- दिल्ली में NCRB के अनुसार चोरी के मामले देश के कुल मामलों का तिहाई से भी अधिक हिस्सा हैं, जो चिंताजनक है
- साल 2024 में दिल्ली में प्रति दिन लगभग 500 चोरी की वारदातें दर्ज की गईं, जो अन्य महानगरों से बहुत अधिक हैं
- हत्या के मामलों में परिवार, संपत्ति, धन संबंधी विवाद तथा डकैती से जुड़ी घटनाएं दिल्ली में शीर्ष कारण हैं
देश की राजधानी अपनी चकाचौंध और पर्यटक स्थलों के लिए मशहूर है. देशभर से लोग यहां घूमने आते हैं. लेकिन इस शहर में चोर 'सुपर एक्टिव' मोड में हैं. हालात यह हैं कि झपटमारी और स्ट्रीट क्राइम दिल्ली पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुके हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़े बेहद चौंकाने वाली तस्वीर पेश कर रहे हैं. देश के 19 प्रमुख महानगरों में होने वाली कुल चोरियों में से अकेले 73.3 प्रतिशत मामले दिल्ली से सामने आते हैं. यानी दिल्ली में हर 3 मिनट में एक चोरी का मामला सामने आ रहा है.
डरा रहे NCRB के आंकड़े?
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में क्राइम के मामले काफी बढ़ रहे हैं. लेकिन इन अपराधों में 'चोरी' का दबदबा अब भी कायम है. कुल दर्ज मामलों में से 2,46,882 यानी 87.9% मामले सिर्फ चोरी के हैं. इन आंकड़ों में दिल्ली का हिस्सा सबसे चौंकाने वाला है. साल 2024 में दिल्ली में चोरी की कुल 1,80,973 वारदातें दर्ज हुईं. यहां हर हफ्ते करीब 3,480 और हर दिन लगभग 497 (करीब 500) मामले दर्ज किए जा रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद मुंबई में 10,854 मामले (4.4 प्रतिशत), बेंगलुरु में 9,229 मामले (3.7 प्रतिशत) और जयपुर में 9,051 मामले (3.7 प्रतिशत) दर्ज किए गए. हालांकि, 2024 में ‘संपत्ति के खिलाफ अपराध' के मामलों में 2023 की तुलना में 14.4 प्रतिशत की कमी आई है. 2023 में 3,28,100 मामले दर्ज हुए थे. आंकड़ों के मुताबिक, आईपीसी और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत कुल 5,93,096 मामलों में चोरी के मामले सबसे अधिक रहे.

दिल्ली में प्रेम प्रसंगों और अवैध संबंधों से जुड़े सबसे ज्यादा हत्या के मामले
महानगरों की तुलना में दिल्ली में सबसे ज्यादा हत्याएं अवैध संबंधों और प्रेम प्रसंगों के कारण हुई हैं. एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 'प्रेम प्रसंगों' के कारण 11 हत्याएं और 'अवैध संबंधों' के कारण 30 हत्याएं दर्ज की गईं. एनसीआरबी की 2024 की रिपोर्ट से पता चला है कि 20 लाख से अधिक आबादी वाले 19 महानगरों में बेंगलुरु दिल्ली के बाद दूसरे स्थान पर है, जहां प्रेम प्रसंगों से जुड़ी 11 हत्याएं और अवैध संबंधों से संबंधित 19 हत्याएं दर्ज की गईं. मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में इन दोनों श्रेणियों के अंतर्गत अपेक्षाकृत कम हत्याएं दर्ज की गईं.
दिल्ली में, हत्या के ज्यादातर मामलों में परिवार, संपत्ति और धन से संबंधित विवाद मुख्य कारण थे. 'विवाद' श्रेणी के अंतर्गत कुल 313 हत्याएं दर्ज की गईं, जिनमें से 228 'मामूली कारणों' से हुईं। इसके बाद 'धन' संबंधित विवादों के कारण 40 और 'संपत्ति' से जुड़े विवादों के कारण हत्या के 30 मामले दर्ज किए गए. राजधानी दिल्ली विभिन्न श्रेणियों में हत्याओं के मामलों में भी शीर्ष पर रही जिनमें 'विवाद' और 'डकैती' जैसे मकसद शामिल हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दिल्ली में डकैतों द्वारा 87 लोगों की हत्या की गई.
क्या है दिल्ली पुलिस का तर्क?
चोरी के इन डरावने आंकड़ों पर दिल्ली पुलिस का अपना बचाव और तर्क है. पुलिस प्रशासन का मानना है कि राजधानी में अपराध का ग्राफ इतना ऊंचा दिखने की मुख्य वजह ऑनलाइन एफआईआर (e-FIR) की सुविधा है. इस डिजिटल सुविधा के कारण लोगों के लिए बिना थाने गए, घर बैठे शिकायत दर्ज कराना बेहद आसान हो गया है. पुलिस के मुताबिक, जो छोटे-मोटे मामले पहले थानों तक नहीं पहुंच पाते थे, वे भी अब सिस्टम में सीधे दर्ज हो रहे हैं, जिससे कागजों पर चोरियों का आंकड़ा ज्यादा नजर आता है.
यह भी पढ़ें: NCRB Report 2024: देश में कुल अपराध तो घटे लेकिन साइबर क्राइम 18 प्रतिशत तक बढ़े
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं