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Exclusive: भारतीय स्पिनरों की तारीफ, दिल्ली के मसालों से प्यार, रणजी ट्रॉफी का मुरीद हुआ ऑस्ट्रेलियाई अंपायर

दिल्ली के पालम में हुए एक रणजी ट्रॉफी मैच में ऑस्ट्रेलियाई अंपायर को बिल्कुल नया अनुभव मिला. दरअसल, 2026-27 के बीसीसीआई-क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया अंपायर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत, बेन ट्रेलर भारत में दो रणजी ट्रॉफी मैचों में अंपायरिंग कर रहे हैं.

Exclusive: भारतीय स्पिनरों की तारीफ, दिल्ली के मसालों से प्यार, रणजी ट्रॉफी का मुरीद हुआ ऑस्ट्रेलियाई अंपायर
ऑस्ट्रेलियाई अंपायर बेन ट्रेलोर
X (formerly Twitter)

दिल्ली के पालम में हुए एक रणजी ट्रॉफी मैच में एक अनोखा नजारा देखने को मिला. चार दिन से भी कम समय में 1,100 से ज़्यादा रन बने, तीन बड़े शतक लगे, और एक ऑस्ट्रेलियाई अंपायर को बिल्कुल नया अनुभव मिला. 2026-27 के BCCI-क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया अंपायर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत, ऑस्ट्रेलियाई अंपायर बेन ट्रेलर भारत में दो रणजी ट्रॉफी मैचों में अंपायरिंग कर रहे हैं, जबकि भारत के पराशर जोशी ऑस्ट्रेलिया में शेफील्ड शील्ड और वन-डे कप में अंपायरिंग करेंगे.

NDTV के साथ एक खास बातचीत में इस पुरस्कार विजेता अंपायर ने विदेशी परिस्थितियों में सीखने, रणजी की सपाट पिचों की चुनौतियों और भारतीय स्पिनरों की सटीक गेंदबाजी के बारे में बात की. इस मौके के बारे में ट्रेलोअर ने कहा, 'किसी दूसरे देश के माहौल में आना वाकई बहुत चुनौतीपूर्ण होता है. भारत में यह फर्स्ट-क्लास क्रिकेट है. यह मुश्किल तो रहा, लेकिन इसमें बहुत मजा भी आया. सबसे अच्छी बात यह है कि अलग-अलग परिस्थितियों में आप पर दबाव पड़ता है और आप अपने बारे में और ज़्यादा जान पाते हैं.'

भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई पिचों में बताया अंतर

भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई पिचों के अंतर पर उन्होंने कहा कि, 'यह काली मिट्टी वाली पिच (पालम ग्राउंड, दिल्ली) खेल आगे बढ़ने के साथ नीची होती गई, लेकिन बिल्कुल भी टूटी नहीं. चार दिनों तक एक ही छोर पर खड़े रहना और दूसरे छोर पर केवल चार ओवर होना, मेरे लिए एक नया अनुभव था. ऑस्ट्रेलिया में, हम पहले कुछ दिनों के भीतर ही छोर बदल लेते हैं.'

पहली बार की अलग तरह की अंपायरिंग

यह उनके लिए एक नया व्यक्तिगत अनुभव भी था. 'यह पहली बार था जब मैंने ऐसी पारी में अंपायरिंग की, जिसमें एक टीम ने 650 रन बनाए. इसके बाद दूसरी टीम ने भी लगभग 460 रन बना दिए. पिच भले ही सपाट हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अंपायरिंग करना आसान है.' उन्होंने बताया कि यहां का मौसम उनके लिए एक सुखद आश्चर्य था. '30-31 डिग्री तापमान और हल्की हवा. यह बिल्कुल मेरे घर जैसा था. 38 डिग्री तापमान और 100% उमस के बजाय, यह यहां की शुरुआत के लिए एकदम सही था'

भारतीय स्पिनरों के हुए फैन

भारतीय स्पिन गेंदबाजी का सामना करने पर उन्होंने कहा, 'इस हफ्ते हमें काफी स्पिन देखने को मिली, खासकर दूसरी पारी में. यहां के स्पिनर वाकई बहुत प्रतिभाशाली हैं. उनकी कला बहुत निखरी हुई है और वे बहुत सटीक गेंदबाजी करते हैं.' 'ऑस्ट्रेलिया में, हमें आमतौर पर तेज गेंदबाज ज़्यादा देखने को मिलते हैं क्योंकि वहां की पिच पर ज़्यादा उछाल (बाउंस) और घास होती है, इसलिए स्पिनर बाद में आते हैं. मैं वास्तव में यहां स्पिनरों द्वारा बनाए जाने वाले दबाव का सामना करने के लिए उत्सुक था. मुंबई में, लाल मिट्टी होने के कारण, मुझे ज्यादाउछाल और टर्न की उम्मीद है.'

एक्सचेंज प्रोग्राम के बारे में कहा कि, 'यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है. हमारे सभी अंपायर इसके लिए मेहनत करते हैं. जब मुझे भारत आने का बुलावा आया, तो यह मेरे लिए बहुत मायने रखता था.' उन्होंने पिछले साल पर्थ में कर्नाटक के अभिजीत बेंजेरी के साथ अंपायरिंग करने का ज़िक्र किया. 'वह ऑस्ट्रेलिया आए और उन्होंने WACA और फिर गाबा में तेज गेंदबाजी का अनुभव लिया. उन्होंने बहुत शानदार काम किया. हम अंपायर आज भी इस बारे में बात करते हैं कि वह कितनी अच्छी तरह वहां घुल-मिल गए थे. यह एक बेहतरीन मौक़ा है.'

रणजी डेब्यू से पहले थी घबराहट

रणजी डेब्यू से पहले उन्होंने कहा कि, 'यह एक तरह की अच्छी घबराहट थी, एक उत्सुकता थी. हम यहां के माहौल में ढलने के लिए चार दिन पहले ही आ गए थे. पहले दिन जब मैं मैदान की तरफ जा रहा था, तो मैं बहुत उत्साहित था. एक बार पहला ओवर पूरा हो जाए, तो आप बस क्रिकेट के खेल में पूरी तरह डूब जाते हैं और कोशिश करते हैं कि सभी खिलाड़ियों के साथ निष्पक्ष रहें.'

उन्होंने मैच अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल की तारीफ की. 'विनोद, अर्जुन और मैच रेफरी के साथ हमारा तालमेल बहुत अच्छा रहा. उन्होंने हमारा बहुत अच्छे से स्वागत किया. इससे यहाँ के माहौल में ढलना बहुत आसान हो गया.'

खिलाड़ी से अंपायर तक का सफर

ट्रेलोअर ने 11 साल की उम्र में खेलना शुरू किया और 23 साल की उम्र तक खेलते रहे. 16 साल की उम्र में, उन्होंने अपने पिता के साथ 'लॉज़ ऑफ़ क्रिकेट' (क्रिकेट के नियम) का कोर्स किया. ऑस्ट्रेलिया और UK में लगातार तीन गर्मियां खेलने के बाद, उन्होंने 'न्यू साउथ वेल्स क्रिकेट अंपायर्स एंड स्कोरर्स एसोसिएशन' के साथ अपना लेवल 2 पूरा किया. 24 साल की उम्र में पूरी तरह से अंपायरिंग में आने से पहले, वह शनिवार को प्रीमियर क्रिकेट खेलते थे और रविवार को अंपायरिंग करते थे.

दिल्ली के मसालों से प्यार

इस ऑस्ट्रेलियाई अंपायर ने भारत को बहुत जल्दी अपना लिया है. दिल्ली में रात 2 बजे पहुंचने के बाद, उन्होंने त्योहारों के मौसम में 10 घंटे शहर घूमने में बिताए. 'मैं स्थानीय रेस्तरां में गया, बाज़ारों में घूमा और मसाले खरीदे. मुझे अपने घर पर भारतीय खाना बनाना बहुत पसंद है. यहां का खाना लाजवाब है - वे हंसते हुए बोले, मुझे लगता है कि मेरा थोड़ा वज़न भी बढ़ गया है.'

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