SL vs IND 2026 Tests : भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह अपनी इंजरी से रिकवर न होने के कारण श्रीलंका के खिलाफ होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं. बुमराह की जगह पर जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है. आकिब अब तक खेले 43 फर्स्ट क्लास मैचों में 18 की औसत से 162 विकेट चटका चुके हैं और उन्होंने एक पारी में 5 विकेट लेने का कारनामा 16 बार किया है. वहीं, लिस्ट-ए क्रिकेट में आकिब 36 मुकाबलों में 27 की एवरेज से 56 विकेट निकाल चुके हैं. घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के कारण आकिब को भारतीय टेस्ट टीम में जगह देने की मांग लंबे समय से उठ रही थी. ऐसे में जानते हैं तीन कारण क्या बुमराह के विकल्प के तौर पर आकिब नबी सही विकल्प हैं.
श्रीलंका की पिच पर गेंद को स्विंग कराने की क्षमता
आकिब नबी, जो पिछले कुछ सालों से रणजी ट्रॉफी और घरेलू क्रिकेट में जम्मू-कश्मीर की टीम का अहम हिस्सा रहे हैं, उन्होंने उपमहाद्वीप की परिस्थितियों में काफी गेंदबाजी की है और उन्हें इसमें अच्छी सफलता भी मिली है. हालांकि, उपमहाद्वीप के लिए खास तौर पर 'सीम बॉलर' होने का कोई तय कॉन्सेप्ट नहीं है, लेकिन भारत को ऐसे गेंदबाज की जरूरत हो सकती है, हाल के समय में जसप्रीत बुमराह को छोड़कर बाकी गेंदबाजों की ऐसी परिस्थितियों में गेंदबाजी कुछ खास नहीं रही है. ऐसे में उम्मीद है कि नबी श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में अपनी छोप छोड़ने में सफल रहेंगे.
मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा, जो अब तेज गेंदबाजी यूनिट में सबसे अनुभवी गेंदबाज हैं, रेड-बॉल क्रिकेट में ज्यादातर उपमहाद्वीप के बाहर ही गेंदबाजी करते हैं. ऐसे में भारत को एक ऐसे गेंदबाज की जरूरत है जिसे इन परिस्थितियों की अच्छी समझ हो, नबी अपनी गेंदबाजी के दौरान विविधता के लिए जाने जाते हैं. इसके अलावा, उनकी गेंदबाजी की खूबियां उपमहाद्वीप की परिस्थितियों के लिए एकदम सही हैं. जहां प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार अपनी लंबाई और गति का इस्तेमाल करके पिच पर जोर से गेंद पटक कर गेंदबाजी करना पसंद करते हैं तो वहीं दूसरी ओर आकिब नबी की गेंद को स्विंग कराने और उसे तेजी से स्किड कराने की क्षमता श्रीलंका की परिस्थितियों में ज्यादा असरदार साबित हो सकती है.
रेड-बॉल का स्पेशलिस्ट बॉलर
जब भारतीय टीम टेस्ट क्रिकेट में अपने सबसे अच्छे दौर में थी, तब उनके पास हमेशा एक ऐसा बॉलर होता था जो मुख्य रूप से सिर्फ रेड-बॉल क्रिकेट खेलता था, जैसे इशांत शर्मा या उमेश यादव. हाल के समय में, सभी फॉर्मेट में बॉलर्स की मांग और लगातार बदलते खिलाड़ियों के पूल को देखते हुए, रेड-बॉल स्पेशलिस्ट कम हो गए हैं. ऐसे में नबी का टीम में आना भारत के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. मौजूदा स्क्वाड में भी सिराज, प्रसिद्ध और गुरनूर बराड़ जैसे खिलाड़ी हाल ही में व्हाइट-बॉल क्रिकेट में ज्यादा खेले हैं. यहां तक कि प्रिंस यादव, यश ठाकुर और अशोक शर्मा जैसे नए खिलाड़ी भी व्हाइट-बॉल क्रिकेट में ज्यादा खेलते हैं. ऐसे में, आकिब नबी का टीम में आना टेस्ट क्रिकेट में भारत की स्थिति को मजबूत करना होगा. उन्हें जब टेस्ट टीम में शामिल किया गया है तो उनको भविष्य के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए और पेस बॉलिंग पूल में शामिल रखने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए.
बैटिंग में गहराई का विकल्प
चाहे कोई भी फॉर्मेट हो, टीम इंडिया का बैटिंग डेप्थ पर जोर जगजाहिर, गंभीर ऐसे खिलाड़ियों को टीम में लाने की कोशिश करते हैं जो बल्लेबाजी में भी योगदान देने में सहायक हो. नबी इस उम्मीद को पूरा करते हैं.अपनी बेहतरीन बॉलिंग के अलावा, आकिब नबी बैटिंग में भी पिच पर टिके रहने की काबिलियत रखते हैं. नबी के टीम में रहने से भारत की प्लेइंग इलेवम में टेल-एंडर्स में बल्लेबाजी मजबूत हो सकती है. ऐसे में उनका टीम में आना एक तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है, इससे टीम को संतुलन मिलेगा.याद हो कि रणजी ट्रॉफी 2025-26 के सेमीफाइनल में बंगाल के खिलाफ मैच-विनिंग 42 रन और हाल ही में भारत 'ए' और श्रीलंका 'ए' के बीच हुए अनौपचारिक टेस्ट में नंबर 8 पर बैटिंग करते हुए शानदार 30 रन बनाए थे.
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