राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव में इस बार गेंद और बल्ले की चर्चा कम और सियासी शह-मात का खेल ज्यादा देखने को मिल रहा है. 29 सितंबर को होने वाले इस चुनाव में राजस्थान के कई रसूखदार राजनीतिक परिवारों के बेटे सीधे तौर पर मैदान में उतर आए हैं. आज यानी 28 सितंबर को नाम वापसी का आखिरी दिन है, जिसके बाद यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि इस सियासी पिच पर आखिरी मुकाबले में कौन टिकता है और किसका विकेट गिरता है.
अध्यक्ष की कुर्सी के लिए तीन बड़े राजनीतिक घराने आमने-सामने
इस बार आरसीए के अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला त्रिकोणीय बना हुआ है और तीनों ही दावेदार बड़े राजनीतिक परिवारों से ताल्लुक रखते हैं:
धनंजय सिंह खींवसर: वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे हैं, जो अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में डटे हैं.
पराक्रम सिंह राठौड़: पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ के बेटे हैं. हालांकि, उन्होंने संकेत दिया है कि सरकार समर्थित पैनल की राह आसान करने के लिए वे अपना नाम वापस ले सकते हैं.
बृजकिशोर शर्मा: इनका अपना एक अलग पैनल है, जिसे पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी यानी सीधे तौर पर सरकार के समर्थन से जोड़कर देखा जा रहा है.
सिर्फ अध्यक्ष ही नहीं, हर बड़े पद पर मंत्रियों-नेताओं के बेटों का कब्जा
आरसीए के इस चुनाव में सियासी परिवारों की दिलचस्पी सिर्फ अध्यक्ष पद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरी कार्यकारिणी पर ही 'पुत्र मोह' का रंग चढ़ा हुआ है:
उपाध्यक्ष पद: शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर इस सीट के लिए ताल ठोक रहे हैं.
कोषाध्यक्ष पद: बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी रेस में हैं.
सचिव और उपाध्यक्ष पद: बीजेपी विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव ने दोनों पदों के लिए अपनी दावेदारी पेश की है.
खिलाड़ी नहीं, सिर्फ 38 'खास' वोटर तय करेंगे आरसीए का सिकंदर
क्रिकेट के इस बड़े दंगल का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें राजस्थान का कोई भी आम क्रिकेट खिलाड़ी वोट नहीं डालेगा. आरसीए की फाइनल वोटर लिस्ट में केवल 38 वोटर जो जिला क्रिकेट संघों के प्रतिनिधि होते हैं वो ही शामिल हैं. ऐसे में सारा खेल इन 38 वोटों के गणित और जोड़-तोड़ में छिपा है. पर्दे के पीछे से जिला संघों के इन प्रतिनिधियों को साधने के लिए हर गुट एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है.
आखिर क्यों इतनी खास है आरसीए की गद्दी?
राजस्थान क्रिकेट की इस संस्था का सालाना बजट लगभग 50 करोड़ से 100 करोड़ रुपये के बीच होता है. यह भारी-भरकम पैसा बीसीसीआई (BCCI) से मिलने वाले फंड, मैचों के आयोजन, मैदान के किराए और एकेडमी की फीस से आता है. यही वजह है कि ललित मोदी से लेकर सीपी जोशी और वैभव गहलोत तक, राजस्थान के सबसे प्रभावशाली चेहरे हमेशा आरसीए की कमान अपने हाथ में रखने के लिए बेताब रहे हैं.
कोर्ट के दखल के बाद हो रहा है यह चुनाव
आरसीए में लंबे समय से चल रही खींचतान और कानूनी विवाद के बाद यह चुनाव हो रहे हैं. मामला राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचा था, जिसके बाद 1 जुलाई 2026 को कोर्ट ने एडहॉक कमेटी को हटाकर अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर ए. सावंत को प्रशासक नियुक्त किया था. अब उन्हीं की देखरेख में 29 सितंबर को वोटिंग होगी, लेकिन उससे पहले आज होने वाली नाम वापसी के बाद ही इस बड़े सियासी ड्रामे का असली क्लाइमेक्स सामने आएगा.
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