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वाराणसी से कोलकाता सिर्फ 5 घंटे में, छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम तेज, बिहार से बंगाल तक हाईस्पीड कनेक्टिविटी

 वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के किनारे पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा योजना को भी लागू किया जाएगा. इसके लिए  NHAI ने बिहार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग को करीब 50 करोड़ रुपये दिए हैं.

वाराणसी से कोलकाता सिर्फ 5 घंटे में, छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम तेज, बिहार से बंगाल तक हाईस्पीड कनेक्टिविटी
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य तेज.
AI ग्राफिक इमेज
  • वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से यात्रा का समय आधा से भी कम हो जाएगा
  • छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 610 किलोमीटर है, इसका निर्माण तेजी से चल रहा है
  • एक्सप्रेसवे के निर्माण में लगभग 35000 करोड़ रुपये की लागत आ रही है

वाराणसी से पश्चिम बंगाल के कोलकाता तक का सफर अब बहुत ही कम समय में जल्दी तय होगा. भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम तेजी से चल रहा है. इसके पूरा होने के बाद बनारस और कोलकाता जैसे बड़े शहरों की दूरी कम हो जाएगी. वाराणसी से कोलकाता पहुंचने में लगने वाला 12 से 13 घंटे वाला समय घटकर सिर्फ 5-6 घंटे रह जाएगा. इस सिक्स लेन हाईस्पीड कॉरिडोर से यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच की कनेक्टिविटी शानदार हो जाएगी. 

वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे कितना लंबा?

यह छह लेन एक्सप्रेसवे 610 किलोमीटर लंबा बनाया जा रहा है. यूपी के वाराणसी में रिंग रोड के पास 27 किमी. सेक्शन पर मिट्टी भराई और निर्माण कार्य जारी है. वहीं बिहार के गया और अन्य जिलों में भी काम तेजी से चल रहा है.इसका करीब 162 किमी. लंबा हिस्सा बिहार में बनेगा. एक्सप्रेसवे बनने के बाद गयाजी से कोलकाता पहुंचने में लगने वाला 7 से 9 घंटे का सफर घटकर करीब 4 घंटे रह जाएगा.

एक्सप्रेसवे बनाने में कितना खर्च?

यह एक्सप्रेसवे करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है, गया जिले में इसे बनाने में 1,248 करोड़ रुपये का खर्च आ रहा है.गया में इस एक्सप्रेसवे के 33 किमी. लंबे 'पैकेज VII' का करीब 36% काम पूरा हो चुका है. बिहार के चार जिलों कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया को इस नए रूट का फायदा मिलेगा.

कॉरिडोर के किनारे लगेंगे 45,000 पेड़

 वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के किनारे पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा योजना को भी लागू किया जाएगा. इसके लिए  NHAI ने बिहार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग को करीब 50 करोड़ रुपये दिए हैं. इसका मकसद वन्यजीवों के रहने की जगह की रक्षा करना, लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.वहीं कॉरिडोर के किनारे करीब 45,000 पौधे भी लगाए जाएंगे.

वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे रूट मैप

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रिंग रोड के पास चंदौली जिले के बरहुली गांव से शुरू होगा 
बिहार में कैमूर, रोहतास (सासाराम) औरंगाबाद और गया जिलों से गुजरेगा,कुल दूरी 170 किमी. होगी.
झारखंड में चतरा, हजारीबाग, रामगढ़ और बोकारो से निकलेगा. कुल दूरी 187 किमी. होगी. 
पश्चिम बंगाल में पुरुलिया, बांकुड़ा, हुगली और हावड़ा होते हुए यह कोलकाता के पास उलुबेरिया तक बनेगा.

2028 तक काम पूरा होने का लक्ष्य 

इस प्रोजेक्ट की आधारशिला पीएम मोदी ने 23 फरवरी 2024 को रखी थी. मार्च 2028 तक इस एक्सप्रेसवे का पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे इसे जना के लिए खोला जा सके.पहले इसका  पूरा होने का लक्ष्य 2027 रखा गया था, लेकिन सासाराम में सुरंग निर्माण और बंगाल में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया की वजह से इसे आगे बढ़ा दिया गया है. 

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