- भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे को सबसे पहले भारत को ही समझना और सामना करना जरूरी है
- 26/11 मुंबई हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और अब आतंकवाद को सामान्य नहीं माना जाएगा
- तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच समझौते के असर का आकलन समय पर निर्भर करेगा और देशों के व्यवहार से साफ होगा
NDTV World Summit में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान के साथ मौजूदा स्थिति पर बात की. उन्होंने अमेरिका के साथ पाकिस्तान के बढ़ते संबंधों पर भी अपनी राय रखी. इसके साथ ही तुर्की और सऊदी अरब के साथ उसके समझौते से कितना भारत पर असर पड़ेगा इस पर भी बात की. जयशंकर ने सभी बातों के केंद्र में 26/11 को खासतौर पर रखा.
सवाल- पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान और विदेश मंत्री ने मौजूदा ट्रंप प्रशासन को रिझाने का बहुत बढ़िया काम किया है. अब तक ऐसा लग रहा था कि वाशिंगटन आखिरकार सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं को समझ गया है. लेकिन अब ऐसा पूरी तरह से सच नहीं लगता, कम से कम वाशिंगटन के शीर्ष स्तर पर तो नहीं, भले ही निचले स्तरों पर वे सही बातें कहते हों. यह आपके लिए कितनी बड़ी चिंता का विषय है? और क्या इससे दिल्ली और वाशिंगटन के बीच के रिश्तों पर कोई सवालिया निशान लगता है?
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जयशंकर का जवाब- देखिए, मुझे फिर से एक दिक्कत है, और वह यह है कि आपने जिस तरह से सवाल पूछा है, मुझे उसी पर आपत्ति है. मैं आपको बताता हूं कि मेरी दिक्कत क्या है. आप इसे ऐसे पेश कर रहे हैं जैसे सारा मामला सिर्फ इस बात पर टिका हो कि वाशिंगटन इसे समझता है या नहीं. अगर वाशिंगटन इसे इतनी अच्छी तरह समझता था, तो 2008 में 26/11 के समय हमने कोई कदम क्यों नहीं उठाया? और जब हमने कदम उठाया भी, तो ऐसा इसलिए नहीं हुआ कि वाशिंगटन इसे समझ गया था. हमने इसलिए कदम उठाया क्योंकि हम खुद इसे समझ गए थे. सबसे पहली बात, यह भूल जाइए कि कोई और आतंकवाद के मुद्दे को सही ढंग से समझेगा; पहले आप खुद इसे सही ढंग से समझें. अगर आपके पास विचारों में स्पष्टता नहीं है, अगर आपमें दृढ़ विश्वास नहीं है, अगर आपमें आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का पक्का इरादा नहीं है, तो यह मत सोचिए कि कोई और आपके लिए यह काम कर देगा. तो संदेश क्या है? आज की स्थिति को देखें—सिंध, बालाकोट और उरी के बीच क्या बदलाव आया है? बदलाव यह है कि अगर आतंकवाद जारी रहता है, तो अब सब कुछ पहले की तरह सामान्य नहीं चलेगा. ऐसा नहीं होगा कि आप कुछ समय के लिए रुकें और फिर कहें, ठीक है, काफी समय हो गया है, चलो फिर से उनसे बातचीत शुरू करते हैं. पहले यही पैटर्न हुआ करता था. मुझे लगता है कि 26/11 की घटना—जहां मैं सेक्रेटरी रुबियो को भी ले गया था—एक याद दिलाने वाली घटना होनी चाहिए. यह इस बात की याद दिलाता है कि हमारे साथ कितना कुछ गलत हो रहा है, और यह भी कि हमारे लिए जवाब देना कितना जरूरी है. यकीन मानिए, जब आप जवाब देंगे, तो दुनिया इस पर ध्यान देगी. अगर आप जवाब नहीं देंगे, तो दुनिया अपने खेल खेलेगी.

सवाल- मंत्री जी, रणनीतिक हलकों में आजकल एक सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि क्या तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ समझौता, भविष्य में होने वाली पहलगाम या उरी जैसी घटनाओं पर कोई असर डालेगा? आपको क्या लगता है? आपका क्या सोचना है?
विदेश मंत्री का जवाब- मुझे लगता है कि यह एक ऐसी स्थिति है जहां आप बस यही कह सकते हैं कि वक्त ही बताएगा. आप देखिए, अभी दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है, उस पर नजर डालें. मुझे लगता है कि अंत में, देशों को उनके कामों से ही आंका जाएगा, जिसमें हम भी शामिल हैं. कई मामलों में, अलग-अलग देश अपना-अपना रुख अपनाएंगे. देश यह देखेंगे कि कौन सा रुख असल में हकीकत बनता है, तो देखते हैं क्या होता है.
सवाल- पाकिस्तान को लेकर एक स्पष्ट नीति हमने पिछले कुछ समय में देखी है. आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं होगी. क्या भारत सरकार इस रिश्ते को अब गैर जरूरी मान चुकी है या फिर अभी भी हम एक इच्छा रखते हैं इस रिश्ते को बेहतर करने की?
जयशंकर का जवाब- नहीं, देखिए. इच्छा तो हर समय था कि पड़ोसी देश से अच्छे रिश्ते रहें. पर हकीकत क्या है? टेररिज्म की. तो आप ही मुझे बताइए की हम टेररिज्म को इग्नोर करे क्या? आप देश से पूछिए आज वो सवाल. इसीलिए मैं बार बार ये 26/11 का उदाहरण मैं दोहराता हूं. दुनिया ने देखा कि हमने 26/11 के बाद क्या किया? और सच्चाई ये है कि हमने कुछ नहीं किया. तो जो आपका सवाल है कि क्या हम पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं तो जवाब है कि बिल्कुल, हम पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं. हम सभी पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं. लेकिन अगर आप पूछेंगी कि क्या मैं आतंकवाद को अच्छे संबंधों के लिए देखना बंद कर दूंगा तो मेरा जवाब नहीं होगा. मेरा मानना है कि ये सरकार बहुत क्लियर है. एक चीज मैं आपको बताता हूं कि 26/11 के बाद मुझे लगता है कि नेशनल मूड ऑन पाकिस्तान चेंज्ड आफ्टर 26/11. उससे पहले देश में कुछ लोग अलग-अलग तरह की बातें करते थे मगर 26/11 केवल सरकार ने इधर-उधर की बात की. उसके अलावा सभी का माइंडसेट चेंज हो गया और आप ये देख सकते हैं.
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