- जयशंकर ने बताया कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील तब तक तय नहीं मानी जाएगी जब तक अंतिम समझौता पूरा नहीं हो जाता
- जयशंकर ने राहुल गांधी के मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री से मुलाकात पर उठाए गए सवाल का जवाब भी दिया
- उन्होंने कहा कि रूस से ऊर्जा सप्लाई के मामले में पाबंदियां लगाने से समाधान संभव नहीं है
एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने चिर-परिचित अंदाज में दिखे. जब उनसे पूछा गया कि अमेरिका से ट्रेड डील कितने करीब है तो उन्होंने पलक झपकते जवाब दिया कि जब तक समझौता हो ना जाए तब तक नहीं मानना चाहिए कि समझौता हो गया. इसी तरह जब उनसे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुंबई में मुलाकात पर राहुल गांधी के ऐतराज पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कि क्या भुट्ठो ने इंदिरा गांधी को शिमला में तलब किया था?
इसके बाद एस जयशंकर से पूछा गया कि भारत और रूस के बीच संबंध मजबूत हुए हैं. वहीं अमेरिका ने टैरिफ लगाए हैं. ऐसी स्थिति में भारत के तेल और ऊर्जा की जरूरतों को डाइवर्सिफाई करने को लेकर आपकी क्या राय है.
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एस जयशंकर ने कहा कि अमेरिका भी रूस से सप्लाई ले रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि वह नहीं चाहता कि उसके नागरिक परेशान हों. इसलिए भी समझा जा सकता है कि अपने हितों को सुरक्षित रखना कितना जरूरी है. ये हमारे नजरिए पर मुहर है. ऐसी पाबंदियों की दुनिया कारगर नहीं है. यूरोप और पश्चिम के कई देश रूस से तेल खरीद रहे हैं. मुख्य बात यह है कि यदि आप दुनिया में अपने संबंधों को पाबंदियों के बीच भी स्थापित कर रहे हैं तो जरूरी यह है कि अपने हितों का ख्याल रखा जाए. यह समझने की जरूरत है कि हमें दबाव की राजनीति में आने की जरूरत नहीं है बल्कि अपने हितों का ख्याल रखना होगा.
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि दुनिया की सच्चाई ये है कि वो हिल रही है, बदल रही है. आप पुराने दिनों से इसकी तुलना नहीं कर सकते. इसी वजह से हर कोई सतर्क है. हर कोई अब कई विकल्पों पर काम कर रहा है. कोई एक के भरोसे नहीं रहना चाहता. 5 साल पहले हमने सोचा भी नहीं था कि एक युद्ध इतने लंबे समय तक चल सकता है. एनर्जी से लेकर फाइनेंस तक में अनिश्चितता है. कुल मिलाकर कहें तो बंधक वाली स्थिति है. तो ऐसे समय में हमें गुड जजमेंट की जरूरत है.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जयशंकर
जयशंकर ने कहा, "आपने सेक्रेटरी रुबियो, मंत्री पीयूष गोयल और अन्य लोगों से जो सुना है, वही बात मैं भी कह रहा हूं कि हम इस समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. लेकिन जैसा कि मैंने कहा, अक्सर आखिरी के कुछ चरणों में अपनी चुनौतियां सामने आती हैं. मुझे लगता है कि हमारी टीमें इन चुनौतियों को सुलझाने पर काम कर रही हैं. अगर आप मुझसे पूछें कि वे चुनौतियां असल में क्या हैं, तो माफ कीजिए, मैं उनके बारे में नहीं बता सकता. यह काम बातचीत करने वालों (नेगोशिएटर्स) का है कि वे इसे कैसे सुलझाते हैं."
जयशंकर से पूछा गया कि अमेरिका तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ हुई उस अहम बैठक की बात करें, जिसे आप करके आ रहे हैं तो सोशल मीडिया पर विपक्ष ने, खासकर राहुल गांधी ने, इस पर कोई बहुत अच्छी टिप्पणी नहीं की. उन्होंने रूबियो से आपकी मुंबई में मुलाकात को समन किया जाना बताया है. आप क्या कहेंगे?
विदेश मंत्री ने कहा, "मुझे समझ नहीं आया कि उन्हें मुंबई से क्या दिक्कत है? मुझे तो यह एक बेहतरीन शहर लगता है. यह हमारी आर्थिक राजधानी है, बॉलीवुड का केंद्र है. यहां बहुत कुछ है. पता नहीं, हो सकता है कि मुंबई ही उन्हें पसंद न करती हो! मुझे नहीं पता कि उन्हें ऐसी आपत्ति क्यों है. अगर किसी विदेशी नेता या समकक्ष से मिलने के लिए दिल्ली से बाहर जाना 'तलब किया जाना' है, तो मेरे पास इसके कई उदाहरण हैं. मतलब, श्रीमती गांधी भुट्टो से मिलने शिमला गई थीं, क्या वह कोई शिखर वार्ता थी? सलमान खुर्शीद पाकिस्तानी मंत्री से मिलने जयपुर गए थे. तो देखिए, हम सब समझदार लोग हैं. चलिए, समझदारी से बात करते हैं और फिर चलते हैं. ठीक है?"
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