- ₹250 करोड़ के हवाला कारोबार को रफा-दफा करने के आरोप में नागपुर के साइबर पुलिस स्टेशन के 9 पुलिसवाले निलंबित
- क्रिकेट सट्टेबाजी के आरोपी एकांश जैन ने ₹250 करोड़ से अधिक का हवाला कारोबार किया था
- पुलिस ने बिना वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किए जैन को केवल नोटिस देकर छोड़ दिया था
Cyber Police Suspended: महाराष्ट्र (Maharashtra) के नागपुर (Nagpur) में ऑनलाइन बेटिंग (Online Betting) और धोखाधड़ी (Fraud) से जुड़े मामले में सरकार ने भ्रष्ट पुलिस वालों के खिलाफ गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की. दरअसल, महाराष्ट्र के नागपुर के साइबर पुलिस स्टेशन (Cyber Police Station) में तैनात दो पुलिस निरीक्षक और सात पुलिसकर्मियों को सट्टे के आरोपी के 250 करोड़ रुपये के हवाला के जरिए लेन-देन करने के सबूत मिलने के बाद भी मामले को रफा-दफा करने का आरोप है। इन पर आरोप है कि इन्होंने केवल ₹500 की शिकायत के आधार पर एक क्रिकेट बुकी को 250 करोड़ रुपये के लेन-देन के सबूत मिलने के बाद बी आरोपी को फरार करा दिया.
नागपुर शहर में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए सदर इलाके में साइबर पुलिस स्टेशन बनाया गया था, लेकिन अब इसी पुलिस स्टेशन के एपीआई और पुलिसकर्मियों के बीच आपस में मारपीट हो गई और यह विवाद पुलिस आयुक्त तक जा पहुंचा. अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हुई इस भिड़ंत पर कड़ा संज्ञान लेते हुए पुलिस निरीक्षक बलीराम सुतार सहित नौ लोगों को निलंबित कर दिया गया है.
यह है पूरा मामला
दरअसल, क्रिकेट सट्टेबाजी का आरोपी हिरेन भोजवानी नामक व्यक्ति ने पुणे के एक क्रिकेट बुकी एकांश जैन के खाते में ₹500 ऑनलाइन भेजे. भोजवानी ने नागपुर साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि जैन उसके ₹500 वापस नहीं कर रहा है. इस शिकायत पर कार्रवाई के लिए साइबर पुलिस स्टेशन के निरीक्षकों ने एक टीम बनाई और जैन से पूछताछ के लिए उसे पुणे भेजा. हैरानी की बात यह है कि इस टीम ने पुणे में जांच शुरू करने से पहले किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को इसकी सूचना नहीं दी. जांच टीम ने पुणे के खराड़ी इलाके से एकांश जैन और उससे जुड़े 14 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की. इस दौरान क्रिकेट सट्टेबाजी का एक बड़ा जाल सामने आया. पता चला कि एकांश जैन ने 40 से अधिक विभिन्न बैंक खातों के जरिए 250 करोड़ रुपये से ज्यादा का हवाला कारोबार किया था. इसके बावजूद, पुलिस टीम ने उसे केवल एक नोटिस देकर छोड़ दिया, जिसके बाद एकांश फरार हो गया.
मनमाने तरीके से जांच के हैं आरोप
इस पूरे मामले में ₹500 के अपराध की FIR के अलावा पुलिस स्टेशन की डायरी में कोई और एंट्री नहीं है. आरोप है कि साइबर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बलीराम सुतार (दक्षिण), पीआई योगेश घारे (उत्तर) और सहायक पुलिस निरीक्षक विजय राणे ने मनमाने ढंग से जांच की और मुख्य आरोपी एकांश जैन को जाने दिया.
हवालदार की शिकायत पर हुई कार्रवाई
इसके बाद सहायक पुलिस निरीक्षक विजय राणे के केबिन में हवालदार प्रफुल्ल ठाकरे इस गुप्त मिशन के बारे में चर्चा करने पहुंचे. इस दौरान दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि ठाकरे का मोबाइल छीन लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई. इसके बाद ठाकरे दो दिनों तक लापता रहे. उनके परिवार ने थाने में शिकायत भी दर्ज कराई. जब प्रफुल्ल ठाकरे वापस लौटे, तो उन्होंने सीधे पुलिस आयुक्त से मुलाकात कर आपबीती सुनाई.
पौसों के लेन-देन के एंगल से भी हो रही है जांच
पुलिस आयुक्त रवींद्र कुमार सिंघल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नौ लोगों के निलंबन का आदेश जारी कर दिया. उन्होंने कहा कि साइबर विभाग के दो निरीक्षकों ने काम में भारी अनियमितता बरती है और पुलिस कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे हैं. अब इस बात की जांच की जा रही है कि क्या एपीआई विजय राणे और हवालदार प्रफुल्ल ठाकरे के बीच मारपीट पैसों के लेन-देन को लेकर तो नहीं हुई थी. फिलहाल, मुख्य आरोपी फरार है और इस मामले को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया है. पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जब पीड़ित न्याय की उम्मीद में आते हैं, तो उनके साथ न्याय होना चाहिए. इसमें कोताही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.
"कोई दोषी बख्शा नहीं जाएगा"
वहीं, इस पूरे मामले में नागपुर के पुलिस आयुक्त डॉ. रवींद्र कुमार सिंघल का कहना है कि नागपुर शहर में पिछले कुछ समय में साइबर अपराध बढ़े हैं. ऐसे मामलों को सुलझाना जरूरी है, लेकिन साइबर पुलिस अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन किया है. जांच में तथ्य सही पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई है.
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इस पूरे प्रकरण ने साइबर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. नागपुर पुलिस बल में इसे लेकर भारी हलचल है. इस घटना से पुलिस की छवि धूमिल हुई है और अब मांग की जा रही है कि दोषी अधिकारियों पर निलंबन के साथ-साथ कठोर कानूनी कार्रवाई भी की जाए.
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