 1.5 मिलियन डॉलर यानी करीब 6 करोड़ रुपये में चेन्नई ने खरीदा था. 

बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया यानी बीबीसीआई के इस पूरे शो के सूत्रधार तब के IPL कमिश्नर ललित मोदी थे, जिन्होंने एक जबरदस्त तालमेल बिठाया और इस तरह पूरी दुनिया में अपनी तरह के नए-नवेले इस सालाना क्रिकेट टूर्नामेंट की शुरुआत हुई.

क्रिकेट के बड़े-बड़े नाम IPL 2008 का हिस्सा बनने भारत आए. बीसीसीआई को इस आयोजन से अरबों डॉलर का फायदा होने वाला था. और भला बीसीसीआई अपने दिग्गज क्रिकेटर्स को भुनाने का कोई कसर क्यों छोड़ती.

तब भारत के पास सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, युवराज सिंह और वीरेंद्र सहवाग जैसे नामी गिरामी क्रिकेटर मौजूद थे.

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आइकन प्लेयर का कॉन्सेप्ट

इन प्लेयर्स की इमेज को भुनाने के लिए IPL के पहले सीजन में आइकन प्लेयर्स का कॉन्सेप्ट लाया गया. इसके जरिए सबसे बड़े भारतीय क्रिकेटर्स को उनके घरेलू शहरों की टीमों से बतौर आइकन प्लेयर जोड़ा गया, ताकि उनकी ब्रांड वैल्यू बढ़ सके. इन खिलाड़ियों की नीलामी नहीं हुई थी. हालांकि नीलामी में सबसे महंगे खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी थे, जिन्हें करीब 6 करोड़ रुपये में चेन्नई ने खरीदा था. वहीं आइकन प्लेयर्स को उनकी टीम से सबसे महंगे प्लेयर से 15 फीसद अधिक रकम दिया गया था.

सचिन तेंदुलकर (मुंबई इंडियंस), सौरव गांगुली (कोलकाता नाइट राइडर्स), राहुल द्रविड़ (राजस्थान रॉयल्स) और युवराज सिंह (किंग्स XI पंजाब) शुरुआती आइकॉन प्लेयर्स थे. फिर दिल्ली और हैदराबाद ने सहवाग और लक्ष्मण का नाम आइकन प्लेयर के तौर पर शामिल करने का आग्रह किया. भारत के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग को तो आइकॉन प्लेयर के तौर पर दिल्ली डेयरडेविल्स से जोड़ लिया गया, पर दिग्गज मध्यक्रम बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने इस लिस्ट से अपना नाम वापस ले लिया था. 

आइकन प्लेयर्स की एंट्री तो हो गई पर उन्होंने टूर्नामेंट में प्रदर्शन कैसे किया? बाद के टूर्नामेंट में आइकन प्लेयर्स क्यों नहीं दिखे?

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Photo Credit: X @mipaltan

आइकन प्लेयर्स ने टूर्नामेंट में क्या किया?

सचिन तेंदुलकर: IPL के शुरुआती मैचों में तेंदुलकर मौजूद नहीं थे, लेकिन जब वो आए तो उनका प्रदर्शन उनके नाम के अनुरूप नहीं हो सका. सचिन ने 7 मैच में 31.33 की औसत से महज 188 रन बनाए.

सौरव गांगुली: प्रिंस ऑफ कोलकाता भी 12 मैचों में 29.08 की औसत से केवल 349 रन ही बना सके. हालांकि गेंदबाजी में दादा ने छह विकेट भी चटकाए. 

राहुल द्रविड़: टीम इंडिया की दीवार के रूप में मशहूर द्रविड़ ने 14 मैचों में 28.53 की औसत से 371 रन बनाए और आईपीएल के अपने करियर का सबसे बड़ा स्कोर 75 रन भी बनाया.

वीरेंद्र सहवाग: नजफगढ़ के नवाब ने 2008 के आईपीएल में ऑरेंज कैप की रेस में 10वें स्थान पर रहे. टॉप पर शॉन मार्श थे. 14 मैचों में, सहवाग ने 33.83 की औसत और तीन अर्धशतकों की मदद से 406 रन बनाए. वहीं अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी से तीन विकेट भी लिए.

युवराज सिंह: युवराज किंग्स XI पंजाब के कप्तान भी थे लेकिन पहले सीजन में उनके बल्ले से 15 मैचों में 23 की औसत से कुल 299 रन ही निकल सके. बैटिंग चार्ट में युवी 20वें पायदान पर रहे. वहीं बॉलिंग में भी युवराज का कुछ खास प्रदर्शन नहीं रहा. उन्होंने केवल तीन विकेट लिए. 

आइकन प्लेयर्स के इस साधारण प्रदर्शन के बाद बीसीसीआई ने बाद में इस प्रयोग को भी आइकॉनिक बना दिया और आगे के टूर्नामेंट में इसे नहीं दोहराया गया.

पहले सीजन की कहानी

शुरुआत के साथ पहले मैच में ही धमाका हुआ. 18 अप्रैल 2008 को पहला मुकाबला Royal Challengers Bangalore vs Kolkata Knight Riders हुआ. और यहीं पर जन्म हुआ IPL के पहले सुपरस्टार इनिंग्स का. 10 चौके और 13 छक्के के साथ 216+ की स्ट्राइक रेट से ब्रेंडन मैकुलम ने केवल 73 गेंदों पर 158 रन बना कर IPL का पहला शतक जमाते हुए पहले ही मैच में लीग की पहचान तय कर दी. ये इनिंग्स आज भी IPL इतिहास की सबसे आइकॉनिक पारियों में गिनी जाती है.

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Photo Credit: BCCI

टीमें और चैंपियन

IPL 2008 में कुल 8 टीमें थीं. इनमें सबसे महंगी मुंबई इंडियंस थी जिसे मुकेश अंबानी ने 111.9 मिलियन डॉलर में खरीदा था.

इसके अलावा चेन्नई सुपर किंग्स, राजस्थान रॉयल्स, दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स), किंग्स XI पंजाब (अब पंजाब किंग्स), डेक्कन चार्जर्स, कोलकाता नाइट राइडर्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर अन्य टीमें थीं.

सबको चौंकाते हुए खिताबी जीत राजस्थान रॉयल्स की हुई. जिसने शेन वॉर्न की कप्तानी में महेंद्र सिंह धोनी की सीएसके को फाइनल में हराया.

शेन वॉर्न ने टूर्नामेंट के दौरान अपनी कप्तानी का बेहद दमदार प्रदर्शन किया. युवाओं को मौके दिए. स्मार्ट फील्डिंग सेट की. स्पिन का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया और पावर हिटिंग के इस टूर्नामेंट के पहले संस्करण की ट्रॉफी अपनी टीम राजस्थान रॉयल्स के नाम की.

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Photo Credit: FB Rajasthan Royals

दमदार यादगार रिकॉर्ड

पहले ही टूर्नामेंट में चेन्नई सुपर किंग्स ने 240 रनों का पहाड़ खड़ा किया था जो तब उनका सबसे बड़ा टोटल था. वहीं रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम तब 82 रन पर ऑल आउट हो गई थी, जो उस टूर्नामेंट का सबसे कम टीम स्कोर था. तब युसूफ पठान फाइनल को हीरो बने थे तो रोहित शर्मा डेक्कन चार्जर्स के लिए चमके थे, वहीं सुरेश रैना CSK की मिडिल ऑर्डर की मजबूत कड़ी बन कर उभरे थे

2008 के आईपीएल के पहले सीजन ने केवल एक क्रिकेट सिरीज की शुरुआत नहीं की बल्कि यह एक गेमचेंजर बना क्योंकि करीब दो महीने चलने वाले इस टूर्नामेंट के पहले संस्करण में मैकुलम की 158 रनों की नाबाद पारी हो या धोनी की रिकॉर्ड बोली या फिर राजस्थान की चमत्कारी खिताबी जीत. सबने मिलकर IPL को वो ब्रांड बनाया जो आज वो है.

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